ये भी ठीक ही है

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Monday, September 19, 2011

ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये !! - पार्ट 1

 September 19, 2011     BJP, congress, dracula, India, manu, manu shrivastav, manushrivastav, ड्रैकुला को खून चाहिए     7 comments   

भूतो का सरदार ड्रैकुला सरकारी अस्पताल में एक गंदे से बेड पे रुग्ण अवस्था में पड़ा था . खून की कमी के कारण उसका चेहरा पीला पड़ा था. ये वही ड्रैकुला है, जिसका चेहरा एक दम लाल हुआ करता था , लोगो का खून पि पि के. 

अस्पताल में वो अपनी घड़ियाँ गिन रहा था. उसके सारे संगी साथी उसका साथ छोड़ के चले गए थे. अब एक पिलपिले ड्रैकुला के भला कोई डरता है है क्या ? अब इस महंगाई के ज़माने में उसके रिश्तेदारों को अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा था, वो भला ड्रैकुला के लिए ताज़ा खून कहा से इन्तेजाम करते. कमजोरी के वजह से ड्रैकुला चिडचिडा हो गया था. उसके साथी उसके पीठ पिच्छे उसे ड्रैकुला के वजाए, क्रेकुला कहा करते थे.

सरकारी अस्पताल में उसकी देख रेख करने करने वाला कोई भी नहीं था, प्राइवेट में वो इलाज करा नहीं सकता था. उसके रिश्तेदारों ने उसे सम्पति से बेदखल कर दिया था. अब वो महंगा इलाज तो करा नहीं सकता था. वो अपने जीवन की अंतिम घड़ियाँ गिन रहा था. उसके प्राण पखेरू कभी भी उड़ सकते थे. पर वे थे की उड़ ही नहीं रहे थे. 

पर कहते हैं न, जाको राखे साइयां मार सके न कोय. उस अस्पताल में एक बहुत ही दयालु डॉक्टर विजित पे आई.  उसे ड्रैकुला की दयनीय स्थिति नहीं देखी गयी. वो उसके पास उसका जाने लगी की, एक नर्स बोली उसके पास मत जाइये . बहुत ही कमीना मरीज़ है वो, अकेले में नर्सो के गले में दांते गढ़ा देता है. इस अस्पताल की कोई नर्स उसके नजदीक नहीं जाती. 

"तो एक मरीज़ को ऐसे मरने के लिए छोड़ दोगे तुम लोग? लेडिस के बदले जेंट्स नर्स भेजो उसके पास." डॉक्टर गुस्साई. 

"भेजा था . उसको भी दांत काट लिया. पता नहीं कैसा टेस्ट है इसका. औरत मर्द का कोई फर्क ही नहीं है इसके लिए." नर्स बोली. डॉक्टर , नर्स की बातो पे ध्यान दिये बगैर ड्रैकुला के बेड की तरफ बढ चुकी थी.

उसके पास पहुँच के डॉक्टर वाली मुस्कान , जिसे देख  के ही मरीज़ को लगता है की अब मेरी बीमारी ठीक हो जाएगी, के साथ बोली - "हल्लो !  मैं इस अस्पताल की नयी डॉक्टर हूँ. आप अब बिलकुल मत घबडाइये. अब आपके इलाज में कोई कमी नहीं होगी"

ड्रैकुला मन ही मन हंसा " सरकारी अस्पताल में, प्राइवेट अस्पताल वाली डाईलॉक मार रही है".  

डॉक्टर ने पूछा - "आपका नाम क्या है? " 

ड्रैकुला ने सोचा , सीधे सीधे अपना नाम बता दिया तो, ये भी डर के चली जाएगी . मेरा फिर इलाज नहीं हो पायेगा. उसने अपने नेचर के विपरीत , पुरे पेशेंस के साथ डॉक्टर को समझाया की वो ड्रैकुला है. ड्रैकुला का नाम सुन के डॉक्टर ज़रा सी भी नहीं डरी तो, ड्रैकुला को ताज्जुब हुआ .

उसने कारण पूछा तो डॉक्टर बोली - "हम डॉक्टर, को किसी से डरने की क्या जरुरत है. हमारा काम है लोगो की सेवा करना. उसकी जान बचाना. अब वो चाहे इन्सान हो या हैवान . और फिर मैं भारतीय हूँ, और आप हमारे मेहमान हुए. "  

"आपकी बात सुन के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली" - ड्रैकुला बोला - "वैसे मैं जानता हूँ , की आप भारतीय लोग अपने देश में आये किसी की भी बहुत इज्ज़त करते हो, उसकी सेवा सुश्रुवा करते हो. चाहे वो इन्सान हो या हैवान. मैंने कसाब के बारे में बहुत पढ़ा है." 

कसाब को मेहमान जैसी इज्ज़त देने की बात सुन के एक आम भारतीय की तरह डॉक्टर झेंप गयी. वो बात को बदलते हुए पूछी - "वो सब छोडिये. ये बताइए, आप भारत कैसे आये?  और आपकी ये हालत कैसे हो गयी?"

ड्रैकुला बोला - "भारत के पिचास भुखमरी के शिकार हो के भूखो मर रहे थे. भारत, जो आबादी के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, उस देश में पिचासो को पिने के लिए लिए इंसानों का खून नहीं मिल पा रहा हो और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी हो. ये बहुत ही चिंता का विषय था हमारे लिए. तो मैं इसी की जाँच करने आया था."

"तो जाँच के दौरान क्या पाया आपने ?" डॉक्टर ने उत्सुकता से पूछा. उसे ड्रैकुला की बात में एक सच्चाई की झलक मिली थी.

ड्रैकुला बोला - "शुरुवाती जाँच में मुझे ये ही पता चला की यहाँ की वर्तमान गठबंधन सरकार की नीतियों ने जनता का खून चूस रखा है, जिससे  पिचासो को पिने के लिए पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा है. और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी है "

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 क्रमशः .............



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7 comments:

  1. Rakesh KumarSeptember 19, 2011 at 9:14 PM

    हे भगवान,क्या वर्तमान सरकार ड्रैकुला के पिशाचों का भी हक मार रही है? यह सवाल तो संसद में उठना चाहिये.
    क्या कटाक्ष किया है आपने मनु भाई.
    आगे की कड़ी का इंतजार है.

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      Reply
  2. prerna argalSeptember 20, 2011 at 2:52 AM

    "शुरुवाती जाँच में मुझे ये ही पता चला की यहाँ की वर्तमान गठबंधन सरकार की नीतियों ने जनता का खून चूस रखा है, जिससे पिचासो को पिने के लिए पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा है. और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी है "
    sach main aaj hamaare desh ke netaon ne janataa ka aisaa hi haal kar diyaa hai .saarthak post bahut badhaai aapko.mere blog per aane ke liye shukriyaa.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  3. रविकरSeptember 20, 2011 at 3:51 AM

    रक्त-कोष की पहरेदारी--
    चालबाज, ठग, धूर्तराज सब, पकडे बैठे डाली - डाली |
    आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |


    दुग्ध-केंद्र मे धामिन ने जब, सब गायों पर छान्द लगाया |
    मगरमच्छ ने अपनी हद में, मत्स्य-केंद्र मंजूर कराया ||


    महाघुटाले - बाजों ने ली, जब तिहाड़ की जिम्मेदारी |
    जल्लादों ने झपटी झट से, मठ-मंदिर की कुल मुख्तारी||


    अंग-रक्षकों ने मालिक की ले ली जब से मौत-सुपारी |
    लुटती राहें, करता रहबर उस रहजन की ताबेदारी ||


    शीत - घरों के बोरों की रखवाली चूहों का अधिकार |
    भले - राम की नैया खेवें, टुंडे - मुंडे बिन पतवार ||


    तिलचट्टों ने तेल कुओं पर, अपनी कुत्सित नजर गढ़ाई |
    तो रक्त-कोष की पहरेदारी, नर-पिशाच के जिम्मे आई |

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      Reply
  4. Mukesh Kumar SinhaSeptember 20, 2011 at 9:42 PM

    uffff!! kya manu aisa kataksh jayaj hai kya?

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  5. LEONSeptember 21, 2011 at 9:03 AM

    jahan daal daal pe sone ki chidiya karti thi basera......ab dryculla ka bhi gark ho gaya h bera.....


    awsm manu bhai.....last me sach me maza aa gaya.....

    keep up the good work

    waiting fr nxt.....

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  6. shephaliSeptember 22, 2011 at 6:15 AM

    This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  7. shephaliOctober 8, 2011 at 5:02 AM

    kya khub kaha

    sach humari sarkaar aise hi Dracula banti jaa rahi hai ....

    Mere Shabd

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
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