खिन्न हो मन
या उठ रहा हो
गुस्से का गुबार,
संकोच में घेरा हो
या झेल रहे हों
कोई संताप,
उदासी का आलम हो
या हो सुखो का
वनवास,
कर देता है,
आसन,
हर मुश्किलों को,
ये,
"मुस्कुराना तेरा"
September 03, 2011
hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, muskurana tera, poem
6 comments
भाई, बहुत सुन्दर लिखा है। निसंदेह यह सच है कि कैसी भी मुश्किल हो किसी अपने कि एक मुस्कराहट , सारी मुश्किलों को आसान बना देती है।
ReplyDeleteमुस्कुराहटें हर दर्द को आसान कर देती हैं
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पे आपका स्वागत है
http://wordsbymeforme.blogspot.com/
sunder prastuti ke liye badhai
ReplyDeleteदेवकीनंदन खत्री का महान उपन्यास 'चंद्रकांता' और 'भूतनाथ'मुफ्त डाउनलोड के लिए 'अपनी हिंदी' पर उपलब्ध है.
ReplyDeletewww.apnihindi.com
waha bahut khub.......कर देता है,
ReplyDeleteआसन,
हर मुश्किलों को,
ये,
"मुस्कुराना तेरा"
बहुत सुन्दर लिखा है
ReplyDelete