ये भी ठीक ही है

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Wednesday, August 15, 2012

मनमोहन सिंह जी की व्यथा - व्यंग

 August 15, 2012     hasya, India, manmoham singh, manu shrivastav, pradhan mantri, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, तरकश, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, हास्य     2 comments   

पंद्रह अगस्त का दिन बहुत ऐतिहासिक है। आज के दिन हीं देश आज़ाद हुआ था और आज के दिन हीं हम अपने प्रधान मंत्री जी को बोलते हुए देख पाते हैं, भाषण देते हुए।
 
आज सारे देश में हर्ष और उल्लास है, लेकिन मनमोहन सिंह जी काफी व्यथित थे। उनकी व्यथा का का मुख्य करना था, लोगो के द्वारा उनपे ये आरोप लगाना की वो बोलते हीं नहीं हैं। सोंच रहे थे की आज के दिन मैं सारे देश के सामने बोलता हूँ, भाषण देता हूँ। और  बाद लोग उस भाषण पे इतना हंगामा करते हैं की मुझे पुरे साल बोलने का मौका नहीं मिल पता। और लोग अपनी गलती देखने के बावजूद मेरी हीं गलतियाँ निकलते हैं। 
मैं इन सब आक्षेपों से तंग आ गया हूँ। लोगों को   ऐसा नहीं करना चाहिए, ये गलत बात है।

खैर काफी दिनों से नहीं बोलने के कारण  बोलने की आदत छुट गयी थी और आज काफी देर तक बोलना पड़ा था। जबड़ों में हल्का हल्का दर्द महसूस कर रहा हूँ। पहले एक पेन किलर तो खा लूं। 

 
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Friday, August 10, 2012

राजनैतिक मैदान में टीम अन्ना !

 August 10, 2012     anna hazare, arvind kejariwal, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

एक चुटकुला है.
एक बस में एक आदमी अपने परिवार के साथ सफ़र कर रहा था. एक वीबी, एक किशोर उम्र का लड़का, छोटा भाई, साले साब, यानि संयुक्त परिवार.
आदमी की किसी बात पे कंडक्टर से लड़ाई हो गयी और कंडक्टर ने आदमी जी को एक लाफा लगा दिया. सारे फॅमिली वाले के सामने लाफा खा के आदमी जी को बहुत गुस्सा आया. जोश में आके चिल्लाये - "अबकी मारा तो मारा, आगे मारा तो तुझे बताऊंगा . कंडक्टर में एक बार फिर खीच दिया कान के दरमियान.  
अब क्या था? आदमी बोला - मुझे फिर मार दिया? मेरे साले साब को मार के दिखा ! कंडक्टर ने उनके साले साब को भी नाप दिया. (यहाँ पे मुझे ये समझ नहीं आया की कन्दक्टार में कैसे पहचाना की येही साले साब हैं, और सही निशाना लगाया). आदमी ने कहा - मेरे साले को मारा? अच्छा चल मेरे भाई को मार के दिखा. कंडक्टर ने उनके भाई को भी एक लगा दिया. आदमी को और गुस्सा आया, बोला मेरे भाई को भी मार दिया, अच्छा मेरी पत्नी को भी मार के दिखा तो बताता हूँ तुझे. कंडक्टर ने उनकी पत्नी को भी मार दिया (भले ही चुटकुले में ही सही कंडक्टर ने उसकी पत्नी को मारा हो, लेकिन ये काम गलत किया था उसने). 
आदमी बोला - अरे तुने तो मेरी पत्नी को भी थप्पड़ मार दिया, तू मेरे बेटे को हाथ लगा के दिखा तो तुझे बताता हूँ, कंडक्टर ने उसके बेटे को भी थप्पड़ लगा दिया, और पूछा - हां बोल क्या बताएगा?
आदमी बोला- कुछ नहीं भाई, बस रोक के  हमे यहीं उतार दो. कंडक्टर में बस रुकवाई और पुरे संयुक्त परिवार को उतार दिया.
निचे उतरने के बाद उसकी पत्नी ने पूछा - ए जी ! एक बात बताओ, तुम तो कुटाये हीं कुटाये , हम सब को काहे कुटवा दिया? आदमी बोला - वो इसलिए की अब घर जा कर कोई किसी को नहीं बताएगा की कंडक्टर में थप्पड़ चलाया था.
खैर, ये तो चुटकुला था और पुराना भी. हंसी तो नहीं हीं आई होगी. अब थोड़ी पॉइंट की बात कर लेते हैं. 
पिछले साल अन्ना जी का अनशन हुआ, तो अनशन के पहले अन्ना जी बोले - जब तक सरकार मांगे मान नहीं लेती हैं. तब तक अनशन चलेगा, अनशन के बाद बोले - सरकार नहीं मानेगी तो मैं फिर अनशन करूँगा.
अन्ना जी का अनशन इस बार उतना धारदार नहीं था, जितना पहली बार में था. पहले तो टीम के लोग अनशन पे बैठे. अन्ना जी बोले - मैं चार दिन देखूंगा, सरकार नहीं मानी तो मैं खुद अनशन पर बैठूँगा. सरकार नहीं मानी.
अन्ना जी ने अनशन शुरू कर दिया, सरकार फिर भी नहीं मानी.
अब अन्ना जी बोले हैं की हम राजनितिक पार्टी बनायेंगे, सरकार अब भी नहीं मानी है. 
दिल और सरकार में एक समानता है, दोनों मानते नहीं. 
मेरा मानना है की टीम अन्ना का राजनीती के मैदान में जाने का फैसला अचानक लिया हुआ फैसला नहीं है. गाँव में कहावत है की हमने रास्ता दिखा दिया अब खुदे चलो इस पे . राजनितिक पार्टियों ने ये रास्ता खुद ही अन्ना को दिखाया है, अब अन्ना टीम किस अंदाज़ से इस पे चलती है ये महत्वपूर्ण है. पर उनको ये कहने से परहेज करना चाहिए, ये कर दिया न, अब ये कर के दिखाओ तो देखता हूँ


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पीएम इन वेटिंग

 August 10, 2012     arvind kejariwal, baba raamdev, India, lal krishna adwani, narendra modi, PM in waiting, prime minister of india, rahul gandhi, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


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मेरे पास मोबाइल है

 August 10, 2012     manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


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Friday, August 3, 2012

कुत्तों का लिंगानुपात - (A)

 August 03, 2012     hasya, kutton ka linganupat, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     4 comments   

बरसात का मौसम इंसानों के लिए हीं नहीं जानवरों के लिए भी मस्ती लेकर आता है.

मुझे याद है, जब में छोटा था, बरसात के मौसम में जब कुत्तों का झुण्ड देख के उन्हें भगाने लिए लिए पत्थर उठाया था तो एक बुजुर्ग ने डांट लगाई - क्या कर रहे हो? बरसात का मौसम है, सारे कुत्ते बौराए रहते हैं, काट लेंगे. 
खैर, तब तो समझ नहीं आया था की क्यों बौराए रहते हैं. बाद में समझ आया की यहो वो वक़्त होता है जब उनकी कामेक्षा चरम पे होती हैं. या यूँ कहें की सिर्फ बरसात में हीं वो सहवास के लिए तैयार होते हैं. यही कारण है की उनकी जनसँख्या इतनी कंट्रोल में हैं. इंसान तो आधे सेकेण्ड में ही "गेट रेडी फ़ॉर एक्शन" हो जाता है, और तडातड तडातड जनसँख्या बढाता है. 

बरसात का मौसम साल में एक बार आता है, और टेंशन की बात तो ये होती है की अगर ये चला गया तो फिर अगले साल की बरसात तक का इंतजार करना होगा. इसलिए लिए सारे कुत्ते इस फिराक में रहते हैं की उनको लाखों का सावन बेकार ना चला जाये. 

एक 'फिमेल' के पीछे दसियों लगे रहते हैं. कम्पीटीशन बहुत टफ्फ होता है. सारे कुत्तों को पता होता है की कोई एक ही "टॉप" करेगा और काम सुख का आनंद प्राप्त करेगा. तो टॉप करने के लिए सारे के सारे आपस में भौं भौं मचाये रहते हैं. 

खैर उनकी कोई गलती नहीं है. "विषय रस" को सबसे निम्न रस माना गया है, लेकिन आनंद तो इसी में आता है सभी को. 

कुत्तों को भी पता है, उनका लिंगानुपात एक के मुकाबले दस का है. जो उनके साथ बहुत नाइंसाफी हैं, समूचे जीव जगत में सिर्फ उनकी के साथ ऐसा लिंगानुपात क्यों हुआ, जाँच का प्रश्न हो सकता है.

पर उनके लिए एक संतोष की बात है. इन्सान जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या कर रहा है, कुछ ही वक़्त में इंसानों का लिंगानुपात भी एक के मुकाबाले ग्यारह होने वाला है.

फिर ये बात कुत्तों को राहत पहुंचा सकती है, की ऐसे विषम लिंगानुपात का दंश सिर्फ वे हीं नहीं झेल रहे हैं.
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Thursday, August 2, 2012

दुनिया गोल है.

 August 02, 2012     manu shrivastav, rakhi, rakhi sawant, sawan, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

आज मुझे पूरा विश्वास हो गया की दुनिया गोल है.
सावन में अंत में राखी आता है.
राखी सावंत में - राखी के अंत में सावन-त आता है
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मोहब्बत जरुर हो जाये

 August 02, 2012     hindi poem, manu shrivastav, poem, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

ना चाहो किसी को इतना की उसे गरूर हो जाये
नशा न उढेलो आँखे से इतना की सरुर हो जाये
मोहब्बत को बस मोहब्बत ही रखो 
जिसे ना हो, उसे भी मोहब्बत जरुर हो जाये 
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