स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल मुखी राम हाई स्कूल तब थावे का एक मात्र हाई स्कूल हुआ करता था. मेरे स्कूल से दुर्गा जी का मंदिर लगभग २ किलोमीटर की दुरी पर है. दो किलोमेटे की दुरी तय करना हमारे लिए तब किसी एवेरेस्ट की चढाई से कम नहीं था. तब हम खेतों की पगडंडियों के बिच शोर्ट कट ढुंढते हुए लग भाग हर शुक्रवार को मंदिर जाते थे.
शुक्रवार और सोमवार को अन्य दिनों की तुलना में कुछ ज्यादा हिन् दर्शनार्थी आया करते थे. यहाँ तक की गोरखपुर, जो लगभग अस्सी किलोमीटर हैं, वहां तक से लोग छोटी लाइन की रेलगाड़ी जो सुबह दस बजे थावे पहुंचती थी, आया करते थे.
तब एक रुपये में दो पेंडा, एक अगरबत्ती और एक चुनरी , हाथ में बांधने के लिए मिलाती थी. बहुत हीं श्रद्धा से पूजा के बाद, हमारी आपस में लड़ाई हो जाती थी. की चुनरी कौन बंधेगा अपने हाथ में. बाद में इसका हल ऐसे निकला की हम चार लोग बारी बारी से बांधा करेंगे.
वापस लौटते समय, मेन रोड के किनारे इमली के कई सारे पेंड़ों से, डंडे पत्थर मार के इमली तोड़ी जाती थी. पत्थर मार के इमली के गुच्छे तोड़ने के हम इतने अभ्यस्त हो गये थे, की अगर कहीं पत्थर मार कर निशाना लगाने की प्रतियोगिता होती तो हममे से हरेक कोई, कोई न कोई मैडल जरुर जीतता.
इमली से भरे हुए स्कूल का झोला, कपडे का झोला, लेकर जब स्कूल पहुंचते, तो क्लास लग चुकी होती थी. और दूसरी घंटी बजने तक हमे बाहर हीं इंतज़ार करना होता था. क्लास में पहुँचाने के बाद सभी इमली पार्टी का दौर शुरू होता. और आधे घंटे में हीं क्लास में मौजूद हर लड़के के जेब में दो दो चार चार इमली पहुँच चुकी होती थी. आखिरी घंटी तक दबी आवाज़ में इमली के चटकारे गूंजते रहते थे. और शाम तक सभी के दांत खट्टे हो चुके होते थे.
तब पुराना मंदिर था, अभी पिछले साल थावे जाना हुआ, तो मंदिर पर काफी बदलाव हो चुके हैं, मंदिर पहले से अधिक भव्य और साफ़ सुथरी लग रही थी. दुर्गा माँ पहले की तरह हीं आज भी सभी के लिए बरस रहा है.
आज भी दुर्गा माँ की शक्ति और आशीर्वाद, मन में इतने गहरे तक पैन्ठी हुई है, कुछ भी कार्य शुरू करने के पहले, जय माँ भवानी, का उच्चारण निकलता है. जय माँ भवानी , सबका कल्याण करो.
(दोनों फोटो इन्टरनेट से ली गयी है, फोटो अपलोड करने वाले को साधुवाद)
थावे वाली माँ की कहानी आप यहाँ पढ़े


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