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Saturday, October 27, 2012

चंचल बाबा के नुस्खे -1

 October 27, 2012     hasya, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, चंचल बाबा के नुस्खे, व्यंग, हास्य     1 comment   

चंचल बाबा शहर में आये थे. उनके आगमन से शहर का वातावरण काफी बाबामय हो गया था. शाम में चंचल बाबा अपना प्रवचन शुरू करने वाले थे. चंचल दरबार में काफी लोग जमा हो चुके थे. नियत समय पर बाबा का प्रवचन शुरू हुआ. बाबा देश में बदती हुई गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा से बहुत परेशान और व्यथित थे. और वे इसे जड़ से ख़त्म कर देना चाहते थे.

चंचल बाबा बोलना शुरू किये - गरीबी, भुखमरी और अशिक्षा के लिए सिर्फ बढती हुई जनसँख्या जिम्मेदार हैं. हमे जनसँख्या पे कंट्रोल करना चाहिए. और जनसँख्या पे कंट्रोल करने का सबसे उत्तम तरीका है ब्रह्मचर्य का पालन. यानी शादी हीं नहीं की जाये. और इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए. है कोई हमारे इस सत्संग में युवा मौजूद जो शादी नहीं करने की प्रतिज्ञा कर सके. 

एक भक्त उठ के बोला - बाबा मेरी तो शादी हो गयी हैं. पिछले महीने हीं हुई हैं. बाबा ने उसे डांट के बैठा दिया.

दूसरा भक्त उठ के बोला - मेरे तो चार चार बच्चे हैं.

तीसरा उठा और शरमाते हुए बोला - बाबा, मेरे तो सात बच्चे हैं.

बाबा गुस्से में अपना सर पिट लिए. तभी इक भक्त उठ कर बोला बाबा, मेरी शादी नही हूई है, मैं प्रतिज्ञा करता हूँ की शादी नहीं करूँगा और जनसँख्या नहीं बढ़ाऊंगा. 

बाबा जी चौथे भक्त की बात सुन के खुश हो गये, बोले - चलो कोई तो है इस चंचल दरबार में जो शादी शुदा नहीं है, अन्यथा मेरी भी शादी हुए तीस साल हो गये हैं.

बाबा उस चौथे आदमी से बोले - अच्छा पुत्र बताओ, तुम शादी तो नहीं करोगे न?

आदमी बोला - बाबा, मैं सिर्फ एक बार शादी करूँगा.....फिर कभी नहीं करूँगा.

बाबा- उत्तम.. अति उत्तम.....पुत्र अब बैठ जाओ. खड़े मत रहो. 

इतना कह कर चंचल बाबा ध्यान मग्न हो गये. और उनका चेला खड़ा होकर बोलने लगा - हाँ तो भक्तो. आप लोग अपने अपने अनुभव बताइए को चंचल बाबा के बताये हुए नुस्खों से प्राप्त हूया है.

एक मोटा सेठ उठ कर बोला - बाबा के चरणों में कोटि कोटि नमन. मैं इस शहर का धन्ना सेठ हूँ. मुझे सोने की बीमारी थी. मैं रात में घोड़े बेंच के सोया करता था. एक दिन मैंने चंचल बाबा का प्रोग्राम टीवी पर देखा , जिसमे बाबा ने बताया की रात में कोई भूत वाली फिल्म देखा करो, डर के मारे नींद नहीं आएगी. मैंने ऐसा हीं किया और सचमुच मुझे डर के मारे नींद नहीं आई. लेकिन मैं इतना डर गया था की डर के मारे कमरे से बहार नहीं निकला और उस दिन भी चोर आये और चोरी कर के चले गये.

चंचल बाबा ने आँख खोली और पूछा - भक्त, क्या तुम फिल्म देखते हुए पॉपकॉर्न का सेवन कर रहे थे??
मोटा सेठ - नहीं बाबा. डर के मारे तो मेरा बुरा हाल था और घर में पॉपकॉर्न कहा से आता.. वो तो सिनेमा हॉल में मिलता है न?

चंचल बाबा- बस यहीं पर कृपा रुकी हुई हैं. अगली बार पॉपकॉर्न खाना कृपा हो जाएगी..
मोटा सेठ बाबा की जय बोलते हुए बैठ गया..


क्रमशः
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Monday, October 22, 2012

ए मुर्गी ए मुर्गी ! - repost

 October 22, 2012     hasya, India, manu shrivastav, reservation, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, कविता, व्यंग, हास्य     No comments   

ए मुर्गी ए मुर्गी !
क्या तेरे पास है अंडा?
जी जजमान! जी जजमान! 
मेरे पास है तीन अंडा
एक अंडा एससी / एसटी के लिए 
दूसरा ओबीसी के लिए
तीसरे से होगा मेरा लाल पैदा
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Tuesday, October 16, 2012

में ए ए ए ए ए ?

 October 16, 2012     hasya, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

मैंने गुस्से में कहा - अलबत्त टाइप की बकलोल हो यार...
वो बोली - हु इज दिस अल्बर्ट? 
हुंह! बिहारी होके अंग्रेजी मेम पटाने का येही सब दुष्परिणाम है 
वो ठठा के हँस पड़ी - हा हा हा हा
हमने कहा - हंसो मत नहीं तो फंसा लूँगा.
बोली - फंसा के दिखाओ..
हमने कहा - उर्रर्र आव आव आव उर्रर्र 
वो तो नहीं फंसी, मगर
बगल के खेत से दुगो बकरी पूछने लगी
में ए ए ए ए ए ? में ए ए ए ए ए ?
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