ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Saturday, October 27, 2012

चंचल बाबा के नुस्खे -1

 October 27, 2012     hasya, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, चंचल बाबा के नुस्खे, व्यंग, हास्य     1 comment   

चंचल बाबा शहर में आये थे. उनके आगमन से शहर का वातावरण काफी बाबामय हो गया था. शाम में चंचल बाबा अपना प्रवचन शुरू करने वाले थे. चंचल दरबार में काफी लोग जमा हो चुके थे. नियत समय पर बाबा का प्रवचन शुरू हुआ. बाबा देश में बदती हुई गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा से बहुत परेशान और व्यथित थे. और वे इसे जड़ से ख़त्म कर देना चाहते थे.

चंचल बाबा बोलना शुरू किये - गरीबी, भुखमरी और अशिक्षा के लिए सिर्फ बढती हुई जनसँख्या जिम्मेदार हैं. हमे जनसँख्या पे कंट्रोल करना चाहिए. और जनसँख्या पे कंट्रोल करने का सबसे उत्तम तरीका है ब्रह्मचर्य का पालन. यानी शादी हीं नहीं की जाये. और इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए. है कोई हमारे इस सत्संग में युवा मौजूद जो शादी नहीं करने की प्रतिज्ञा कर सके. 

एक भक्त उठ के बोला - बाबा मेरी तो शादी हो गयी हैं. पिछले महीने हीं हुई हैं. बाबा ने उसे डांट के बैठा दिया.

दूसरा भक्त उठ के बोला - मेरे तो चार चार बच्चे हैं.

तीसरा उठा और शरमाते हुए बोला - बाबा, मेरे तो सात बच्चे हैं.

बाबा गुस्से में अपना सर पिट लिए. तभी इक भक्त उठ कर बोला बाबा, मेरी शादी नही हूई है, मैं प्रतिज्ञा करता हूँ की शादी नहीं करूँगा और जनसँख्या नहीं बढ़ाऊंगा. 

बाबा जी चौथे भक्त की बात सुन के खुश हो गये, बोले - चलो कोई तो है इस चंचल दरबार में जो शादी शुदा नहीं है, अन्यथा मेरी भी शादी हुए तीस साल हो गये हैं.

बाबा उस चौथे आदमी से बोले - अच्छा पुत्र बताओ, तुम शादी तो नहीं करोगे न?

आदमी बोला - बाबा, मैं सिर्फ एक बार शादी करूँगा.....फिर कभी नहीं करूँगा.

बाबा- उत्तम.. अति उत्तम.....पुत्र अब बैठ जाओ. खड़े मत रहो. 

इतना कह कर चंचल बाबा ध्यान मग्न हो गये. और उनका चेला खड़ा होकर बोलने लगा - हाँ तो भक्तो. आप लोग अपने अपने अनुभव बताइए को चंचल बाबा के बताये हुए नुस्खों से प्राप्त हूया है.

एक मोटा सेठ उठ कर बोला - बाबा के चरणों में कोटि कोटि नमन. मैं इस शहर का धन्ना सेठ हूँ. मुझे सोने की बीमारी थी. मैं रात में घोड़े बेंच के सोया करता था. एक दिन मैंने चंचल बाबा का प्रोग्राम टीवी पर देखा , जिसमे बाबा ने बताया की रात में कोई भूत वाली फिल्म देखा करो, डर के मारे नींद नहीं आएगी. मैंने ऐसा हीं किया और सचमुच मुझे डर के मारे नींद नहीं आई. लेकिन मैं इतना डर गया था की डर के मारे कमरे से बहार नहीं निकला और उस दिन भी चोर आये और चोरी कर के चले गये.

चंचल बाबा ने आँख खोली और पूछा - भक्त, क्या तुम फिल्म देखते हुए पॉपकॉर्न का सेवन कर रहे थे??
मोटा सेठ - नहीं बाबा. डर के मारे तो मेरा बुरा हाल था और घर में पॉपकॉर्न कहा से आता.. वो तो सिनेमा हॉल में मिलता है न?

चंचल बाबा- बस यहीं पर कृपा रुकी हुई हैं. अगली बार पॉपकॉर्न खाना कृपा हो जाएगी..
मोटा सेठ बाबा की जय बोलते हुए बैठ गया..


क्रमशः
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
Newer Post Older Post Home

1 comment:

  1. संध्या शर्माOctober 27, 2012 at 11:10 AM

    वाह... बढ़िया व्यंग... ऐसे ही बाबा का राज चल रहा है और लोग बेवकूफ बन रहे हैं. जय हो चंचल बाबा की. अगली पोस्ट का इंतजार है

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
Add comment
Load more...

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ▼  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ▼  October (3)
      • चंचल बाबा के नुस्खे -1
      • ए मुर्गी ए मुर्गी ! - repost
      • में ए ए ए ए ए ?
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com