#BichchhuGunga की विज्ञापन एजेंसी थी. बिच्छु गुंगा एक काल्पनिक नाम है. सभी उनको गुंगा जी बोलते हैं और गुंगा जी बहुत बोलते हैं.
एक विज्ञापन के सिलसिले में बिच्छु गुंगा, एक सेक्सो-लॉ-जिस्ट के पास गये थे.
एक विज्ञापन के सिलसिले में बिच्छु गुंगा, एक सेक्सो-लॉ-जिस्ट के पास गये थे.
डॉक्टर साब एक मरीज के साथ व्यस्त थे. हाथ के इशारे से उन्होंने बगल वाली कुर्सी पर बैठने का इशारा किया और खुद मरीज को समझाने लगे. कुर्सी पर बैठ कर गुंगा जी, डॉक्टर और मरीज की बात सुनने के लिये मजबूर थे, मजबूरन सुनने लगे.
डॉक्टर साब, मरीज को बता रहे थे, दिक्कत की कोई बात नहीं है, बस आपके शुक्राणु कम बनते हैं. दवाई लीजिये सब ठीक हो जायेगा.
गुंगा जी का ध्यान अनायास हीं उस रिपोर्ट की तरफ चला गया, जिसमे बताया गया था, अगर आप कान में इयर फोन लगा कर तेज म्यूजिक सुनते हैं, तो आपके कान के बैक्टेरिया सात सौ गुणा तेजी से बढ़ते हैं.
गुंगा जी, मरीज की तरफ इशारा कर के डॉक्टर को एक मशविरा देने लगे – आप इनको अपने अंडकोष में इयर फोन लगा कर तेज म्यूजिक सुनने के लिये क्यों नहीं बोल देते हैं. शुक्राणु सात सौ गुणा तेजी से बढ़ने लगेंगे.
गुंगा जी की बात सुन कर मरीज तो तुरंत हीं बेहोश हो बैठा, डॉक्टर साब भी अपने होश गवाँते गवाँते बचे. किसी तरह हिम्मत जूटा कर उन्होंने पूछा – मेरे इयर फोन लगाने के मरीज के शुक्राणु कैसे बढ़ेंगे?
गुंगा जी को अब समझ आया था की उनकी बात सुन कर मरीज बेहोश क्यों हो गया था. उन्होंने अपनी बात सुधार कर दुबारा से कही की, इयर फोन मरीज को हीं लगानी है. डॉक्टर साब को अब असल बात समझ में आ गयी थी. उनकी रुकी हुई सांस फिर से चलने लगी थी. बेहोश हो चुके मरीज को भी होश में लाया गया. डॉक्टर ने कुछ दवाइयाँ लिखी, मरीज चला गया.
उसके जाने के बाद एक दूसरा मरीज आया. उसने सकुचाते शर्माते अपने लिंग की समस्या बतायी.
मरीज की समस्या सुन कर डॉक्टर साब गुंगा जी के तरफ देखने लगे. गुंगा जी आँखों के इशारे में बोल रहे थे, नहीं इसको इयरफोन लगा कर तेज म्यूजिक सुनने को मत बोलियेगा.