अभी दो दिन पहले अखबार में पढ़ा था की मुशर्रफ़ को सजा हो सकती है. क्या सजा होगी? जिस तरफ से मुशर्रफ़ ने अपने शासनकाल में नवाज शरीफ को देश से बाहर जाने का मौका दिया था. नवाज शरीफ, जो अभी प्रधानमंत्री हैं, मुशर्रफ़ को देश से बाहर सुरक्षित निकल जाने में कोई मदद करेंगे? इस तरफ के ढेर सारे सवाल मुहँ बाये खड़े हैं.
सवाल मुहँ बायें खड़े हैं से ध्यान आया की ये सारे सवाल जिनके जबाब मिलने मुश्किल होते हैं, वो मूँह बाये हीं क्यों खड़े रहते हैं?
जब किसी ग्रुप में चार पाँच लोग किसी हॉट टॉपिक पर बात करते हैं, उसी ग्रुप में एक बंदा ऐसा भी होता है, जो इन सारी बातों को बड़े गौर से सुनता रहता है. जिसको लोग टोक देते हैं. अबे क्या मूंह बाये सुन रहा है?
अगर इसी शब्द, मुहं बाये, का पर्यायवाची शब्द लें तो होगा मूँह खोलना. लेकिन दोनों का ही मतलब बदल जाता है. मूँह बाये का मतलब है अवाक् हो जाना और मूंह खोलना का मतलब है कुछ मांगना. भाई ये तो बड़ा हीं कन्फयूजिंग है.
गावों में अक्सर लोगो से सुनने को मिला था, की मैंने ‘फलाने आदमी को फलानी बात बोली’ तो उसने ‘मूँह बा दिया’. अब यहाँ पर मूँह बा दिया का मतलब अवाक् रह गया या उसकी बोलती बंद हो गयी, दोनों ही हो सकता है.
अब सवाल मूँह बाये खड़ा रहता है तो क्या सवाल अवाक हो गया रहता है या भौचक्का हो गया होता या उसकी बोलती बंद हो गयी रहती है, ये सवाल भी मूँह बाये खड़ा ही है.