गब्बू बहुत ही चिंतित मुद्रा में बैठा अपने हाथों में लिए दोनों तस्वीरों को देख रहा था. दोनों तस्वीरें उसी की थी. एक पिछले साल की थी और दूसरी मुश्किल से सात आठ दिन पहले की होगी.
गब्बू अपने पापा के पास जाकर बोला “पापा! आपने इस बार जो जूता ख़रीदा है वो पहले वाले से बहुत छोटा है.”
“लेकिन मैंने तो तुम्हारा जूता छः महीने पहले ख़रीदा था और तुम अब ये बात बता रहे हो?” उसके पापा ने पूछा.
“हाँ! पापा. क्योकिं फोटो मैंने अभी देखा तो अंतर भी अभी समझ में आया” गब्बू ने जबाब दिया.
पापा ने आश्चर्य से बोले “जरा मुझे भी दिखाओ क्या अंतर है?”
गब्बू दोनों तस्वीरें अपने पापा को दिखाने लगा.
“ये देखिये पुरानी तस्वीर, पिछले साल जब आपने मुझे जुते से मारा था, उसका निशान कितना बड़ा आया है फोटो ने और पिछले हफ्ते जो आपने मारा है, उसका निशान कितना छोटा आया है.”
गब्बू अपने पापा के पास जाकर बोला “पापा! आपने इस बार जो जूता ख़रीदा है वो पहले वाले से बहुत छोटा है.”
“लेकिन मैंने तो तुम्हारा जूता छः महीने पहले ख़रीदा था और तुम अब ये बात बता रहे हो?” उसके पापा ने पूछा.
“हाँ! पापा. क्योकिं फोटो मैंने अभी देखा तो अंतर भी अभी समझ में आया” गब्बू ने जबाब दिया.
पापा ने आश्चर्य से बोले “जरा मुझे भी दिखाओ क्या अंतर है?”
गब्बू दोनों तस्वीरें अपने पापा को दिखाने लगा.
“ये देखिये पुरानी तस्वीर, पिछले साल जब आपने मुझे जुते से मारा था, उसका निशान कितना बड़ा आया है फोटो ने और पिछले हफ्ते जो आपने मारा है, उसका निशान कितना छोटा आया है.”