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Monday, January 31, 2011

सूरज चाचू !!!!

 January 31, 2011     good night, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sun, suraj, suraj chachu, sweet dream.     1 comment   


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Friday, January 7, 2011

कृषि मंत्री को चिट्ठी !

 January 07, 2011     chitthi, krishi, krishi mantri ko chitthi, mahangai, mahangayi dayan, manoranjan shrivastav, mantri, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

रफ़्तार



आदरणीय  कृषि  मंत्री  जी ,

मैं  आपके  देश  का  एक  गरीब  किसान  हूँ  . पुरे  साल  कड़ी  मेहनत  कर  के  अनाज , और  सब्जियां  उगाता हूँ . भगवान  और  मानसून  कि  दुआ  से  कमी -बेशी  इतना  तो  अनाज  और  सब्जियां  हो  ही  जाती  है  औसतन  सबका  पेट  भर  सके . फसल  पुरे  होने  के  बाद  मेरी  कोशिश  रहती  है  कि  अनाज  और  सब्जियां  जल्दी  से  जल्दी  बाज़ार  में  पहुचें  और  बाज़ार  वालो  का  भला  हो , माफ़  कीजियेगा  मेरा  मतलब  कि  देश  वालो  का  भला  हो . पर  एक  बात  समझ  नहीं  आती  बाज़ार  में  वे  सब  दिखाई  क्यों  नहीं  देती  हैं . सबसे  बड़ी  बात  कि  जब  मैं  ही  खरीदने  जाता  हूँ   तो  मुझे  दुगने  दाम  चुकाने  पड़ते  है . खैर  ये  बताइए , मैं  तो  अपना  काम  करता  हूँ  . आप  अपना  काम  कब  करोगे ?

सप्रेम 
एक  भारतीय  किसान
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Thursday, January 6, 2011

गम ना करो !

 January 06, 2011     gam, hindi poem, India, karo, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, na     No comments   

गम में डूबे हुए हो!
तो ये बताओ,
क्यों नहीं हुआ तुम्हारा बेहतर?
क्या तुमने सोचा ?
तुमने किया है किसी का बेहतर?

खुद के बेहतर होने की अपेक्षा में,
तुमने कर दी उपेक्षा,
दुसरे की बेहतर करने की.

गम ना करो !
ना सहने की चीज़ है,
ना कहने की चीज़ है,
गम,
बिना गम के कोई जिंदगी नहीं होती.

गिर कर सम्हलने के लिए लगती है,
ठोकर जिंदगी में,
फिर भी जो ना सम्हले,
वो स्वाभिमानी नहीं होता.



क्यों रोते हो हमसफ़र के लिए ?
क्यों फैलाते हो बाँहे किसी के लिए ?
सिने से लगा के बैठोगे ये गम कब तलक ?
एकाध रास्ते अकेले तय कर के भी देख लो !
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