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Thursday, January 6, 2011

गम ना करो !

 January 06, 2011     gam, hindi poem, India, karo, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, na     No comments   

गम में डूबे हुए हो!
तो ये बताओ,
क्यों नहीं हुआ तुम्हारा बेहतर?
क्या तुमने सोचा ?
तुमने किया है किसी का बेहतर?

खुद के बेहतर होने की अपेक्षा में,
तुमने कर दी उपेक्षा,
दुसरे की बेहतर करने की.

गम ना करो !
ना सहने की चीज़ है,
ना कहने की चीज़ है,
गम,
बिना गम के कोई जिंदगी नहीं होती.

गिर कर सम्हलने के लिए लगती है,
ठोकर जिंदगी में,
फिर भी जो ना सम्हले,
वो स्वाभिमानी नहीं होता.



क्यों रोते हो हमसफ़र के लिए ?
क्यों फैलाते हो बाँहे किसी के लिए ?
सिने से लगा के बैठोगे ये गम कब तलक ?
एकाध रास्ते अकेले तय कर के भी देख लो !
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