लोग झुण्ड में चिल्लाते जा रहे थे - होली है ! होली है !
भईया जी छत की मुंडेर से झांकते हुए बोले - हाँ है ! हाँ हैं !
झुण्ड में से किसी ने रंग का गुब्बारा मारा - बुरा न मनो, बुरा न मानो,
भईया जी की वाइफ खिड़की का परदा सरकते हुए बोली - अईसे कईसे मान लेंगे ! अईसे कईसे मान लेंगे !
भीड़ में से आवाज आई 'फिर कईसे मानेंगें जी'
ReplyDeleteबुरा न मानो होली है.
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ,मनु जी.
आप भी बहुत छिप छिप कर चमक दिखा ही देते हैं.
मेरे ब्लॉग पर आईएगा.
dhanyabad rakesh bhaiya.
Deleteaap ko Holi ki badhai
funny.....
ReplyDeleteusko bhi ek baalti de maarni hai..tab maja kuch aur hi hota ...
ReplyDeletebahut badiya