ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Tuesday, May 29, 2012

प्रगतिशील सरकार की पहचान !

 May 29, 2012     congress, government, manu shrivastav, sarkar, turkash, turkash.blogspot.in, UPA     4 comments   

यूपीए सरकार के तीन साल पुरे हो गए , इससे बड़ी ख़ुशी और आश्चर्य की बात क्या होगी ? सब चिल्ला रहे हैं की पेट्रोल के दाम बढ़ गए . अरे ! ये भी तो देखो, पहले एल लीटर पेट्रोल से कारें सात किलो मीटर चलती थीं अब तो पच्चीस पच्चीस किलो मीटर चलने लगीं हैं. बाइक वाले पहले एक किलो मीटर में तीस पैंतीस किलो मीटर जाते थे, अब तो साठ सत्तर किलोमीटर तक हांक लेते हैं. अजी औसत निकल के देख लो, उस हिसाब से महंगाई बढ़ी कहा हैं?

मानो ना मानो ये सरकार सभी को सामान नजर से देखती है. क्या इन्सान? क्या मशीन? सभी को. पानी की इतनी किल्लत है. इंसानों को ठीक से पानी मय्यसर नहीं हो रहा है और आप अपने गाड़ियों को भर पेट पेट्रोल पिलाइयेगा . ये सरकार की "मशिनियत" हीं तो है की पेट्रोल महंगा कर दिया. ज्यादा पेट्रोल पीके इन गाड़ियों का मन न बढ़ जाये. दूसरी बात महँगी होने के कारण आप गाडी में उतना ही पेट्रोल न डालेंगे, जितना अपने पेट में राशन पानी जाता है. यानि इन्सान और मशीन सब बराबर है सरकार के नज़रों में . और आप हम हैं की समझते हीं नहीं बात को, पहुँच जाते हैं जंतर मंतर.

गैस महँगी हो गयी है. अजी तो गलत क्या है? सस्ती गैस घर में रख के क्या कीजियेगा. राशन है घर में पकाने के लिए? जो गैस गैस चिल्ला रहे हैं . सबके कहने से क्या होता है की जनता की बुरा हाल है. कहने से क्या होता है? फैक्ट देखिये .

गरमी इतनी भयंकर पड़ रही है. आदमी का जीना मुहल हो रहा है. अब ये मत कह दीजियेगा की भयंकर गर्मी पड़ने के पिच्छे यु पी ए का हाथ है. गर्मी इतनी है की बिजली के भी पसीने छुट रहे हैं. वो भी परेशां होके कट जाती है. बिजली रहेगी तो आप कूलर, ए सी , पंखा चलाइयेगा. बिजली की खपत बढ़ेगी ग्लोबल वार्मिंग होगा. आपको-हमको तो अपनी अपनी पढ़ी है. सरकार को तो साडी दुनिया जहान का सोंचना है. हमारी तरह 'सेल्फिश ' थोड़े न है वो.
पेट्रोल के मुकाबले डीजल सस्ता है की नहीं है? अब आप लक्जरी गाडी नहीं खरीद सकते तो गलती किसकी है ? आपकी या सरकार की?

अरे ! सुनिए ! जा कहाँ रहे हैं? लक्जरी गाडी बाद में खरीदिएगा. पहले दो जून की रोटी खरीदने की कोशिश करिए. गाडी खरीदना तो बहुत आसन है. कोई भी बैंक लोन दे देगा. रोटी केलिए लोन मिलते सुना है? नहीं ना?

बच्चों को गप्पे मरते देख बहुत डांट लगाया करते थे, खाली बात करके ही पेट भरोगे क्या? अगर ऐसा है तो करिए न जी भर के बात फ़ोन पे. सरकार ने फ़ोन कॉल रेट कितना सस्ता कर दिया है. सरकार पे ये बेबुनियाद इलज़ाम लगाना कहीं से बाजिब नहीं है की सरकार हर चीज़ को महंगा कर रही है .
पहले कम आनाज सड़ता था, सरकार ने प्रगति की अब ज्यादा सड़ रहा है. पहले छोटे घोटाले होते थे, सरकार की प्रगति देखिये बड़े बड़े हो रहे हैं. घोटाले बाजों पे बरसों बरस मुकदमे चलते थे, सजा नहीं हो पति थी. अब तो एक लाख के घुस पे ही चार साल की सजा करवा दी. ये क्या कम प्रगतिशील बात है ? बोलिए?

पहले सरकार के फैसले मैडम की इच्छा से होते थे, अब दीदी की इच्छा से हॉटे हैं. पहले एक डॉलर में पैतालीस रूपया आता था, अब पचपन आ रहा है. पहले फाँसी के लिए एक आतंकवादी कैद था, अब दो दो कैद हैं.
ये सब क्या है ? प्रगति ही तो है. और कितनी प्रगति चाहिए जी आपको?



Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, May 25, 2012

Suraj ki aag ugalati gami ka sadupayog

 May 25, 2012     No comments   

Garmi apne charam pe hain aur Din chadate hi suraj aag ugalane lagata hai. Haal ye hai ki duphar me agar kisi kaam se bahar jana ho to apna pura tan dhak ke nikalana hota hai. Aur itni garmi me bijali bhi bahut katati hai. Garmi aur pasine se haal behaal hua rahata hai. Suraj ki aag ugalati garmi pe ankush nahi lagaya jaa sakta aur nahi bijali ko katane se roka jaa sakta hai. Lekin agar, solar urja ka upyog kiya jaaye to surag ki aag ugalai garmi se hum bijali jarur bana sakte hain aur garami aur pasine se thodi nizat jarur paa sakte hain .
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, May 14, 2012

भ्रष्टाचार का दानव !

 May 14, 2012     bhrastachar ka danav, leon, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, भ्रष्टाचार का दानव     1 comment   

मंदिर की सीढियों पे बैठे कुछ लोग बतिया रहे थे भ्रष्टाचार तो दानव का रूप लेते जा रहा है . मंदिर के अहाते में गमछा बिछा पंडी जी सबकी बाते सुन रहे थे. दानव का नाम सुनते हिन् उनके शिखा में स्पार्किंग हुई और वो सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गयी .पंडी जी के मन में पहला ख्याल आया - इस दानव का कुछ करना होगा, इससे निपटाना होगा .

दानव से कोई मानव निपट नहीं सकता, इसके लिए भगवन की हिन् शरण में जाना होगा.

अगले ही दिन पंडी जी ने मंदिर के श्याम पट्ट, जिसपे वे सूर्योदय कब होगा, सूर्यास्त कब होगा, एकादशी कब है, लिख के जनता को बताया करते थे, पे लिख के ऐलान किया की वे भ्रष्टाचार के दानव से निपटने के लिए हवन करने वाले हैं.

पंडित जी की सूचना जंगल के आग की तारा चारो तरफ फ़ैल गयी. लोग भ्रष्टाचार से निपटने के लिए चंदा भेजने लगे. लोगों में काफी जोश, उत्साह और एकता देखने को मिल रही थी. जो या तो इंडिया - पाकिस्तान क्रिकेट मैच के वक़्त दिखती है या लड़ाई के.

शाम तक मंदिर के दोनों दान पेटियों का पेट गले तक इस तरह से भर गया की अब वे डकार तक नहीं ले सकतीं थीं . पंडी जी मन ही मन खुश हुए अब तो इस दानव की खैर नहीं. अगले दिन तड़के ही पूजा पाठ शुरू करने केलिए, वे जल्दी ही विश्राम करने चले गए.

अगले दिन सुबह सो के उठने पे देखा , दान की एक ''पेटी" गायब है. पंडी जी ने अपना सर पिट लिया, परिणाम स्वरुप बाल रहित सर लाल हो गया.

   खैर जाने वालों का अफ़सोस नहीं किया जाता है, जितना होता है उसी में काम चलाया जाता है, हवन सामग्री लेन के लिए एक दल नियुक्त हुआ. और इस प्रकार हवन प्रारंभ हुआ. हवन में बहुत से लोगो ने बाद चढ़ के हिस्सा लिया. हवन सफलता पूरक संपन्न हुआ. 

   हवन के बाद, उसमे ख़रीदे गए सामान और उसमे खर्च किये गए पैसे की फेरहिस्त बनायीं जाने लगी. नौ का सामान नब्बे में आया देख के पंडी जी ऐसे खफा हुए जैसे ममता दीदी मनमोहन जी की सरकार से होतीं हैं. 

 पंडी जी सोंच रहे थे - "क्या इस भ्रष्टाचार के दानव से मानव लड़ सकता है?
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, May 12, 2012

निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं ???

 May 12, 2012     manu shrivastav, nirmal baba., turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


फेसबुक पर मैंने के पेज बनाया था "निर्मल बाबा इज फ्रोड". 

मुझे आज फेसबुक की तरफ से एक तरफ से मैसेज मिला , किसी थर्ड पार्टी के आग्रह/ कम्प्लेंट से आपका यह पेज डिलीट किया जा रहा है और आपको इस तरह की एक्टिविटी के लिए इनकरेज किया जा रहा है, दुबारा ऐसा ना करें अन्यथा आपका अकाउंट डिलीट कर दिया जायेगा .


डियर फेसबुक जी और थर्ड पार्टी जी,
बेशक कीजिये !!! किसी का अकाउंट डिलीट कर देने से निर्मल बाबा "दूध के धुलें" नहीं हों जायेंगे !
"निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं, लोगो को बेवकूफ बना रहे हैं "


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, May 7, 2012

राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए

 May 07, 2012     manu shrivastav, rashtrapati ka chunaw, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


मेरा एक मित्र है, जिसने पिछले साल बिहार में लाइब्रेरियन की नौकरी प्राप्त की थी. स्कुल के लाइब्रेरी में किताबें तो थीं नहीं, तो वो खाली क्लास में जाके पढ़ा दिया करता था. कभी हिंदी , कभी संस्कृत, कभी गणित . वैसे उसने भौतिकी से मास्टर डिग्री कर रखी थी. एक शिक्षक जिन्होंने गणित से डिग्री हासिल की थी वो हिंदी पढ़ाते थे. वे कभी कभी इंग्लिश भी पढ़ा दिया करते थे. इसी तरह जो शिक्षक जिस विषय में निपुण थे उसे छोड़ के बाकि के विषय पढ़ाया करते थे.

सवाल ये नहीं है की आपकी पृष्ठभूमि क्या है? सवाल ये है की आपसे किस तरह से, किस तरह का काम लिया जा रहा है . और आप उसे कर पाते हैं की नहीं. उस जरुरत के अनुसार अपने सहज ज्ञान से अपने को अपडेट करते हैं की नहीं.

देश की जनता के पास गैर राजनितिक व्यक्ति के निर्णय पे भरोसा नहीं करने का रास्ता कहाँ बचता है. प्रस्ताव संसद पास करती है. राष्ट्रपति किसी प्रस्ताव को दो बात लौटा बार है. तीसरी बार वो प्रस्ताव स्वतः पास हो जाएगी . इसलिए राष्ट्रपति के राजनितिक पृष्ठभूमि के होने और नहीं होने से जनता को कहाँ फायदा पहुँच रहा है? जनता के हित ke बारे में सोचने ke liye राष्ट्रपति को राजनितिक पृष्ठभूमि का होना ही नहीं चाहिए. राजनितिक पृष्ठभूमि के होने का मतलब है की वो व्यक्ति किसी “खास दल ” के विचारों से सहमत होगा. उसे अन्य दल के द्वारा लाये गए प्रस्ताव पसंद नहीं आयेंगे और वो उसपे अपनी निष्पक्ष राय देने में असमर्थ होगा. अतः राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए

भारतीय राष्ट्रपति को जितने सिमित कार्य सिमित हैं उसके लिए उन्हें बहुत ज्यादा राजनितिक ज्ञान की जरुरत नहीं है. स्कुल और कोलेजों के नागरिक शास्त्र में जितना पढाया जाता है, उतना भी काफी है राष्ट्रपति के अधिकार और कर्त्तव्य के बारे में जानने के लिए , बाकि फैसले तो वो अपने सहज ज्ञान से ही लेते हैं .

मैं मानता हूँ की उतनी जानकारी मुझे भी है.

राष्ट्रपति के राजनितिक होने की बात करना, दलों द्वारा नामांकित किये गए अपने उम्मीदवारों के नाम को उचित बताने का बस एक बहाना मात्र हो सकता है.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, May 6, 2012

मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

 May 06, 2012     manu shrivastav, master ji fansi ka fanda ek bilaan chhoti kar do, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     No comments   

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, May 5, 2012

धत तेरी की

 May 05, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

क्या होगा जब
हेल्लो
के बदले
धत तेरी की  
कहा जाये  
;)
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, May 3, 2012

गयी भैंस पानी में

 May 03, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

टीचर -  गयी भैंस पानी में और डूबी नहीं. इस वाक्य से एक और वाक्य बनाओ. 
स्टुडेंट्स - अच्छा हुआ नहीं डूबी , डूब जाती तो लोग कहते की बैल के बच्चे की माँ बनाने वाली थी तो आत्म  
 हत्या कर ली. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Newer Posts Older Posts Home

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ▼  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ▼  May (8)
      • प्रगतिशील सरकार की पहचान !
      • Suraj ki aag ugalati gami ka sadupayog
      • भ्रष्टाचार का दानव !
      • निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं ???
      • राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए
      • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो
      • धत तेरी की
      • गयी भैंस पानी में
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com