ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Friday, August 3, 2012

कुत्तों का लिंगानुपात - (A)

 August 03, 2012     hasya, kutton ka linganupat, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     4 comments   

बरसात का मौसम इंसानों के लिए हीं नहीं जानवरों के लिए भी मस्ती लेकर आता है.

मुझे याद है, जब में छोटा था, बरसात के मौसम में जब कुत्तों का झुण्ड देख के उन्हें भगाने लिए लिए पत्थर उठाया था तो एक बुजुर्ग ने डांट लगाई - क्या कर रहे हो? बरसात का मौसम है, सारे कुत्ते बौराए रहते हैं, काट लेंगे. 
खैर, तब तो समझ नहीं आया था की क्यों बौराए रहते हैं. बाद में समझ आया की यहो वो वक़्त होता है जब उनकी कामेक्षा चरम पे होती हैं. या यूँ कहें की सिर्फ बरसात में हीं वो सहवास के लिए तैयार होते हैं. यही कारण है की उनकी जनसँख्या इतनी कंट्रोल में हैं. इंसान तो आधे सेकेण्ड में ही "गेट रेडी फ़ॉर एक्शन" हो जाता है, और तडातड तडातड जनसँख्या बढाता है. 

बरसात का मौसम साल में एक बार आता है, और टेंशन की बात तो ये होती है की अगर ये चला गया तो फिर अगले साल की बरसात तक का इंतजार करना होगा. इसलिए लिए सारे कुत्ते इस फिराक में रहते हैं की उनको लाखों का सावन बेकार ना चला जाये. 

एक 'फिमेल' के पीछे दसियों लगे रहते हैं. कम्पीटीशन बहुत टफ्फ होता है. सारे कुत्तों को पता होता है की कोई एक ही "टॉप" करेगा और काम सुख का आनंद प्राप्त करेगा. तो टॉप करने के लिए सारे के सारे आपस में भौं भौं मचाये रहते हैं. 

खैर उनकी कोई गलती नहीं है. "विषय रस" को सबसे निम्न रस माना गया है, लेकिन आनंद तो इसी में आता है सभी को. 

कुत्तों को भी पता है, उनका लिंगानुपात एक के मुकाबले दस का है. जो उनके साथ बहुत नाइंसाफी हैं, समूचे जीव जगत में सिर्फ उनकी के साथ ऐसा लिंगानुपात क्यों हुआ, जाँच का प्रश्न हो सकता है.

पर उनके लिए एक संतोष की बात है. इन्सान जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या कर रहा है, कुछ ही वक़्त में इंसानों का लिंगानुपात भी एक के मुकाबाले ग्यारह होने वाला है.

फिर ये बात कुत्तों को राहत पहुंचा सकती है, की ऐसे विषम लिंगानुपात का दंश सिर्फ वे हीं नहीं झेल रहे हैं.
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
Newer Post Older Post Home

4 comments:

  1. Arvind MishraAugust 3, 2012 at 7:58 PM

    तथ्य सभी गलत हैं भाव का राम जानें -नर मादा लिंगानुपात कुदरत में प्रयः सभी जीवों का बराबर है .
    दूसरे कुत्तों का पीक प्रणय काल कार्तिक माह है .....

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. मनु श्रीवास्तवAugust 3, 2012 at 10:09 PM

    तथ्य गलत हो सकता है, इससे इंकार नहीं कर सकता हूँ.
    लेकिन अभी सावन ख़त्म हुए दो दिन हीं हुयें हैं. और दो दिन ही हुए हैं भादो शुरू हुए.
    पिछले कई दिनों में कुत्तों की प्रणय लीला सडको को पर खुलेआम देखने को मिली हैं.
    दिल्ली प्रवास के दौरान ये प्रणय लीला मैंने दिसम्बर के अंत और जनवरी के शुरुवात में भी देखी है.
    जो संभवतः पूस मास होती है.
    अगर कुत्तों के नर मादा लिंगानुपात बराबर है तो ये उनके लिए खुसी की बात है, और गलत तथ्य देने के लिए कुत्तों से क्षमा प्रार्थना है.
    लेकिन एक मादा के पीछे दसियों नर कुत्तों को देख के विषम लिंगानुपात का भ्रम जरुर होता है.
    भाव के लिए कुछ नहीं कहना. वो पाठक पे निर्भर करता है , क्या भाव निकल ले?

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  3. Arvind MishraAugust 4, 2012 at 5:40 AM

    अब ये कुत्ते भी आदमी हो चले हैं:-)

    ReplyDelete
    Replies
    1. मनु श्रीवास्तवAugust 5, 2012 at 12:26 AM

      ye bilkul sahi kaha aapne. :)

      Delete
      Replies
        Reply
    2. Reply
Add comment
Load more...

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ▼  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ▼  August (7)
      • मनमोहन सिंह जी की व्यथा - व्यंग
      • राजनैतिक मैदान में टीम अन्ना !
      • पीएम इन वेटिंग
      • मेरे पास मोबाइल है
      • कुत्तों का लिंगानुपात - (A)
      • दुनिया गोल है.
      • मोहब्बत जरुर हो जाये
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com