एक चुटकुला है.
एक बस में एक आदमी अपने परिवार के साथ सफ़र कर रहा था. एक वीबी, एक किशोर उम्र का लड़का, छोटा भाई, साले साब, यानि संयुक्त परिवार.
आदमी की किसी बात पे कंडक्टर से लड़ाई हो गयी और कंडक्टर ने आदमी जी को एक लाफा लगा दिया. सारे फॅमिली वाले के सामने लाफा खा के आदमी जी को बहुत गुस्सा आया. जोश में आके चिल्लाये - "अबकी मारा तो मारा, आगे मारा तो तुझे बताऊंगा . कंडक्टर में एक बार फिर खीच दिया कान के दरमियान.
अब क्या था? आदमी बोला - मुझे फिर मार दिया? मेरे साले साब को मार के दिखा ! कंडक्टर ने उनके साले साब को भी नाप दिया. (यहाँ पे मुझे ये समझ नहीं आया की कन्दक्टार में कैसे पहचाना की येही साले साब हैं, और सही निशाना लगाया). आदमी ने कहा - मेरे साले को मारा? अच्छा चल मेरे भाई को मार के दिखा. कंडक्टर ने उनके भाई को भी एक लगा दिया. आदमी को और गुस्सा आया, बोला मेरे भाई को भी मार दिया, अच्छा मेरी पत्नी को भी मार के दिखा तो बताता हूँ तुझे. कंडक्टर ने उनकी पत्नी को भी मार दिया (भले ही चुटकुले में ही सही कंडक्टर ने उसकी पत्नी को मारा हो, लेकिन ये काम गलत किया था उसने).
आदमी बोला - अरे तुने तो मेरी पत्नी को भी थप्पड़ मार दिया, तू मेरे बेटे को हाथ लगा के दिखा तो तुझे बताता हूँ, कंडक्टर ने उसके बेटे को भी थप्पड़ लगा दिया, और पूछा - हां बोल क्या बताएगा?
आदमी बोला- कुछ नहीं भाई, बस रोक के हमे यहीं उतार दो. कंडक्टर में बस रुकवाई और पुरे संयुक्त परिवार को उतार दिया.
निचे उतरने के बाद उसकी पत्नी ने पूछा - ए जी ! एक बात बताओ, तुम तो कुटाये हीं कुटाये , हम सब को काहे कुटवा दिया? आदमी बोला - वो इसलिए की अब घर जा कर कोई किसी को नहीं बताएगा की कंडक्टर में थप्पड़ चलाया था.
खैर, ये तो चुटकुला था और पुराना भी. हंसी तो नहीं हीं आई होगी. अब थोड़ी पॉइंट की बात कर लेते हैं.
पिछले साल अन्ना जी का अनशन हुआ, तो अनशन के पहले अन्ना जी बोले - जब तक सरकार मांगे मान नहीं लेती हैं. तब तक अनशन चलेगा, अनशन के बाद बोले - सरकार नहीं मानेगी तो मैं फिर अनशन करूँगा.
अन्ना जी का अनशन इस बार उतना धारदार नहीं था, जितना पहली बार में था. पहले तो टीम के लोग अनशन पे बैठे. अन्ना जी बोले - मैं चार दिन देखूंगा, सरकार नहीं मानी तो मैं खुद अनशन पर बैठूँगा. सरकार नहीं मानी.
अन्ना जी ने अनशन शुरू कर दिया, सरकार फिर भी नहीं मानी.
अब अन्ना जी बोले हैं की हम राजनितिक पार्टी बनायेंगे, सरकार अब भी नहीं मानी है.
दिल और सरकार में एक समानता है, दोनों मानते नहीं.
मेरा मानना है की टीम अन्ना का राजनीती के मैदान में जाने का फैसला अचानक लिया हुआ फैसला नहीं है. गाँव में कहावत है की हमने रास्ता दिखा दिया अब खुदे चलो इस पे . राजनितिक पार्टियों ने ये रास्ता खुद ही अन्ना को दिखाया है, अब अन्ना टीम किस अंदाज़ से इस पे चलती है ये महत्वपूर्ण है. पर उनको ये कहने से परहेज करना चाहिए, ये कर दिया न, अब ये कर के दिखाओ तो देखता हूँ
दिल और सरकार में एक समानता है, दोनों मानते नहीं.
ReplyDeletejabardast!