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Wednesday, November 21, 2012

चंचल बाबा के नुस्खे - आखरी भाग।

 November 21, 2012     chanchal baba ke nuskhe, hasya, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, व्यंग, हास्य     1 comment   


चंचल बाबा के नुस्खे -1 में आपने चंचल बाबा के नुस्खे पढ़े। यहाँ कुछ और नुस्खे हैं, जिनको लोगो ने प्रयोग किया था। 

सेठ जी के बैठते हिं चंचल बाबा के चेले ने हांक लगे। - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।

बाबा ने उसे शांत कराया और और बोले - अब कोई दूसरा भक्त अपनी कथा सुनाये।

एक दूसरा भक्त अपनी धोती में लगी मिटटी झाड़ते हुए उठा और बोलना शुरू किया - चंचल बाबा को कोटि कोटि प्रणाम। बाबा जब भी मैं बाजार जाता तो सौ रुपया लेकर जाता था और पुरे सौ रुपये का पेट्रोल मोटर सायकल में भरवा लेता था। मैं रोज़ इतनी महँगी पेट्रोल भरा भरा के थक गया था। फिर मैं परेशां होकर चंचल बाबा के शरण में आया। बाबा ने बताया जिस तरह दूध में पानी मिला कर उसे दुगुना कर देते हैं। वैसे हि पेट्रोल के साथ भी करो, तुम्हारा खर्चा आधा हो जायेगा। मैंने ऐसा हीं किया और देखिये मेरा खर्चा आधा होने के बजाय पूरा हीं कम हों गया है। कारण पानी मिलाये पेट्रोल से मोटर सायकल तो चलती हीं नहीं। सारे दिन घर में पड़ी रहती है। और अब मेरे पुरे सौ रुपये बचने लगे हैं। चंचल बाबा आप महान हो। बाबा की जय।

आदमी अपनी बात पूरी कर के बैठ गया। उसके बैठते हीं बाबा का चेला चिल्लाया - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।

बाबा ध्यान लगाये बैठे थे। उसी मुद्रा में बोले - नेक्स्ट।

अब वो भक्त उठ खड़ा हुआ जिसने पहले बताया था की, उसकी शादी नहीं हुई है।
बोला - चंचल बाबा आप महान हैं। मैं अपने प्रेमिका से पीछा छुड़ाना चाहता था। और इसी का उपाय जानने के लिए जब मैं आपकी शरण में आया तो आपने बताया की अपनी प्रेमिका को रोज एक प्रेम पत्र लिखा करो। पहले तो मैं चकरा गया की जिस प्रेमिका से मैं पीछा छुड़ाना चाहता हूँ, बाबा उसे रोज प्रेम पत्र लिखने के लिए क्यों बता रहे हैं। लेकिन फिर भी मैं उसे रोज एक प्रेम पत्र लिखना शुरू किया। और एक महीने में हीं मुझे मेरी प्रेमिका से मुक्ति मिल गयी। उसकी शादी उसी डाकिये से हो गयी थी, जो उसे मेरा पत्र रोज़ ले जाकर दिया करता था। बाबा आप महान हो, आपकी महिमा अपरम्पार है।

तभी एक आदमी उठ कर चिल्लाने लगा। चंचल बाबा, फ्रोड हैं, चंचल बाबा मुर्दा बाद।

किसी को कुछ समझ नहीं आया की माजरा क्या है, वहां बैठी पब्लिक उठी और उस आदमी की कुटाई करने लगी। भरपूर कुटाई होने के बाद उस आदमी से पूछा गया की तुह कौन हो? और बाबा जी को मुर्दाबाद क्यों बोल रहे हो?

आदमी बोला - चंचल बाबा के कारण हीं मेरा जीना नरक हो गया है। मैं वही डाकिया हूँ, जो रोज चिट्ठी लेकर जाया करता था
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Wednesday, November 14, 2012

सन ऑफ़ सरदार.

 November 14, 2012     hasya, jokes, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, son of sardar, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, व्यंग, हास्य     No comments   


दिवाली पर एक फिल्म रिलीज हुई है.
सन ऑफ़ सरदार.
सोंच रहा हूँ देखने के लिए.
मेरे ऑफिस में एक सरदार जी हैं.
उन्होंने वादा किया है की 
कल वो ऑफिस में 
अपने बेटे को लेकर जरुर आयेंगे 

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Saturday, November 10, 2012

देंगे दुआएं, उसे मुफ्त की

 November 10, 2012     manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, व्यंग, हास्य     4 comments   

भूख लग गयी हैं
अतंडिया कुलकुला रहीं हैं,
पास वाली चिकन 
मोमोज की दुकान 
हमको बुला रहीं हैं.
मारा है महंगाई ने,
जेबों पे ऐसे डाका
हम गरीब तीन शाम से, 
हर शाम को,  
बिन पिज्जा कर रहे हैं फांका.
चाहिए एक पथ प्रदर्शक
जो खुदा से हमे मिला दे,
देंगे दुआएं,  उसे मुफ्त की अपनी,
जो हमे मोमोज खिला दे,
बियर पीले दे 

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Wednesday, November 7, 2012

जन्म दिवस की बधाई !

 November 07, 2012     manu shrivastav, tarkash, tarkash.blogspot.in, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


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