सेठ जी के बैठते हिं चंचल बाबा के चेले ने हांक लगे। - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।
बाबा ने उसे शांत कराया और और बोले - अब कोई दूसरा भक्त अपनी कथा सुनाये।
एक दूसरा भक्त अपनी धोती में लगी मिटटी झाड़ते हुए उठा और बोलना शुरू किया - चंचल बाबा को कोटि कोटि प्रणाम। बाबा जब भी मैं बाजार जाता तो सौ रुपया लेकर जाता था और पुरे सौ रुपये का पेट्रोल मोटर सायकल में भरवा लेता था। मैं रोज़ इतनी महँगी पेट्रोल भरा भरा के थक गया था। फिर मैं परेशां होकर चंचल बाबा के शरण में आया। बाबा ने बताया जिस तरह दूध में पानी मिला कर उसे दुगुना कर देते हैं। वैसे हि पेट्रोल के साथ भी करो, तुम्हारा खर्चा आधा हो जायेगा। मैंने ऐसा हीं किया और देखिये मेरा खर्चा आधा होने के बजाय पूरा हीं कम हों गया है। कारण पानी मिलाये पेट्रोल से मोटर सायकल तो चलती हीं नहीं। सारे दिन घर में पड़ी रहती है। और अब मेरे पुरे सौ रुपये बचने लगे हैं। चंचल बाबा आप महान हो। बाबा की जय।
आदमी अपनी बात पूरी कर के बैठ गया। उसके बैठते हीं बाबा का चेला चिल्लाया - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।
बाबा ध्यान लगाये बैठे थे। उसी मुद्रा में बोले - नेक्स्ट।
अब वो भक्त उठ खड़ा हुआ जिसने पहले बताया था की, उसकी शादी नहीं हुई है।
बोला - चंचल बाबा आप महान हैं। मैं अपने प्रेमिका से पीछा छुड़ाना चाहता था। और इसी का उपाय जानने के लिए जब मैं आपकी शरण में आया तो आपने बताया की अपनी प्रेमिका को रोज एक प्रेम पत्र लिखा करो। पहले तो मैं चकरा गया की जिस प्रेमिका से मैं पीछा छुड़ाना चाहता हूँ, बाबा उसे रोज प्रेम पत्र लिखने के लिए क्यों बता रहे हैं। लेकिन फिर भी मैं उसे रोज एक प्रेम पत्र लिखना शुरू किया। और एक महीने में हीं मुझे मेरी प्रेमिका से मुक्ति मिल गयी। उसकी शादी उसी डाकिये से हो गयी थी, जो उसे मेरा पत्र रोज़ ले जाकर दिया करता था। बाबा आप महान हो, आपकी महिमा अपरम्पार है।
तभी एक आदमी उठ कर चिल्लाने लगा। चंचल बाबा, फ्रोड हैं, चंचल बाबा मुर्दा बाद।
किसी को कुछ समझ नहीं आया की माजरा क्या है, वहां बैठी पब्लिक उठी और उस आदमी की कुटाई करने लगी। भरपूर कुटाई होने के बाद उस आदमी से पूछा गया की तुह कौन हो? और बाबा जी को मुर्दाबाद क्यों बोल रहे हो?
आदमी बोला - चंचल बाबा के कारण हीं मेरा जीना नरक हो गया है। मैं वही डाकिया हूँ, जो रोज चिट्ठी लेकर जाया करता था