दो अलग अलग कार्य को जब एक साथ किया जाए तो उनमे एक सम्बन्ध सा बन जाता है. यानी जब पहला कार्य किया जाए तो अपने आप हीं दुसरे कार्य का ध्यान आ जाता है या आदतन वो अपने आप हो जाता है.
फॉर एक्जाम्पल, गाड़ी चलाते समय सामने कोई आ जाता है तो हाथ के हॉर्न दबाने के साथ साथ, पैर ब्रेक को भी दबाने लगता है या स्टेशन पर कोई भिखारी कुछ मांगने आ जाये तो आदमी मुहँ फेरना और जाओ, आगे जाओ बोलना एक साथ करता है या फिर बिजली के जाते हीं आदमी पड़ोस में झाँकता अबे केवल अपनी ही तो नहीं कटी ना?
बारहवीं में मनोविज्ञान में इसके बारे में पढ़ाया गया था, इसको सम्बन्ध प्रत्यावर्तन बोलते हैं.
सुबह में मेरा न्यूज पेपर हाथ में लेने और संडास जाने का सम्बन्ध प्रत्यावर्तन हैं. वैसे एक बात क्लियर कर दूं की न्यूज पेपर और टॉयलेट पेपर का कोई सम्बन्ध प्रत्यावर्तन नहीं है, अपने यहाँ पानी का इस्तेमाल आज भी होता है.
खैर! संडास में सेटल होने के बाद, जब न्यूज पेपर की तरह नजर घुमाई तो, मालूम पड़ा हड़बड़ी में दो दिन पहले वाला पेपर उठा लाया हूँ. फिर पहला ख्याल ये आया - अब तो पेपर भी नहीं बदल सकते, इसी से काम चलाना पड़ेगा.
फ्रंट पेज पर एक बुजुर्ग नेता की शादी की खबर थी. इसी खबर पर नजर पड़ने से पता ही लगा था की मैं दो दिन पहले का पेपर उठा लाया हूँ. वरना पेपर पर छपे तारीख और दिन को रेयर केस में रेयर लोग देखते हैं. इस खबर ने एक तथ्य की तरफ ध्यान आकर्षित कराया.
मोटामोटी ये कहा जा सकता है की अपने देश के नेताओं में अधिकांश लोग या तो कुवाँरे हैं या एक से अधिक बार शादीशुदा.
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