ये भी ठीक ही है

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Sunday, April 17, 2016

अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा

 April 17, 2016     No comments   


samosachutneyपिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों के खरीददार नहीं होने की वजह से कई लोगो ने अपना दुकान-दऊरी बंद करने का फैसला लिया. समोसों की दुकान बंद होने के कारण कई पुलिस वाले भी सदमे में हैं. 

उपरोक्त बात सुन कर कई लोग हैरान हो सकते हैं मगर सड़क किनारे समोसों का ठेला कई पुलिस वालों के उपरी आमदनी कई गंगोत्रियों में एक है, जब जब गंगोत्री सूखने लगे तो चिंता होनी स्वाभाविक है. भले हि असली गंगोत्री, जिससे गंगा निकलती है के सूखने से या गंगा के प्रवाह के कम पड़ने से उनको फरक नहीं पड़ता हो, मगर मगर समोसा के ठेला से होने वाली आमदनी की गंगोत्री सूखने पर रात की नींद और दिन की ड्यूटी पर की नींद दोनों गायब हो चुकी थी.
उधर समोसा महासंघ के उपाध्यक्ष ने कहा है समोसा एक घरेलु उद्योग है, और ये स्टैंड अप इंडिया को भी समर्थन करता है. क्योकिं समोसा बनाने वाले से लेकर बेचने वाले से लेकर खाने वाले तक सब खड़े खड़े होता है. इस लिए हम समोसों के ठेला को बंद नहीं होने देंगे. और इसके लिए हम आन्दोलन करेंगे.
समोसा उद्योग को अगर किसी से खतरा है तो वो है पिज्जा. लोग पिज्जा खाने को स्टेटस सिंबल समझने लगे हैं. मगर पिज्जा खा खा कर मोटे होते जा रहे हैं. मगर समोसा खाकर किसी को मोटे होते देखा है किसी ने? पिज्जा विदेशी चीज है, भले हि उसका उत्पादन देश में होता है तो क्या हुआ? भले हि उसमे प्रयोग होने वाले प्याज, मिर्च, नमक, घी, डालडा, मैदा देश में पैदा होता है तो क्या हुआ, मगर पिज्जा है तो विदेशी चीज.
हम पिज्जा के विरोध में रैली निकालेंगे और सड़क जाम करेंगे.  हम पिज्जा का पुतला दहन भी करेंगे. भारत में विदेशियों की कोई जरुरत नहीं है. जिसे पिज्जा खाना है वो भारत छोड़ कर चला जाए, जिसे भारत में रहना है उसे समोसा खाना ही पड़ेगा.  ये देश साधू संतों बाबा जी का भी है. बाबा जी भी कहते थे, समोसा के साथ हरी चटनी खाओ. अब हरी चटनी तो समोसा के साथ ही खायी जा सकती है. पिज्जा के साथ तो लाल चलती, टोमेटो की चटनी मिलती है, पिज्जा विदेशी है, हम उसका विरोध करेंगे…. एक साँस में इतना लम्बा भाषण देने के कारम उपाध्यक्ष महोदय को खाँसी आ गयी, वो रुक कर पानी पिने लगे.
उपाध्यक्ष महोदय को चुप होता देख कर अध्यक्ष महोदय भाषण देना शुरू कर दिए , अगर इस देश में कोई पिज्जा दिख गया तो हम उसके टुकडे टुकड़े कर देंगे. उनसे पूछा गया की पिज्जा के कितने टुकड़े करेंगे? उन्होंने अनाप स्नेप डॉट कॉम के पत्रकार ख्याली बाबा को बताया की कम से कम बोटी बोटी तो कर ही देंगे, मगर हमें हिंसा पसंद नहीं है. अध्यक्ष महोदय को जब बताया गया की पिज्जा पहले से ही आठ टुकड़ों में आता है तो अध्यक्ष महोदय बोल पड़े, हम उस व्यक्ति को जरुर सम्मानित करेंगे जो पिज्जा के आठ टुकड़े कर डालता है.
तब तक उपाध्यक्ष महोदय ने पानी पि लिया था, वो फिर से नारा लगाने लगे , अगर देश में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा, नहीं तो देश से जाना पड़ेगा…

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Friday, April 15, 2016

इंडिया और वेस्ट इंडीज में होगा दुबारा से सेमीफाइनल.

 April 15, 2016     No comments   


31 मार्च को हुए इंडिया और वेस्ट इंडीज के बिच क्रिकेट मैच में इंडिया की बुरी तरह से हार हुई थी और वेस्ट इंडीज फाइनल में पहुँच गया था. इस हार से भारतियों को जितनी निराशा हुई उतनी किसी और को नहीं हुई होगी.
wi-vs-indलेकिन इस निराशा के बिच आशा की एक किरण नजर आ रही है. खबर है की इंडिया और वेस्ट इंडीज के बिच दुबारा से सेमी फाइनल मैच खेला जाएगा और इसका विजेता ही फाइनल में स्थान पायेगा.
क्रिकेट के इतिहास में ये पहला मौका होगा, जब एक खेले जा चुके मैच को रद्द कर के उसे दुबारा से खेला जायेगा. मैच को किस कारण रद्द किया गया है, इसकी पुख्ता जानकारी तो किसी को नहीं मिली है. मगर क्रिकेट के गलियारों में खबर है की, मैच को रद्द होने के पीछे गेल का हाथ है. उन्होंने ये इल्जाम लगाया की बुमराह को इतनी अच्छी बोलिंग करने की क्या जरुरत थी की मैं सिर्फ पाँच रन बना कर ही आउट हो गया.
😉वहीँ कुछ लोगो का कहना है की गेल को डांस करने का नहीं मौका मिलने के कारण उन्होंने इस मैच को रद्द करने की माँग की है, जिसे ICC वालों ने मान भी लिया है. गेल, इंडिया की जीत पर डांस करना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने बाकायदा दो दिनों की ट्रेनिंग एंड पाँच दिनों की प्रैक्टिस भी की थी, उनके इतने मेहनत पर पानी फिर जाने के कारण वो गुस्से में हैं. गेल ने धोनी को व्हाट्स एप्प पर मैसेज भी किया है. उतना रन बनाने के बाद हारने की जरुरत क्या थी? अब मैं डांस कैसे करूँ? धोनी ने भी गेल के दुःख को समझते हुए ICC से गुहार लगायी है की वो इस मैच को दुबारा से करवायें और ICC वालों ने धोनी की भी बात मान ली है.
तो इस प्रकार इस टी 20 के इस सेमीफाइनल मैच को दुबारा से कराने का फैसला किया गया है. जो एक बहुत ही खुश कर देने वाली खबर है. लेकिन बहुत से लोग इस खबर को पढ़ कर झंड भी हो जायेंगे जब उन्हें पता लगेगा की आज पहली अप्रैल है.
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April 1, 2016 · by Anap Snap · in अनाप सनाप, Fun Zone. ·
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नारीवाद

 April 15, 2016     No comments   

😀महिला सशक्तिकरण से हम क्या समझते हैं.. ‘सशक्तिकरण’ से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिये महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है, तो इस से ये स्पष्ट होता है की हमें खुद को पुरुषों से कम नही समझना चाहिए और आज हम ये साबित भी कर चुके हैं की हम कहीं भी किसी भी तरह से पुरुषों से कम नही हैं। ये सब पढ़ कर आप लोगो को लग रहा होगा की फिर कोई नारीवाद , वीमेन एम्पावरमेंट पर भाषण देने वाली आ गयी।।
मैं ऐसा कुछ नही कहना चाहती ।। हलाकि मैं खुद एक महिला हूँ और महिला सशक्तिकरण के विरोध में तो बिलकुल नही हूँ पर जब अपने आस पास की कुछ घटनाओ को देखती हूँ तो मन विचलित हो जाता है और यह ख्याल आता है की क्या यही है बस नारीवाद, वीमेन एम्पावरमेंट.. क्या यही वो अधिकार हैं जिन के लिए नारी सदियों से लड़ रही है। क्या पार्टीज में लेट नाईट रुकना, शराब पीना, गाली गलौच करना, कहीं भी अपने पुरुष मित्रों के साथ इंटिमेट होना, बड़ों की इज़्ज़त ना करना, क्या यही सब वो अधिकार हैं जो हमें चाहिए थे समाज से।
जो कानून हमारी सुरक्षा के लिए बनाये गए हैं उनका गलत इस्तेमाल करना, अपने जरा देर के गुस्से और अहंकार को शांत करने के लिए किसी लड़के की ज़िन्दगी बर्बाद करना उस उलटे सीधे आरोप लगाना,

Image from Net
misuse498aशादी में तनाव हो तो पति और पति के परिवार के खिलाफ धारा 498ए के तहत शिकायत दर्ज करा दी जाती है और परिवार के खिलाफ फौरन गैर जमानती वारंट जारी हो जाता है, क्या यही सब वो अधिकार हैं जिन के ये महिला सशक्तिकरण और नारीवाद जैसे बड़े बड़े शब्दों का इस्तेमाल होता है।।
क्या वाकई आज की महिलाएं सही मायने समझती है महिला सशक्तिकरण के.. खुद को पुरुषों के बराबर मानिए पर उनसे बराबरी करने के लिए ये जरुरी नही की आप उनकी हर अच्छी बुरी आदतों को अपनाये।
जब भी हम किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफ़र करते हैं तो हमेशा लड़कों की तरफ देखा जाता है की वो अपनी सीट किसी बुजुर्ग या जरूरतमंद को दे दें। क्या युवा लड़कियों से ऐसी अपेक्षा नही रखी जा सकती। जब बराबरी का दर्जा मिला है तो क्या हमारा फ़र्ज़ नही की हम भी अपने व्यवहार में बदलाव लाये और जिस बर्ताव और व्यवहार की अपेक्षा हम पुरुषों से रखते हैं उस पर हम खुद भी अमल करें।।
अंत में मैं यही कहूँगी की सभी महिलाएं इन अधिकारों का गलत फायदा नही उठा रहीं है और ना ही महिला सशक्तिकरण गलत है।। मैं भी एक महिला हूँ और जानती हूँ की अब भी कई जगहों पर महिलाओ के साथ उचित व्यवहार नही किया जाता और उन्हें वो अधिकार नही दिए जाते जिन के लिए वो हर तरह से योग्य हैं उन को जरुरत है बदलाव की नयी सोच की पर जो मैंने यहाँ व्यक्त किया है वो कहानी का दूसरा पहलु है। आशा है की मैं अपनी बात सही तरीके से आप तक पहुंचा पायी हूँ।


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कराँची के आतंक निरोधक कोर्ट के मासूम जज ने पूछा ग्रेनेड कैसे फटता है? जबाब था – ऐसे

 April 15, 2016     No comments   


http://resources2.news.com.au/images/2011/11/25/1226206/163042-hand-grenade.jpgपाकिस्तान में आतंक निरोधक कोर्ट में जो जज साहब है, वो इतने मासूम हैं की उन्हें पता ही नहीं था की अगर पिन निकाल दिया जाय तो ग्रेनेड फट पड़ेगा. अरे भाई साब इतना तो हमारे देश का बच्चा बच्चा भी जानता है, फिल्मों में देख कर. की सरहद पार से जो आतंकवादी आते हैं जो कैसे ग्रेनेड फोड़ते हैं. अरे साहब आप भी हिंदी फिल्म देखना शुरू कर दीजिये. या आपने यहाँ फिल्मे नहीं बनती क्या जिसमे ग्रेनेड फेंका वेंका जाता हो? वैसे आपके यहाँ से तो असली वाले ग्रेनेड फेंके जाते हैं ना तो फिल्मों में नकली ग्रेनेड फेंकते देख कर उतना मज़ा नहीं आता होगा?

मामला कराँची का है.. जब वहाँ के आतंक निरोधक कोर्ट में जज से पुलिस से पूछा की की हैंड ग्रेनेड कैसे फटता है? और पुलिस ने ग्रेनेड का पिन निकाल कर दिखाया की ऐसे फटता है. और उसके बाद वाकई में ग्रेनेड फट पड़ा. जिसमे कई लोग घायल हो गये.  
वो तो शुक्र है की पाकिस्तान अपने हथियार चाइना से खरीदता है, अन्यथा कोर्ट में जो ग्रेनेड फटा था अगर चाइना का माल नहीं होता तो अपने साथ साथ कई लोगो को ले जाता . चाइना माल को भले ही कई लोग कोसते हो या मजाक उड़ाते हो, मगर इस हादसे में जिनकी जान बच गयी है, जो तो चाइना माल को धन्यबाद ही दे रहे होंगे. चाइना माल जिंदाबाद के नारे लगा रहे होंगे.
हम तो ये सोंच रहे हैं की ग्रेनेड कैसे फटता है की जगह जज साहब के सामने दुसरे केस आते तो वो कैसे फैसला सुनाते, क्या वो अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए ऐसे और भी सवाल करते? तलाक का केस आने पर, पूछते तलाक कैसे होता है? पुलिस वाले भाई साब बताते, तलाक-तलाक-तलाक, ऐसे होता है तलाक. ऐसे होता है बताने के चक्कर में पुलिस वाले का वैसे ही तलाक हो जाता, जज साहब को फैसला सुनाने का भी मौका नहीं मिलता. बलात्कार का केस आने पर, बलात्कार कैसे होता है? ये भी पूछ सकते हैं पाकिस्तान के जज.
पाकिस्तान है, वहाँ कुछ भी हो सकता है. सब ऊपरवाले के भरोसे तो चल रहा है.

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