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Sunday, April 30, 2017

हम इंसान जन्मजात आलसी हैं.

 April 30, 2017     No comments   

हम जन्मजात आलसी हैं और अपने इस आलसपन को फुलफिल करने के लिए ही हमने तरह तरह के आविष्कार भी किये हैं.
आदम ज़माने में पीठ पर लाद कर सामन ढोने में आलस आने लगा, हमने पहिया खोजा, उसपर लकड़ी का पटरा डाल कर सामन ढोने लगे. उसमे भी आलस आया तो बैल, घोड़ा, गदहा, भैंसा को जोत दिया की अब तू खिंच इसे.
गणना करने में आलस आया तो कैलकुलेटर ले आये, कम्पुटर ले आये, मोबाइल ले आये. बहुत कुछ ले आये.
एक दुसरे से मोहब्बत करना आसान है, हमें उसमे भी आलस आया, हम नफ़रत करना शुरू किये, चुगली करना शुरू कर दिए.  
मिलजुल कर रहना आसान था, हमें उसमे भी आलस आया हमने मार कुटाई शुरू कर दी.
हम इंसान जन्मजात आलसी हैं.

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