Saturday, April 30, 2011
Friday, April 29, 2011
Thursday, April 28, 2011
बेचैनी !!!
April 28, 2011
bechaini, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, poem .
1 comment
बेचैनी तो कदम मिला के चलती है रूह के भी !
Tuesday, April 26, 2011
सम्मान माँगा नहीं दिया जाता है. चाहे सचिन के लिए भारत रत्न ही क्यों न हो !
April 26, 2011
amitabh bachchhan, bharatratna, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, sachin tendulkar
No comments
अभी देश में जिस तरह से सचिन को भारत रत्न दिलाने की बात की जा रही है, उससे तो यही लगता है की सचिन को जबरदस्ती सम्मान दिलाये जाने की मुहीम हो रही है. बेशक वे एक महान बल्लेबाज़ हैं , पर खेलने के लिए लिए उन्हें पैसे भी मिलते हैं. अपने खेल से उन्होंने देश क्या क्या भला किया है अगर ये पूछा जाये तो किसी के पास जबाब नहीं होगा. हां ये अलग बात है की, देश वासी एक भारतरत्न प्राप्त भारतीय को टीवी पर किसी खास व्यावसायिक सामान के प्रचार के लिए या लोगो लो अंडे खाने के लिए आग्रह करते हुए देखना चाहे तो अलग बात है.
सचिन की महान उब्लाब्धियो (उनके व्यक्तिगत विशाल स्कोर, ) के लिए भारत रत्न दी जाने की बात हो रही है तो, अमिताभ बच्चन को भी भारत रत्न मिलाना चाहिए ! क्यों की वे सदी के महानायक हैं !
Thursday, April 14, 2011
"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"
April 14, 2011
earth, help, manu shrivastav, manu srijan, save water, short story, story, water, water resource
No comments
"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" की बड़ी तेज़ आवाज़ आई थी , तालाब से थोड़ी दूर ही आम का बगीचा था. वहाँ भरी दुपहरी में लोग पेंड़ो की छाया में आराम कर रहे थे की जो की आवाज़ सुन के सब चौक गए.
पांडव ने मारा था रावण को |
April 14, 2011
manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, pandav ne mara tha rawan ko
2 comments
जुए में घर बार हारने के बाद जंगल में जाना पड़ा बनवास के लिए. बनवास करते करते वे पुरे भारत का भ्रमण कर लिए. जंगल में इह्नोने कई देशो से लडाईयां की. जिसमे इन्होने अफगानिस्तान को पूरी तदाह बर्बाद कर दिया .
इसी क्रम में इनकी दोस्ती कृष्ण भगवन से हुई. वे इनके परम मित्र बन गए.
फिर ये यात्रा करते हुए थोडा और आगे बड़े . रास्ते में द्रोपदी को एक जगह प्यास लगी . द्रोपदी ने पानी पिने की इच्छा जताई .
युधिस्ठिर ने भीम को पानी लाने के लिए कहा .
भीम पानी लाने ले लिए चल पड़े .
भीम के गए काफी देर हो गए , वे वापस नहीं आये .
युधिस्ठिर ने अर्जुन को भेजा . अर्जुन गए तो गए ही रह गए , आये नहीं .
एक - एक कर के युधिस्ठिर ने अपने सरे भाइयों को पानी के तलाश में भेज दिया काफी देर के बाद भी कोई वापस नहीं आया. तो युधिस्ठिर खुद पानी और अपने भाइयों की तलाश में निकले.
टहलते टहलते वे एक तालाब के किनारे पहुचे तो देखा की उनके चारो भाई अचेतन हुए पड़े हैं. उन्होंने सोचा की प्यास से बेहोश हैं. इनके चहरे पे पानी का छिटा मार के होश में लाया जाये . जैसे ही पानी लेने के लिए तालाब पे झुके तालन से आवाज आई अगर पानी पीना है तो मेरे प्रश्नों का जबाब देना पड़ेगा तुमको . युधिस्ठिर ने पूछा कौन हो आप? तालाब से आवाज़ आई मैं कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन बोला रहा हूँ . युधिस्ठिर मान गए . सवाल जवाब देना उनके बाएं हाथ का खेल था .
अपने गुरु द्रोन की क्लास में हमेशा वो 95% नंबर जो लाते थे . 100% भी लाने की तयारी थी पर तब ग्रेडिंग की व्यवस्था हो गयी . यहाँ पे उन्होंने अमिताभ बच्चन के 100 सवालो का सही सही जबाब दिया . अमिताभ बच्चन ने खुश होके कहा- परीक्षार्थी, परीक्षक से ज्यादा ज्ञानवान है .
फिर युधिस्ठिर ने अपने भाइयो पे पानी के छिटके मारे. पानी के छिटके पड़ते ही सरे पांडव होश में आये गए . होश में आते ही उन्होंने युधिस्ठिर से सवाल की - भाईजान आप हम पे ये पानी के छिटके मार के होली क्यों मना रहे हो .. तभी से हम होली का त्यौहार मानते आ रहे हैं .
वह से पांचो पांडव पानी ले द्रोपदी के पास पूछे . पर उनको वह पे द्रोपदी नहीं मिली .
उन्होंने अपने आस पास का सारा जंगल छान मारा . रास्ते में उनको जटायु मिला . उसने बताया - लंका का राजा रावण आपकी द्रोपदी का हरण कर के ले जा रहा था . मैंने विद्रोह करने की कोशिश की तो उसने मेरे पंख ये कह के का दिया की - ये पंख हमके डेड जटायु . मैं द्रोपदी को बचा नहीं पाया .
जटायु के दिशा निर्देश पे पे आगे बड़े . रास्ते में उनको हनुमान जी मिले .हनुमान जी ने उनको सुग्रीव से मिलाया . सुग्रीव ने बताया की अगर उनको उसकी मदद चाहिए तो बदले में उसको , उसके भाई बाली का राज्य दिलाना होगा .पांडव तैयार हो गए. युधिस्ठिर
ने अपने भाई भीम को बाली से लड़ने के लिए भेजा . भीम ने बाली को मल्लयुद्ध में बाली को पछाड़ दिया और उसके पैर पकड़ के दो तुकडे कर दिए . बाली की जगह सुग्रीव राजा बन गया .बाली को इतिहास में जरासंध के नाम से भी जाना जाता है.
सुग्रीव ने अपने वादे के अनुसार हनुमान को द्रोपदी की खोज में भेजा .
हनुमान ने पता लगाया की द्रोपदी को लंका के राजा रावण ने अशोक वाटिका में रखा है.
द्रोपदी का पता लगते ही पांडवो ने लंका पैर चढाई करने की योजना बनाई. लंका की तरफ बदते हुए वे जा पहुचे कन्याकुमारी. वहां से आगे जाने का मार्ग बंद था तो उन्होंने नल नील को बुला के सागर के उपर पूल बनाने का टेंडर देने को कहा . नल नील पूल बनाने के लिए तैयार हो गय. पूल बनाना चालू हो गया. पांडव रोज़ ही पूल की गुद्वात्ता की जाँच करते थे की कही इसमें नकली माल तो नहीं खपाया जा रहा है . कड़ी मेहनत और लगन से pool तैयार हो गयी . उसपे चढ़ के वे लंका की डरती पे उतारे ही थे की वहा के कस्टम वालो ने पासपोर्ट और वीसा की जाँच शुरू कर दी . कई लोग अंदर ही . पांडवो के पास भी पासपोर्ट और वीसा नहीं था . वनवास पे जाने के पहले दुर्योधन ने उनका पासपोर्ट और वीसा अपने पास जमा कर के देश से बहार जाने से मना किया था . कस्टम वाले पांडवो को अंदर ले जाने वाले ही थे की विभीषण वहा आ गए . उन्होंने पांडवो के सामने एक शर्त राखी . की अगर तुम को रावण को मारने का रास्ता बताऊ तो तुमको मुझे लंका का राजा बनाना पड़ेगा और बदले में मैं तुमको द्रोपदी को वापस कर दूंगा .
पांडव तैयार हो गए .
बहुत घमासान लडाई हुई और रावण मारा गया . पांडव अपनी द्रोपदी को लेकर वापस हस्तिनापुर आ गए .
और ख़ुशी ख़ुशी राज्य करने लगे .
नोट :
यह आज सन्(2009) के एक हजार साल बाद यानि 3009 के इतिहास के किताब के एक अध्याय से लिए गया है .
समर्पित :
उन सरकारों के नाम पे जो इतिहास को अपने मन से लिखवाते और स्कूल में पद्वते है . दूसरी सरकार आती है और उनमे फेरबदल कर के दुबारा से छपवाती है .
ख़ुशी
April 14, 2011
hindi poem, khushi, manoranjan shrivastav, manu, manu shrivastav, manu srijan
No comments
अपनी किरणों से जग को वह ख़ुशी दे जाता है
आसमान में देखो पक्षी कैसे उड़ाते जाते है ?
करते है कलरव और गीत ख़ुशी के गाते है
कलकल के के बहती नदी सबको ये समझाती है
रुकने को दुःख कहते है चलना ख़ुशी कहलाती है
फूलों पे मढ़राते भवंरे जब उसका रस पा जाते है
हो कर के मतवाले वे भी ख़ुशी में गाते है
काले काले बदल धरती पे जब बुँदे बरसते है
खेतो में लहराते पौधे झूम ख़ुशी में जाते है
पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !
April 14, 2011
gandhi ji, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, nathuram, roz yaha main marta hu
No comments
मन की आस ना पूरी हुई,
आज़ादी का सपना, अपना,
पूरी, पर अधूरी हुई |
इतिहास दुहराता है है खुद को,
इतिहास में ही हम पढ़ रहे हैं,
अपनी अपनी हस्तिनापुर को,
आज भी भाई लड़ रहे हैं |
सुख चुका आँखों का पानी,
लाज हया विलुप्त हुई,
दानवता विस्तार पा रही,
मानवता सुसुप्त हुई|
गिर रहें हैं कट कट के सर,
धर्म के कारोबार में,
खुदा भी अब बँट चुका,
उत्तर- दक्षिण के त्यौहार में|
थी भली लाख गुना गुलामी, आज से,
आपस में तो ना लड़ते थे,
उन फिरंगी गोरों के आगे आ,
एक हिन्दुस्तानी होने का तो दम भरते थे|
था सही ऐ "नाथू" तूं,
अब यही सोचा करता हूँ,
मारा तुमने मुझे एक बार,
पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !
ये सिसकन ही जिंदगानी है,
April 14, 2011
hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan
No comments
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
किस्मत को या रब को कोसे, कोसे से ना रोटी मिलती,
मेहनत भी न कर पाते , बिन रोटी ना जां ये हिलती |
करमहीन बना डाला उनने , रोटी देते जो दानी हैं,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
थूक के मलहम लगा लगा के, सूखे ओठ को गिले करते,
पेट की आग बुझा लेते तब , आँखों से जब पानी झरते,
पर कुवे जैसा सुखा चूका , आँखों का जो पानी है.
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
जी रहे थे मर मर के, तो क्या हुआ जो मर गए,
छुटा पीछा नारकीय जीवन से, दुनिया से तो तर गए,
पर, छोड़ गए अपनी औलादे, ये कैसी नादानी है,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
Sunday, April 10, 2011
पियाज वाला चाय
April 10, 2011
bhojpuri, chai, manoranjan shriavstav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, piyaz wala chai, pyaaz
No comments
Saturday, April 9, 2011
अँधेरा जैसा छा जाता है !
April 09, 2011
doctor, jokes, manoranjan shriavstav, manu, manu mania, manu srijan, weakness
No comments
