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Thursday, April 14, 2011

"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"

 April 14, 2011     earth, help, manu shrivastav, manu srijan, save water, short story, story, water, water resource     No comments   

www.hamarivani.com

"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"  की बड़ी तेज़ आवाज़ आई थी , तालाब से थोड़ी दूर ही आम का बगीचा था. वहाँ भरी दुपहरी में लोग पेंड़ो की छाया में आराम कर रहे थे की जो की आवाज़ सुन के सब चौक गए.

कुछ तो दौड़ के तालाब के किनारे पहुँचे की शायद कोई डूब न रहा हो,  पैर कोई डूब नहीं रहा था. एक बच्चा अपने भैंस को तालाब के किनारे पानी में नहला रहा था. बचाओ बचाओ की आवाज़ उसने भी सुनी थी, वो भी तालाब की तरफ देख रहा था की हुआ क्या है? 

कुछ नहीं पा कर सारे लोग जैसे ही वापस जाने को मुड़े , फिर आवाज़ आई -  "बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" 

अब लोग थोडा ध्यान से देखने लगे , पर कुछ नजर नहीं आया. तालाब के दुसे किनारे पे कुछ औरते कपडा धो रही थी, वे कपडा धोने के साथ अपने हसी मजाक में इतनी मगन थीं की उनलोगों को पता ही नहीं था की वह हो क्या रहा है? 
लोगो ने अपनी नजरे दूसरी तरफ घुमाई, की कुछ दिख जाये, पर उस छोर पे दो लोग अपनी  पानी खीचने वाली माशीन से खेत को सिचने के लिए पानी निकालने में व्यस्त थे. पर वे इतनी दूर थी की उनकी आवाज़ यहाँ तक नहीं आ सकती थी. 
लोग अभी देख परख ही रहे थे की तीब्र आवाज़ सुनाई पड़ी -  "बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" 

लोगो ने तालाब के चौथी तरफ देखा की शयद उधर कुछ हो रहा हो. पर उधर एक आदमी अपने कुदाल से कुछ करने में व्यस्त था. लोगो ने उसे आवाज़ दी-"क्या कर रहे हो भाई ? चीख क्यों रहे हो?"
आदमी बोला - "मुझे साँस लेने की फुरसत नहीं है तुम चीखने की बात कर रहे हो.शौच की टंकी फुट गयी है और टंकी से पानी बह के घर के पास जमा होगा गया है. उसके निकासी के लिए नाली बना रहा हूँ . " कह के आदमी वापस अपने काम में लग गया.

लोग सोच में पड़ गए. आखिर माज़रा क्या है ? कही भूत वूत का तो चक्कर नहीं है ?  उनमे से एक आदमी ने हिम्मत कर के पूछा - "भाई साहेब आप कौन हो? आप दिखाई ही नहीं दे रहे हो, तो हम भला मदद कैसे करें?"

आवाज़ आई - मेरी तुमको जरा भी परवाह नहीं है, मुझे बर्बाद कर रहे हो, मुझे तुम लोग गन्दा कर रहे हो, तो मुझे अपने लिए गुहार तो लगाने ही पड़ेगी !

एक आदमी ने पूछा - "पर आखिर तुम हो कौन?'

आवाज़ आई - "मैं पानी हूँ "
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