ये भी ठीक ही है

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Friday, August 26, 2011

अन्ना जी के तीन...........

 August 26, 2011     anna hazare, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, vyang, अन्ना जी के तीन     2 comments   

गाँधी के तीनो बन्दर, अहिंसा के उनके उपदेश को भूल के आपस में तू तू मैं मैं करने पे उतारू थे. वो जिसने अपने मुंह पे हाथ रख के बुरा नहीं बोलने की कसम खायी थी, वो अपना हाथ हटा के धारा प्रवाह बोले जा रहा था, ठीक वैसे जैसे, हिमालय की चोटियों से निकल के गंगा धारा प्रवाह बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जा मिलाती है. नॉन स्टॉप.
    दूसरा, कुछ गलत नहीं सुनाने वाला भी, कान से हाथ हटा लिया था. पर सुन तो वो अब भी नहीं रहा था किसी का, बस अपनी ही बोले जा रहा था.
     तीसरे वाले ने , अपनी आँखों से हाथ हटा लिया था. उसने कई सालों से कुछ नहीं देखा था. वो अचंभित था - "अरे ! दुनिया इतनी बदल गयी क्या?" वो चुपचाप बैठ के बाकि के दोनों की लड़ाई देखने लगा. शायद, समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर यहाँ चल क्या रहा है.
    चुप रहने वाला बन्दर दुबारा बोलना शुरू करने वाला था की, न सुनाने वाला बन्दर बोला - "तुम चुप रहे हो जी, तुमको बोलने का की क्या पड़ी है?" तो उसने जबाब दिया - "बोलने, मेरा मौलिक अधिकार है. संविधान ने ये दिया है मुझे !" न सुनाने वाला बन्दर बोला - "बोलने का अधिकार तो मुझे भी संविधान ने दिया है. और मैं बोल रहा हूँ की तुम चुप हो जाओ "
     "चुप रहने का तो सवाल ही नहीं उठता. गाँधी जी का कहना मान के इतने साल चुप रहें हम, क्या मिला हमे उनके साथ रह के ? कोई हमे ठीक से जनता भी नहीं. अन्ना जी को देखो, उनके साथ रहने वाले कितने सोलिड हैं. वो ना तो किसी की सुनते हैं, ना किसी को बोलने देते हैं, और हर वक़्त सबको घूरते रहते हैं. वो लेडी को देखो. किसी की सुनती ही नहीं. अगर कोई कुछ बोलने की कोशिश करता है, तो डांट के चुप करा देती है. -'आप एक मिनट चुप रहिये, चुप रहिये ' क्या रुआब है भाई?. उनकी बात सुन के सब चुप हो जाते हैं. हमारी बात सुन के भला कोई चुप होगा? "
    पहले वाले की बात सुन के दूसरा वाला बोला है - "हाँ यार ! सही कहते हो! मैंने तो ता उम्र किसी को नहीं सुना, पर ये लोग तो जम के सुनाते है दूसरो को. बोलते बोलते गला सुखा जाये तो पानी पी पी के सुनाते हैं. हमारी तो कोई सुनाता नहीं. "
   इस्पे तीसरा वाला बोला - "मुझे तो कुछ पता ही नहीं हो क्या रहा है? मैंने तो अभी अभी अपनी आँखे खोली है, पहले देख के कुछ समझ लेने दो फिर कुछ बोलूँगा."          
   पहला वाला निराशा भरे शब्दों में बोला - "हम गांधी जी के तीन बंदरो से कही ज्यादा बेहतर हैं ये अन्ना जी के तीन..........."
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Tuesday, August 16, 2011

जय हिंद , जय करप्शन ;)

 August 16, 2011     2 comments   

तुम मुझे पैसा दो, मैं तुम्हारा काम करूँगा
जय हिंद , जय करप्शन ;)
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Sunday, August 14, 2011

देशभक्ति करने का मौका

 August 14, 2011     bhaiya ji, manu shrivastav, manu srijan, vyang     2 comments   

भईया जी अपनी भैस को दुह के उठे और दूध से आधी भरी बाल्टी को नल के नीचे रख के नल चालू कर दिया . पर उससे पानी नहीं आया, सरकारी था . भईया जी खुन्नस में बडबडाये - "जब सारा दूध बिक जायेगा, तब इसमें पानी आएगा." 

तभी उसना मोबाइल बज उठा - "कोई होता जिसको अपना , हम अपना कह लेते यारों " ये उनका पसंदीदा रिंग टोन था. फ़ोन रिसीव कर के अभी 'हल्लो' भी नहीं कर पाए थे कि उधर से आवाज़ आई - "भईया जी ! मैं तोला राम , तुम्हे बचपन का दोस्त बोल रहा हूँ ."

"हाँ ! तो अब जवानी में फ़ोन करने कि क्या जरुरत आ पड़ी?" भईया जी ने पूछा .

तोलाराम ने समझाते हुये कहा - "अरे भाई ! नाराज़गी छोडो मैंने तुम्हरे फायदे के लिए फ़ोन किया है. " 

"तो बोल्लो ना ! चार भैसे खड़ी रम्भा रही हैं, उनको दुहना है अभी. "

"भईया जी ! मुझे एक स्कूल में पंद्रह अगस्त पे खाना खिलने का टेंडर मिला है. उसके लिए मुझे दूध का आर्डर देना था. अब तुम ही मेरे बाल सखा हो, इसलिए तुमको मैंने फोन किया है. अस्सी लीटर दूध कि जरुरत है, कल सुबह ही गाडी भिजवा दूँगा. "

"तुमने गाडी कब ली, तुम तो फटफटिया पे चलते थे ना?" भईया जी ने पूछा .

तोला राम खिलखिलाते हुये बोले - "सब दया है 'उपरवाले' की , प्रसाद चढ़ाया और फल प्राप्त हुआ और सरकारी कामो में तो खर्चा पाई का मुनाफा हज़ार का भी तो होता है." 

तोला राम की बात सुन के भईया जी दंग रहा गए. पूछने लगे - "अरे ! कुछ हमे भी तो बताओ." 

तोला राम बोले - "फोन से ज्यादा नहीं बता सकता हूँ. आजकल फोन टेपिंग बहुत बढ़ गयी है. कल पांच बजे गाडी तुम्हारे घर पहुँच जाएगी. सब तैयार रखना."

"पर, हमारी सारी भैंसे मिल कर भी चालीस लीटर दूध नहीं देती हैं. हम अस्सी लीटर का इंतजाम कैसे करेगे."

"हद है यार !" - तोला राम भड़क गए - "घर में चाप कल है की नहीं है."

"नहीं, सरकारी नल है और वो भी आज सुखा पड़ा है." - भईया जी उदास होके बोले.

"चलो यार, तुम्हरे लिए पानी भिजवा देता हूँ. पर, इसके पैसे कट जायेंगे ! और सुनो, दूध तीन प्रकार का होना चाहिए. एक, विशेष अतिथि के लिए. दूसरा, शिक्षकों के लिए और बाकि का बच्चो को पिलाने के लिए. तुम भी आ जाना फंक्शन में, गेस्ट का पास मिल जायेगा और तुम्हारा चालीस किलो दूध, अस्सी किलो में खड़े खड़े बिकवा दिया, तो मेरा भी ख्याल रखना. अच्छा अभी फोन रखते हैं, बहुत काम है. जय हिंद! "

भईया जी कुछ कहते, तब तक फ़ोन कट गया था. और 'सों-सों' के आवाज़ के साथ नल में पानी आने लगा था. भईया जी फोन को लुंगी में खोसते हुये बोले - "चलो ! पुरे साल देश को लूटने खसोटने के बाद, एक दिन तो देशभक्ति करने का मौका मिला."

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Friday, August 12, 2011

रक्षा बंधन के त्यौहार की बधाई !

 August 12, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, raksha bandhan     3 comments   

वक़्त कितना बदल गया. जब हम सालों भर लड़ते रहते थे. और हर बार वो मुझे मनाती थी. सिर्फ आज के दिन ही मेरी कोशिश होती की लड़ाई ना हो, पर होती थी और मुझे मनाना होता था . पर अब हम इतनी दूर दूर हैं की ना लड़ सकते हैं, ना मना सकते हैं.  मेरी सारी शुभ कामना तुम्हारे लिए . मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ . हर वक़्त तुम्हारे सपोर्ट में . ये मैंने तुमसे ही सिखा है. रक्षा बंधन के त्यौहार की बधाई ! 
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Tuesday, August 9, 2011

आरक्षण

 August 09, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, reservation     5 comments   

आरक्षण का इजाद तब हुआ था जब देश आज़ाद हुआ था, देश की पिछड़ी जातियों को आगे लाने के लिए उनको आरक्षण दिया गया था. ताकि वे भी आगे आगे आके देश के विकास में सहायक हों. दिन , महीने, साल, और दसक बीत गए पिछड़ी जातियां आज भी पिछड़ी हैं , पर पिछड़ी जातियों पे राजनीती करने वाले कहा के कहा पहुँच गए. सबसे ज्वलंत उदाहरण मायावती है. मायावती इतने आगे आयीं की अपना खुद का मंदिर ही बनवाने पे अमादा हो गयीं.  कालांतर में आरक्षण, वोट बैंक का एक हथियार बन गया, जिसे कोई भी राजनितिक दल नहीं खोना चाहता है.

पर इस आरक्षण के आग में कई अन्य लोग भी झुलस रहे हैं. मसलन कोई सामान्य विद्यार्थी  अस्सी मार्क्स लाके भी नौकरी का हक़दार नहीं है, और कोई साठ मार्क्स लाके भी नौकरी का अधिकारी है.  आरक्षण जाती के नहीं , किसी को भी उसकी माली हैसियत के आधार पे देना चाहिए. जातिगत आधार पे लोगो को लाभ देने का ही दुसपरिणाम है की कई लोग फर्जी जाती प्रमाण पत्र बना के अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. 

आरक्षण तो होना ही नहीं चाहिए !

कहावत है की, सन १९२३ में जब तुर्की आज़ाद हुआ था तो उसके प्रथम रास्त्रपति,मुस्तफा कमल पासा, ने अपने मंत्रियो से पूछा था की पिछड़ी जातियों को सामान्य जाती के बराबर लाने में कितना वक़्त लगेगा. मंत्रियो ने जबाब दिया - "कम से कम दस साल ". इसपे मुस्तफा कमल पासा ने कहा - "समझ लो वो दस साल आज खत्म हो गया." 

और ये घटना भारत के आज़ाद होने के २४ साल पहले की है.
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Sunday, August 7, 2011

खुदा से फरियाद कर लो .

 August 07, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     4 comments   

दुआओं में ना सही, बददुआओं में याद कर लो,
हो जांयें फ़ना हमे यूँ बर्बाद कर लो ,
नफरत के स्याही से लिख कर के तुम,
तबाही की हमारी, खुदा से फरियाद कर लो . 
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