दुआओं में ना सही, बददुआओं में याद कर लो,
हो जांयें फ़ना हमे यूँ बर्बाद कर लो ,
नफरत के स्याही से लिख कर के तुम,
तबाही की हमारी, खुदा से फरियाद कर लो .
August 07, 2011
hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem
4 comments
nice...
ReplyDeleteबहुत खूब ....क्या बात है
ReplyDeleteक्यूँ , क्यूँ , क्यूँ ,
ReplyDeleteआखिर क्यूँ मनु भाई?
वाह बेहतरीन !!!!
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