ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Monday, September 19, 2011

ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये !! - पार्ट 1

 September 19, 2011     BJP, congress, dracula, India, manu, manu shrivastav, manushrivastav, ड्रैकुला को खून चाहिए     7 comments   

भूतो का सरदार ड्रैकुला सरकारी अस्पताल में एक गंदे से बेड पे रुग्ण अवस्था में पड़ा था . खून की कमी के कारण उसका चेहरा पीला पड़ा था. ये वही ड्रैकुला है, जिसका चेहरा एक दम लाल हुआ करता था , लोगो का खून पि पि के. 

अस्पताल में वो अपनी घड़ियाँ गिन रहा था. उसके सारे संगी साथी उसका साथ छोड़ के चले गए थे. अब एक पिलपिले ड्रैकुला के भला कोई डरता है है क्या ? अब इस महंगाई के ज़माने में उसके रिश्तेदारों को अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा था, वो भला ड्रैकुला के लिए ताज़ा खून कहा से इन्तेजाम करते. कमजोरी के वजह से ड्रैकुला चिडचिडा हो गया था. उसके साथी उसके पीठ पिच्छे उसे ड्रैकुला के वजाए, क्रेकुला कहा करते थे.

सरकारी अस्पताल में उसकी देख रेख करने करने वाला कोई भी नहीं था, प्राइवेट में वो इलाज करा नहीं सकता था. उसके रिश्तेदारों ने उसे सम्पति से बेदखल कर दिया था. अब वो महंगा इलाज तो करा नहीं सकता था. वो अपने जीवन की अंतिम घड़ियाँ गिन रहा था. उसके प्राण पखेरू कभी भी उड़ सकते थे. पर वे थे की उड़ ही नहीं रहे थे. 

पर कहते हैं न, जाको राखे साइयां मार सके न कोय. उस अस्पताल में एक बहुत ही दयालु डॉक्टर विजित पे आई.  उसे ड्रैकुला की दयनीय स्थिति नहीं देखी गयी. वो उसके पास उसका जाने लगी की, एक नर्स बोली उसके पास मत जाइये . बहुत ही कमीना मरीज़ है वो, अकेले में नर्सो के गले में दांते गढ़ा देता है. इस अस्पताल की कोई नर्स उसके नजदीक नहीं जाती. 

"तो एक मरीज़ को ऐसे मरने के लिए छोड़ दोगे तुम लोग? लेडिस के बदले जेंट्स नर्स भेजो उसके पास." डॉक्टर गुस्साई. 

"भेजा था . उसको भी दांत काट लिया. पता नहीं कैसा टेस्ट है इसका. औरत मर्द का कोई फर्क ही नहीं है इसके लिए." नर्स बोली. डॉक्टर , नर्स की बातो पे ध्यान दिये बगैर ड्रैकुला के बेड की तरफ बढ चुकी थी.

उसके पास पहुँच के डॉक्टर वाली मुस्कान , जिसे देख  के ही मरीज़ को लगता है की अब मेरी बीमारी ठीक हो जाएगी, के साथ बोली - "हल्लो !  मैं इस अस्पताल की नयी डॉक्टर हूँ. आप अब बिलकुल मत घबडाइये. अब आपके इलाज में कोई कमी नहीं होगी"

ड्रैकुला मन ही मन हंसा " सरकारी अस्पताल में, प्राइवेट अस्पताल वाली डाईलॉक मार रही है".  

डॉक्टर ने पूछा - "आपका नाम क्या है? " 

ड्रैकुला ने सोचा , सीधे सीधे अपना नाम बता दिया तो, ये भी डर के चली जाएगी . मेरा फिर इलाज नहीं हो पायेगा. उसने अपने नेचर के विपरीत , पुरे पेशेंस के साथ डॉक्टर को समझाया की वो ड्रैकुला है. ड्रैकुला का नाम सुन के डॉक्टर ज़रा सी भी नहीं डरी तो, ड्रैकुला को ताज्जुब हुआ .

उसने कारण पूछा तो डॉक्टर बोली - "हम डॉक्टर, को किसी से डरने की क्या जरुरत है. हमारा काम है लोगो की सेवा करना. उसकी जान बचाना. अब वो चाहे इन्सान हो या हैवान . और फिर मैं भारतीय हूँ, और आप हमारे मेहमान हुए. "  

"आपकी बात सुन के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली" - ड्रैकुला बोला - "वैसे मैं जानता हूँ , की आप भारतीय लोग अपने देश में आये किसी की भी बहुत इज्ज़त करते हो, उसकी सेवा सुश्रुवा करते हो. चाहे वो इन्सान हो या हैवान. मैंने कसाब के बारे में बहुत पढ़ा है." 

कसाब को मेहमान जैसी इज्ज़त देने की बात सुन के एक आम भारतीय की तरह डॉक्टर झेंप गयी. वो बात को बदलते हुए पूछी - "वो सब छोडिये. ये बताइए, आप भारत कैसे आये?  और आपकी ये हालत कैसे हो गयी?"

ड्रैकुला बोला - "भारत के पिचास भुखमरी के शिकार हो के भूखो मर रहे थे. भारत, जो आबादी के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, उस देश में पिचासो को पिने के लिए लिए इंसानों का खून नहीं मिल पा रहा हो और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी हो. ये बहुत ही चिंता का विषय था हमारे लिए. तो मैं इसी की जाँच करने आया था."

"तो जाँच के दौरान क्या पाया आपने ?" डॉक्टर ने उत्सुकता से पूछा. उसे ड्रैकुला की बात में एक सच्चाई की झलक मिली थी.

ड्रैकुला बोला - "शुरुवाती जाँच में मुझे ये ही पता चला की यहाँ की वर्तमान गठबंधन सरकार की नीतियों ने जनता का खून चूस रखा है, जिससे  पिचासो को पिने के लिए पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा है. और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी है "

---------------------------------------------------------------------------------------------------------
 क्रमशः .............



Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, September 12, 2011

God is bias.

 September 12, 2011     God is bias, manu shrivastav, manu srijan, twitter     2 comments   

Sense of Humor is gift by GOD to me. If you can't understand humor . Its GOD's fault , not of your. God is bias.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, September 3, 2011

मुस्कुराना तेरा

 September 03, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, muskurana tera, poem     6 comments   

खिन्न हो मन
या उठ रहा हो
गुस्से का गुबार,

संकोच में घेरा हो
या झेल रहे हों 
कोई संताप,

उदासी का आलम हो
या हो सुखो का 
वनवास,

कर देता है,
आसन,
हर मुश्किलों को,
ये,
"मुस्कुराना तेरा"


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Newer Posts Older Posts Home

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ►  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ▼  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ▼  September (3)
      • ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये !! - पार...
      • God is bias.
      • मुस्कुराना तेरा
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com