ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Monday, May 14, 2012

भ्रष्टाचार का दानव !

 May 14, 2012     bhrastachar ka danav, leon, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, भ्रष्टाचार का दानव     1 comment   

मंदिर की सीढियों पे बैठे कुछ लोग बतिया रहे थे भ्रष्टाचार तो दानव का रूप लेते जा रहा है . मंदिर के अहाते में गमछा बिछा पंडी जी सबकी बाते सुन रहे थे. दानव का नाम सुनते हिन् उनके शिखा में स्पार्किंग हुई और वो सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गयी .पंडी जी के मन में पहला ख्याल आया - इस दानव का कुछ करना होगा, इससे निपटाना होगा .

दानव से कोई मानव निपट नहीं सकता, इसके लिए भगवन की हिन् शरण में जाना होगा.

अगले ही दिन पंडी जी ने मंदिर के श्याम पट्ट, जिसपे वे सूर्योदय कब होगा, सूर्यास्त कब होगा, एकादशी कब है, लिख के जनता को बताया करते थे, पे लिख के ऐलान किया की वे भ्रष्टाचार के दानव से निपटने के लिए हवन करने वाले हैं.

पंडित जी की सूचना जंगल के आग की तारा चारो तरफ फ़ैल गयी. लोग भ्रष्टाचार से निपटने के लिए चंदा भेजने लगे. लोगों में काफी जोश, उत्साह और एकता देखने को मिल रही थी. जो या तो इंडिया - पाकिस्तान क्रिकेट मैच के वक़्त दिखती है या लड़ाई के.

शाम तक मंदिर के दोनों दान पेटियों का पेट गले तक इस तरह से भर गया की अब वे डकार तक नहीं ले सकतीं थीं . पंडी जी मन ही मन खुश हुए अब तो इस दानव की खैर नहीं. अगले दिन तड़के ही पूजा पाठ शुरू करने केलिए, वे जल्दी ही विश्राम करने चले गए.

अगले दिन सुबह सो के उठने पे देखा , दान की एक ''पेटी" गायब है. पंडी जी ने अपना सर पिट लिया, परिणाम स्वरुप बाल रहित सर लाल हो गया.

   खैर जाने वालों का अफ़सोस नहीं किया जाता है, जितना होता है उसी में काम चलाया जाता है, हवन सामग्री लेन के लिए एक दल नियुक्त हुआ. और इस प्रकार हवन प्रारंभ हुआ. हवन में बहुत से लोगो ने बाद चढ़ के हिस्सा लिया. हवन सफलता पूरक संपन्न हुआ. 

   हवन के बाद, उसमे ख़रीदे गए सामान और उसमे खर्च किये गए पैसे की फेरहिस्त बनायीं जाने लगी. नौ का सामान नब्बे में आया देख के पंडी जी ऐसे खफा हुए जैसे ममता दीदी मनमोहन जी की सरकार से होतीं हैं. 

 पंडी जी सोंच रहे थे - "क्या इस भ्रष्टाचार के दानव से मानव लड़ सकता है?
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
Newer Post Older Post Home

1 comment:

  1. UnknownJune 23, 2012 at 2:00 AM

    first finish corruption in urself...

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
Add comment
Load more...

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ▼  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ▼  May (8)
      • प्रगतिशील सरकार की पहचान !
      • Suraj ki aag ugalati gami ka sadupayog
      • भ्रष्टाचार का दानव !
      • निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं ???
      • राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए
      • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो
      • धत तेरी की
      • गयी भैंस पानी में
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com