सावन की रात में पानी बरसता है, प्रियतम को मिलाने को मन तरसता है,
जोर जोर से बिजली कड़कती है, मेरी बायीं आँख भी फड़कती है,
दूर कहीं कुत्ता भौंकता है - भौंऊ भौं भौं भौं भौंऊ
मोहल्ले वाले घर से निकल के चिल्लाते हैं,
चोर चोर चोर पकड़ो पकड़ो पकड़ो
September 14, 2012
hasya, kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in
No comments
0 comments:
Post a Comment