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Friday, January 18, 2013

कोंग्रेस का चिंतन शिविर

 January 18, 2013     hasya, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, कोंग्रेस का चिंतन शिविर, व्यंग, हास्य     No comments   

कोंग्रेस का चिंतन शिविर जयपुर में चल रहा है। सभी चिंतित हैं। किसी को दो हजार चौदह के चुनाव की चिंता है तो किसी को राहुल गाँधी के अगले प्रधान मंत्री के तौर पर देखने की।  कोई माध्यम वर्ग के उपजे गुस्स्से से चिंतित है।  कोई भ्रष्टाचार की ग्रोथ रेट से। महिलाओं की सुरक्षा से भी चिंतित हैं , तो कोई देश की सरहद पे विदेशियों के अत्याचार से (कह नहीं सकते ये चिंता किसी ने की थी या नहीं ). 
मैं तो कहूँगा की चिंता कर के आप अपनी चतुराई को मत घटाइए . आपने सुना नहीं क्या। चिंता से चतुराई घटे दुःख से घटे शरीर .... या भी ये नहीं सुना क्या चिंता से आयु घटती है।
अरे घटाना है तो महंगाई घटाइए। रेप की घटनाओ को घटाइए। प्तेरोल का दाम घटाइए। गैस का दाम घटाइए। आप अपनी चतुराई और आयु  घटाने पर खामखाह तुले हुए हैं।  
 
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Saturday, January 5, 2013

स्वाद

 January 05, 2013     chai, hindi kavita., hindi poem, kavita, manu, manu shrivastav, poem, turkash, turkash.blogspot.in, स्वाद     No comments   


कांच के ग्लास से दिखती लाल या कत्थई तरल पदार्थ,
आँखों को बहुत हीं सुकून पहुंचती है।
ग्लास से निकलती भाप को,
नाको के पास ले जाकर,
उसकी खुशबु को सूंघना।
बहुत हीं समानता है, उसकी खुश्बू और
चायपत्ती के चबाने के स्वाद में।
फिर सुर्र्र्र्र्र से चुस्की, उसकी।
और तृप्ति भरी 'आssssह' का अहसास,
 कुछ हीं लोगो को महसूस होगा।
निम्बू के रस से उसके स्वाद में इजाफा होता है,
और बिना निम्बू के उसका स्वाद कितना आनंददायक होता है।
कभी 'रेड टी' बना के पिना और बताना।
ग्लास में रखा हर लाल तरल पैग नहीं होता।
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