आदि और अंत क्या , जब हर बात तेरे से शुरू होके तेरे पे ही ख़तम होती है.
क्या चिंता करें जीवन कि दुस्वारियो कि, मेरा भुत औ भविष्य भी तू है.
भूल गया मैं, इबादत खुदा कि , याद है, बस, अब तेरी ही इबादत ,
सांस लेना भूल जाऊ मैं एकबारगी, भूलू कैसे मैं तुझे?
तुझसे ही है मेरी जिंदगी , एक एक पल मैं जीयु तुझे!
हर कदम जो उठती है तेरी ओर , तुझे पाने के लिए,
तुझे पाना आसन है, बस भागीरथी प्रयाश करना है.
मेरा लक्ष्य.
तू ही मेरी माशूका , तू ही महत्वाकांक्षा !
क्या बात है..
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति मनु जी । शुभकामनाएं लिखते रहें
ReplyDeletedhanyabaad aap dono ka.
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