ये भी ठीक ही है

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Friday, October 22, 2010

आज बहुत सी लड़कियां जल रही हैं.

 October 22, 2010     aaj bahut se ladkiya jal rahi hain, dahej, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav     No comments   

तुमसे मैं  कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ  बताने से,
मैं बहुत कुछ कर सकता हु,
पर डरता हूँ ज़माने से.
                             
                                  क्या पता कही तुम्हारा भाई पहलवान  हो?
                                  पीछे पड़ जाये मेरी जान को ,
                                  वो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगे
                                 और मैं,  पुकारने लगु  भगवान को.

तुम्हारा बाप कुछ नहीं कहता है,
हर वक़्त मुझे घूरता रहता है,
मैं कौन हूँ , क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछता रहता है.

                                        तुम्हारी माँ बहुत अच्छी लगती है ,
                                        कुछ नहीं कहती है वो,
                                       काश ! वो तुम्हारी माँ नहीं होती,
                                       और मैं भी उनके उम्र का होता,

शादी तो मैं तुमसे ही करूँगा ,
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए,
टीवी कार  फ्रीज तो सभी  देते हैं,
इसके अलावा २ -४ लाख नगद चाहिए.

                                      कम दहेज़ में मेरी शादी हो गयी
                                      ये बात मुझे खल रही है,
                                       दहेज़ ही वो कारण है जिससे,
                                      आज बहुत सी लड़कियां  जल रही हैं.


करो कुछ ऐसा कि दहेज़ का धंधा बंद हो,
गरीब लडकियों के भी  जीवन में ख़ुशी हो, आनंद  हो.                                
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