ये भी ठीक ही है

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Saturday, June 18, 2011

मुझे जूता लेना है !

 June 18, 2011     bhaiya ji, BJP, congress, jokes, juta, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, politics, shoe     7 comments   

भईया जी, जूते की दुकान पे .- "मुझे जूता लेना है, लेटेस्ट डिजाइन दिखाओ !"
दुकानदार - "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मारने के लिए? "


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Tuesday, June 14, 2011

क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?

 June 14, 2011     aandolan, baba raamdev, bihar, bihari, delhi, facebook, humanity, manu shrivastav, manu srijan     11 comments   

फेसबुक पे एक ग्रुप में चर्चा करते हुए , मेरे मन में एक सवाल आया की क्या मानवता की भी कोई सीमा होता है?
क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है? मानवता को अंग्रेजी में  Humanity कहते हैं.. मुझे ह्युमनीटी इसलिए लिखना पड़ रहा है क्यों की ह्युमनीटी शब्द ज्यादा प्रचलित है. 

दो अलग अलग, मगर एक सामान घटनाओं पे उक्त महिला की मानवता अलग अलग थी. एक पे शुष्क तो दुसरे पे व्यथित. 

पहली घटना थी,दिल्ली में बाबा राम देव के पंडाल में पुलिस द्वारा निर्दोष जनता पे लाठी चार्ज . 
दूसरी घटना थी, बिहार के फारबिसगंज में पुलिस द्वारा निर्दोष जनता पे लाठी चार्ज . 

घटनाये दोनों एक जैसी हैं, पर उन महिला की भावनाएं अलग अलग थी. 

दूसरी घटना को वो अमानवीय करार दे रही थी, पुलिस की अमानवीय करवाई करार दे रही है थी.  तर्क ये था, की पुलिस महिलाओ और बच्चो को बड़े बेहरमी से पिट रही थी, सही तर्क था. इतनी बेरहमी से तो यहाँ जानवरों को भी नहीं पीटने का कानून है यहाँ. 

मगर पहली घटना पर उनके विचार थे की दिल्ली के रामलीला मैदान का आन्दोलन ढोंग था. 

सवाल ढोंग का नहीं है, सवाल है, यहाँ भी पुलिस के अमानवीय व्यव्हार का. यहाँ पे भी पुलिस ने लोगो को जानवरों सा पिटा, कई घायल हुए, कइयो की हालत इतनी नाजुक थी की उनको आई सी यु  में भर्ती किया गया . इक्यावन बर्सिया राज बाला  की हालत, आज दस दिन बाद भी नाजुक है. वो कोमा में हैं. इस घटना से उन महिला को कोई सहानुभूति नहीं थी.

ये कैसी मानवता है? जो क्षेत्रवादी है. शर्म आती है ऐसी मानवता पे . 


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बाबा का अनशन टुटा !

 June 14, 2011     baba ka anshan tuta, baba raamdev, bhrastachar, BJP, congress, corruptions, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

अपनी मांगे नहीं माने जाने तक अनशन की उदघोषणा करने वाले बाबा राम देव ने मात्र नौ दिन में ही अपना अनशन तोड़ दिया. बड़े ताज्जुब की बात है. अपनी आखिरी साँस तक लड़ने का दावा करने वाले बाबा. दो दो बार मौत के भय से अपने कदम पीछे कर लिए. 

अब ये बताने की कतई जरुरत नहीं है की पहली बार वे पुलिस के डंडे से चोट खाने के डर से बचने के लिए औरत के वेश धारण कर के भागे थे. अब अब उनकी भूख ने उनको मात दे दिया. फ्रंट फुट में सरकार को ललकारने की घोषणा करने वाले बाबा, अब खुद ही बैक फुट पे होते जा रहे हैं. 

आपकी तुलना भले अन्ना हजारे के साथ की जा रही हो. पर अन्ना के तुलना करने में आप कही भी खड़े नहीं होते हैं. अन्ना के पास दंभ नहीं है. ये बहुत ही बड़ी बात है. ऐसा नहीं है की आपको मांगे जायज़ नहीं है. पर आपके मांगो की लम्बी लिस्ट में कई सारी असंवैधानिक मांगे भी हैं. 

कानून बनाना आसान नहीं है और वैसे भी भारतीय संविधान इतना लचीला है की कानून के जान कार उसे तोड़मरोड़ कर अपनी मतलब की चीज़े निकाल लेते हैं. ऐसे ही भारतीय संविधान को वकीलों का स्वर्ग नहीं कहा जाता है.
हम आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. आप लम्बे समय तक हमे योग सिखाते रहें.
जिसका काम उसी को साज़े  अब इस तरह आपको ढोंगी बाबा बनाने की क्या जरुरत है, आप योगी बाबा ही अच्छे थे . 
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Sunday, June 12, 2011

भूखी जनता की चीत्कार

 June 12, 2011     anna hazare, baba raamdev, bhrastachar, bhukhi janta ki chitkar, BJP, congress, corruptions, hindi poem, manu shrivastav, manu srijan, poem, sarkar     1 comment   

ओ सत्ता के भूखों सुन लो, भूखी जनता की चीत्कार 
हमारा   मुद्दा   रोटी   है,   तुम्हारा   मुद्दा   भ्रष्टाचार .

प्रजातंत्र   बेचारी    की   ये   साड़ी  जो  तुम  खिंच  रहे  हो.
कितना खून निचोड़ोगे और देश के निचुड़े गुर्दे भींच रहे हो.
सुख  चुके  आँखों  के  आंसू  , बहते  थे  जो  बन  के  धार,
हमारा     मुद्दा     रोटी    है,     तुम्हारा    मुद्दा     भ्रष्टाचार .

राजनीती के चौपड़  पे तुम ये जो दाँव आपस में  खेल रहे हो,
क्या   बिगाड़ा   हमने   जो   तुम,   बारी   बारी   पेल   रहे  हो?
आरोपों  प्रत्यारोपों  का  जो  कर   रहे   हो    वार  पे  वार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा      भ्रष्टाचार .

सुख चूका आँखों का पानी,  गंगा जमुना के औलादों के,
नंग  धडंग  तांडव  कर  रहे ,  अब ये  वंशज  हैं  जल्लादों के 
गोरे काले धन के पीछे, क्यों छीन रहे सुखी रोटी अचार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा      भ्रष्टाचार

हम त्रस्त हैं, तुम भ्रष्ट हो, हम पस्त हैं, तुम मस्त हो,
हम लुट गए, तुम लूट गए , क्यों कोई तुमको कष्ट हो?
बस जान लो ए ज़ालिम बस बहुत हुआ ये अत्याचार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा   भ्रष्टाचार

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गर्ल फ्रेंड का अंतिम संस्कार !

 June 12, 2011     jokes, manu shrivastav, manu srijan, sms     1 comment   


गर्ल फ्रेंड का अंतिम संस्कार कर के लड़का अभी घर पे पहुँचा था की अचानक बिजली चमकी, तूफान आया और बादल गरजने लगे .

लड़का हँस के बोला-  लगता है, पहुँच  गयी 
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Thursday, June 9, 2011

एम एफ हुसैन नहीं रहे !

 June 09, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, MF husain nahi rahe     No comments   

एम एफ हुसैन एक बड़े आर्टिस्ट थे. पर जिस तरह का अपमान वे हिन्दू देवी देवताओ का करते रहे, जो असहनीय था ये उनकी सड़ी हुई मानसिक सोच थी.  और उनके इसी कुकृत्य के लिए देश से निर्वासन का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा था. जो बहुत सही था. उनकी अंतर रास्ट्रीय लोकप्रियता को देखते हुए,भले ही  ये कुटनीतिक बयान   दिया जा रहा हो, की वे एक अच्छे कलाकार थे. पर कलाकार किसी के भावनाओ को आहात नहीं करता है. सामाजिक रूप से कोई भी उनको महान कहता फिरे , पर वो एक सड़ी गली सोच के वाहक थे, और सोच से ही आदमी का चरित्र प्रतिबिंबित होता है .

प्रधान मंत्री का बयान निः संदेह हास्यास्पद है, की इससे रास्ट्र को क्षति हुई है. जो व्यक्ति भारतीय कानून से बचने के लिए किसी और मुल्क में जा छिपा हो, जो देश का नागरिक हो ही नहीं, उसके मरने से किस तरह की रास्ट्रीय क्षति  हुई?

परन्तु,  इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है. उनकी मौत से कला जगत को बहुत ही  क्षति  हुई है

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Wednesday, June 8, 2011

मिस इंडिया लागअ तारु ए गोरी !

 June 08, 2011     bhojpuri, manu shrivastav, manu srijan, miss india laga taru aye gori, video     No comments   






Miss India Laga taru aye gori

Singer - Ludu Diwana

Lyrics - Manu Shrivastav











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अब ढोंगी बाबा हो गए !!!

 June 08, 2011     aalekh, baba raamdev, congress, manu shrivastav, manu srijan, RSS, yogi baba ab dhongi baba ho gaye hain     9 comments   

बाबा की मानसिक स्थिति ख़राब हो चुकी है.
जो आदमी कुछ दिन पहले देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का झूठा सपना देश को दिखा रहा था.
अब वही आदमी देश में अपनी सेना के निर्माण की बात कर रहा है, ये तो 'हिटलर' की तरह खुद के महत्वा कांक्षा को पूरा करने जैसा है. 
योगी बाबा अब ढोंगी बाबा हो गए हैं ! 
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Tuesday, June 7, 2011

...एहिसे भैंस कहाली.

 June 07, 2011     ahise bhais kahali, bhojpuri, geet, manu shrivastav, manu srijan, हास्य     1 comment   

बहिना हई गईया के हो बैला के हई साली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

घास खाए हरिहर आ दूध देवे उजर,
सरसों के तेल नियन सु सु करे पियर,
दूध, दही, धी, माथा मिली, भैंस के ल तू पाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

झुमत चलेले आपन पूंछ हिलावत,
पीछे से टप टप  गोबर गिरावट.
जोखे खातिर तहरा के सिंघ पर उठाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली.  

भईस पे बैठी के  मिले जहाज के माज़ा,
देले   पटक   त   हो   जाला   हो   साजा, 
भईस जब चहेटे त लोग खुबे बजावे तली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

बिच सड़क पे बैठी खुबे पागुर करेले,
कतनो हटाई नहीं रहिया से हटेले,
पड़े न असर कतनो, चाहे बिन बजालीं 
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 






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ये कैसा सत्याग्रह था ?

 June 07, 2011     aalekh, baba raamdev, congress, corruptions, India, manu shrivastav, manu srijan, ye kaisa satyaagrah tha, yof     No comments   


शब्दों का जाल ऐसा होता है की आप अपने तर्क से सूरज को भी पश्चिम से उगा सकते हैं.

बाबा रामदेव के उस शिविर को सत्याग्रह की संज्ञा दी जा रही है तो सरकार के उस  कुकृत्य को जलियांवाला बाग़ की . 

सरकार को देश चलाना है, अब हर दिन कोई अनशन पे बैठ जाये और सरकार को झुकाए, ये तो सरासर गलत है.

माना की बाबा रामदेव ने मुद्दा सही उठाया था. पर तरीका तो सरासर गलत ही था. एक तरफ आप कहते हो इस आन्दोलन में ५००० लोग आयेंगे , दूसरी ताराग आपने इतना ताम झाम लगा रखा था की लाखो लोगो के आने पे भी सबको बैठने की, जल-मल की सुविधा मुहैया करा रखी थी.

जब आप सत्याग्रह ही कर रहे थे, तो पुलिस के बच के भागने की क्या जरुरत थी, क्या आपके मन में एक बार भी ये ख्याल नहीं आया, की जो लोग आपके बुलावे पे पता नहीं कहाँ कहाँ से चल के आये हैं. उनके साथ क्या होगा?

ये तो सरासर गैर जिम्मेदारी है आपकी की आपने अपने समर्थको को बिच में ही छोड़ के चुपचाप खिसक लिया.
आप सत्याग्रह कर रहे थे, तो आपको अपनी गिरफ्तारी देनी थी. नहीं की भाग निकलना था,  बाद में बयान देने के लिए की अपनी जान बचाने के लिए मैं भागा. 

आप सत्याग्रह चलाने की बात कर रहे हैं, आपको अपनी जान प्यारी थी, पर क्या उन लोगो के जान की कोई कीमत नहीं थी, जिनको  छोड़ के आप भाग गए थे.

और पुलिस आपको गिरफ्तार करती तो आपका कद और भी ऊँचा ही होता, आपके सत्याग्रह को और ताकत मिलती.

  सरकार से अपने मुद्दे मनवाने के लिए ही आन्दोलन था आपका और आप कह भी रहे थे की  सरकार ने आपकी ९९ प्रतिशत बात मान ली है. तो ऐसा था तो आपने अपना आन्दोलन रोका क्यों नहीं. इससे तो यही लगता है की आप अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते थे,  अपने योग भक्तो की आड़ में .

आप भले इसे सत्याग्रह कह लें, पर ये सत्याग्रह कही से भी नहीं था.

बाबा के असली मनसा के बारे में जानने के लिए पढ़े .डॉक्टर दुष्यंत जी का लेख
राम देव अन्ना नहीं हैं, और ना ही अब बाबा हैं


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Monday, June 6, 2011

लडल कब छोडिहन सन !

 June 06, 2011     bhojpuri, hasya, jokes, kutta, ladal kab chhodihan san, manu shrivastav, manu srijan, neta, sms     No comments   

दू गो जवान कुकुर के आपस में कुकुरहट करत देख के , बुजुर्ग कुकुरन के अपना नया पीढ़ी पे बहुत दुःख के साथ कहे के पडल - "इ ससुरा सन , नेतवन नियन लडल कब छोडिहन सन"
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Sunday, June 5, 2011

राम (देव) लीला !!!

 June 05, 2011     aalekh, bhartiya janta party, congress, corruptions, manu srijan, ramdev lila     14 comments   

पहले मैं बता दूँ की , यहाँ प्रयुक्त "लीला" शब्द . संज्ञा, नहीं क्रिया है . बाबा राम देव की  लीला.
बाबा राम देव को कौन नहीं जानता! भाई ! पूछ नहीं रहा हूँ, बता रहा हूँ की कौन नहीं जानता बाबा राम देव को ! जो नहीं जानते हैं, तो भैया जान लो . नहीं तो बाबा ने अगर ठान लिया तो , शीर्षासन करा के ही मानेंगे, जैसा की अभी केंद्र सरकार को करा रहे हैं. 

बाबा राम देव ने मुद्दा तो एकदम  सही उठाया है. मैं समर्थन  करता हूँ  की विदेशी बैंक से काले धन की वापसी होनी चाहिए. ये पैसा वापस आये तो तो देश की तरक्की के कामो में प्रयोग होगा.

 काले धन के वापसी के इस आन्दोलन पे कुछ लोग ऐसे तुनके मानो किसी ने उनके पूंछ में पैर रख दिया हो. किंग खान तो बोल दिए की वो बाबा के इस आन्दोलन का समर्थन नहीं करते हैं. सही है भाई, जो काम करने का मन न करे उसे करना ही नहीं चाहिए. 

वैसे भी ये हिंदुस्तान है, चीन थोड़े न है. यहाँ कुछ भी कह सकते हो, कर सकते हो, संविधान में लिखा है. यहाँ, हिंदुस्तान में जहा एक किताब की दुकान पे जहाँ एक तरफ तुलसी दास द्वारा रचित ग्रन्थ "राम चरित मानस" बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से बेचीं और खरीदी जाती है, तो उसी दुकान में दूसरी  तरफ विश्वनाथ द्वारा लिखी हुई किताब "हिन्दू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदास " भी बड़े चाव और शौख से बेचीं और खरीदी जाती है. 

अब सवाल ये है की सारा देश बाबा राम देव को समर्थन दे रहा है. इस भ्रष्टाचार विरोधी और देश का पैसा , देश में वापस लेन की मुहीम में तो, किंग खान को उन्हें समर्थन न देने की वजह क्या है? मेरे मन में ख्याल आ रहा था की कही ऐसा तो नहीं की किंग खान का पैसा भी बाहर में जमा हो. पर मैंने वो ख्याल आने नहीं दिया.

बाबा राम देव भी, योग करते-कराते, बोर हो गए थे. सोच रहे होंगे, योग तो जन जन तक पहुचने वाला है. उसके बाद क्या? उसके बाद योगा से क्या होगा? अभी यही सोच रहे थे की  अन्ना हजारे के आन्दोलन और उसकी आपार सफलता से  आइडिया क्लीक किया होगा - "आहा ! आइडिया !" 

अचानक  से कोई सूझ(आइडिया) दीमाग में आने के लिए , मनोविज्ञान में 'सूझ का सिद्धांत' दिया गया है.

अन्ना हजारे के पास साधन नहीं था . बाबा राम देव के पास साधन है , जिसका जम के प्रयोग किया है. टेंट लगवाए, लाउड स्पीकर लगवाए, पानी पिने, नहाने सब का प्रबंध किया है. सही है.

तैयारी देख के सरकार भी बैक फुट पे थी. दूध से जला , भला छाछ भी फूंक के ना पिए? यहाँ तो पूरा समंदर उफान मार रहा था. 

ज्यादातर, मंत्रीयों मान मनौवल होता है. "मंत्री जी, हमरा कामवा करवा दीजिये ना !" परन्तु यहाँ मंत्री जी योगी बाबा को मनाने में लगे थे. आम आदमी को ये दृश्य देख के कलेजे में ठंडक नहीं पहुची हो तो, वो आम आदमी नहीं है.

सरकार तो कई मांगे मांग चुकी थी. कुछ पे विचार करने का प्रस्ताव था. पर बाबा जी को तो पूरा माँगा मनवाना था. वे योग नहीं हठ योग पे जो थे. 

एक बात बताइए ! क़त्ल की सजा फाँसी मिलाने पर भी कैदी , अभी तक महामहिम से क्षमा याचना के फेर में पड़ा हुआ, ये सपने देख रहा हो की उसे माफ़ी मिल जाएगी. औरतो का बलात्कार कर के, उनकी इज्ज़त और सामाजिक जीवन की हत्या करने के बाद भी , लोग खुल्ले आम घुमाते हैं. देश के बाहर से आतंकवादी आके, देश में लोगो को मौत के घाट उतरते हैं. और उनकी फाँसी की सजा महामहिम में पास पेंडिंग पड़ी हुई है, और आप हर भ्रस्टाचारी को फाँसी की सजा दिलाने की बात कर रहे हैं .

अब हर भ्रष्टाचारी को फाँसी होने लगी तो , हर साल सैकड़ो लोगो को फाँसी की सजा सुनाई जाने लगेगी. और सबकी की क्षमा याचना महामहिम के पास जायेगी. अभी तक ३५ -४० याचिकाओ पे सुनवाई नहीं हुई है. आप तो, महामहिम पे और वर्क प्रेशर डालना चाहते हो !

अब सरकार कुछ मुद्दों के लिए समय मांग रही थी तो देना चाहिए था. हर सरकार की अपनी मजबूरियां होती हैं.सरकार की हालत तो आप खुद ही देख रहे हैं. अभी लोकपाल वाली घंटी ठीक से बंधी नहीं थी की एक और घंटी  गले में बंधने के लिए तैयार देख के तिलमिलाना स्वाभाविक है.  उपर से बाबा ने पुरे ताम झाम और लाव लश्कर के साथ सत्याग्रह शुरू किया था. जले पे नमक. बाबा के आन्दोलन को मिलती लोकप्रियता और समर्थन देख के  सरकार के सरे कश बल ढीले हो गए.  हकबकाई सरकार ने कदम उठा लिया , एक  गलत कदम.

इस तरह से उसने अपना ही पैर कुल्हाड़ी पे दे मारा. पर क्या लगता है? की सरकार में बैठे लोग इतने नासमझ हैं? इसमें जरुर कोई दूसरा पेंच है.

भाइयों ! इतने स्ट्रेस और टेंशन के बाद आइये , थोडा खुश हो लिया जाये. विपक्षी दलों के साथ.

बाबा रामदेब द्वारा जलाई गयी इस आन्दोलन के आंच में अगर कोई रोटियां सेंक रही है , तो वो है विपक्षी दल. भ्रस्थाचार और आंतरिक कलह से आकंठ डूबी विपक्ष, सरकार को इस मुद्दे पे इतनी ख़ुशी ख़ुशी घेरने में लगी है. मानो अंधे के हाथ बटेर लग गयी है.

सबसे सही स्तिथि तो हमारी है. हम आम लोगो की. हमारी स्तिथि में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आन्दोलन के पहले जो स्तिथि थी , वही अब भी है. बस संतोष इतना ही की कोई तो है, जो हमारे लिए बोल रहा है.

खैर, आरोप- प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, आगे आगे देखिये होता है क्या !!





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    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

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