अपनी मांगे नहीं माने जाने तक अनशन की उदघोषणा करने वाले बाबा राम देव ने मात्र नौ दिन में ही अपना अनशन तोड़ दिया. बड़े ताज्जुब की बात है. अपनी आखिरी साँस तक लड़ने का दावा करने वाले बाबा. दो दो बार मौत के भय से अपने कदम पीछे कर लिए.
अब ये बताने की कतई जरुरत नहीं है की पहली बार वे पुलिस के डंडे से चोट खाने के डर से बचने के लिए औरत के वेश धारण कर के भागे थे. अब अब उनकी भूख ने उनको मात दे दिया. फ्रंट फुट में सरकार को ललकारने की घोषणा करने वाले बाबा, अब खुद ही बैक फुट पे होते जा रहे हैं.
आपकी तुलना भले अन्ना हजारे के साथ की जा रही हो. पर अन्ना के तुलना करने में आप कही भी खड़े नहीं होते हैं. अन्ना के पास दंभ नहीं है. ये बहुत ही बड़ी बात है. ऐसा नहीं है की आपको मांगे जायज़ नहीं है. पर आपके मांगो की लम्बी लिस्ट में कई सारी असंवैधानिक मांगे भी हैं.
कानून बनाना आसान नहीं है और वैसे भी भारतीय संविधान इतना लचीला है की कानून के जान कार उसे तोड़मरोड़ कर अपनी मतलब की चीज़े निकाल लेते हैं. ऐसे ही भारतीय संविधान को वकीलों का स्वर्ग नहीं कहा जाता है.
हम आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. आप लम्बे समय तक हमे योग सिखाते रहें.
जिसका काम उसी को साज़े अब इस तरह आपको ढोंगी बाबा बनाने की क्या जरुरत है, आप योगी बाबा ही अच्छे थे .
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