एम एफ हुसैन एक बड़े आर्टिस्ट थे. पर जिस तरह का अपमान वे हिन्दू देवी देवताओ का करते रहे, जो असहनीय था ये उनकी सड़ी हुई मानसिक सोच थी. और उनके इसी कुकृत्य के लिए देश से निर्वासन का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा था. जो बहुत सही था. उनकी अंतर रास्ट्रीय लोकप्रियता को देखते हुए,भले ही ये कुटनीतिक बयान दिया जा रहा हो, की वे एक अच्छे कलाकार थे. पर कलाकार किसी के भावनाओ को आहात नहीं करता है. सामाजिक रूप से कोई भी उनको महान कहता फिरे , पर वो एक सड़ी गली सोच के वाहक थे, और सोच से ही आदमी का चरित्र प्रतिबिंबित होता है .
प्रधान मंत्री का बयान निः संदेह हास्यास्पद है, की इससे रास्ट्र को क्षति हुई है. जो व्यक्ति भारतीय कानून से बचने के लिए किसी और मुल्क में जा छिपा हो, जो देश का नागरिक हो ही नहीं, उसके मरने से किस तरह की रास्ट्रीय क्षति हुई?
परन्तु, इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है. उनकी मौत से कला जगत को बहुत ही क्षति हुई है
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