शब्दों का जाल ऐसा होता है की आप अपने तर्क से सूरज को भी पश्चिम से उगा सकते हैं.
बाबा रामदेव के उस शिविर को सत्याग्रह की संज्ञा दी जा रही है तो सरकार के उस कुकृत्य को जलियांवाला बाग़ की .
सरकार को देश चलाना है, अब हर दिन कोई अनशन पे बैठ जाये और सरकार को झुकाए, ये तो सरासर गलत है.
माना की बाबा रामदेव ने मुद्दा सही उठाया था. पर तरीका तो सरासर गलत ही था. एक तरफ आप कहते हो इस आन्दोलन में ५००० लोग आयेंगे , दूसरी ताराग आपने इतना ताम झाम लगा रखा था की लाखो लोगो के आने पे भी सबको बैठने की, जल-मल की सुविधा मुहैया करा रखी थी.
जब आप सत्याग्रह ही कर रहे थे, तो पुलिस के बच के भागने की क्या जरुरत थी, क्या आपके मन में एक बार भी ये ख्याल नहीं आया, की जो लोग आपके बुलावे पे पता नहीं कहाँ कहाँ से चल के आये हैं. उनके साथ क्या होगा?
ये तो सरासर गैर जिम्मेदारी है आपकी की आपने अपने समर्थको को बिच में ही छोड़ के चुपचाप खिसक लिया.
आप सत्याग्रह कर रहे थे, तो आपको अपनी गिरफ्तारी देनी थी. नहीं की भाग निकलना था, बाद में बयान देने के लिए की अपनी जान बचाने के लिए मैं भागा.
आप सत्याग्रह चलाने की बात कर रहे हैं, आपको अपनी जान प्यारी थी, पर क्या उन लोगो के जान की कोई कीमत नहीं थी, जिनको छोड़ के आप भाग गए थे.
और पुलिस आपको गिरफ्तार करती तो आपका कद और भी ऊँचा ही होता, आपके सत्याग्रह को और ताकत मिलती.
सरकार से अपने मुद्दे मनवाने के लिए ही आन्दोलन था आपका और आप कह भी रहे थे की सरकार ने आपकी ९९ प्रतिशत बात मान ली है. तो ऐसा था तो आपने अपना आन्दोलन रोका क्यों नहीं. इससे तो यही लगता है की आप अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते थे, अपने योग भक्तो की आड़ में .
आप भले इसे सत्याग्रह कह लें, पर ये सत्याग्रह कही से भी नहीं था.
बाबा के असली मनसा के बारे में जानने के लिए पढ़े .डॉक्टर दुष्यंत जी का लेख
बाबा के असली मनसा के बारे में जानने के लिए पढ़े .डॉक्टर दुष्यंत जी का लेख
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