राम लाल मोहल्ले में पानी की बहुत किल्लत है. लगभग सारे चापाकल सुख चुके हैं. या यूँ कहें की सारे झारखण्ड का यही हाल है. खबरों की माने तो राजधानी दिल्ली में भी पानी की मारामारी है. खैर दुसरे की फटे में टांग अड़ाने की बजाय रामलाल के मोहल्ले की बात करते हैं.
पानी के किल्लत से परेशान होके राम लाल जल विभाग गए. वहां किसी ने सलाह दी, 'डीप' बोरिंग करा लो समस्या दूर हो जाएगी. रामलाल लग गए बोरिंग करने. बिहार में तो बीस फूट पे ही पानी आने लगता है, परन्तु झारखण्ड अस्सी फीट के पहले तो केवल पत्थर ही आते हैं.
अस्सी फीट पे पानी आया. राम लाल बोले थोडा और डीप करो.
थोडा और डीप करने पे लौह अयस्क निकलने लगा.
राम लाल बोले थोडा और डीप करो. फिर कोयला निकला. राम लाल नहीं माने बोले थोडा और डीप करो.
फिर पाइप से एक कमल का प्रिंट हुआ दुशाला निकला, राम लाल सोंचे पाइप अन्दर हीं अन्दर मुड के कर्णाटक के कोयला खदान तो नहीं पहुँच गयी.
थोडा और डीप किया गया पाइप को. अब तो उसमे से सों सों कर के हवा निकालने लगी. राम लाल घबडाये ये क्या हुआ.
एक पढ़े लिखे ने समझाया - हवा तो हर जगह मौजूद है, धरती के अन्दर कोई जगह खली होगा, वह हवा मौजूद होगी.
राम लाल पाइप में मुंह लगा के हल्लो हल्लो बोलने लगे इस उम्मीद में की उधर से कोई "पानी का प्रवक्ता" कोई बयान दे की हां है पानी और डीप करवा लो.
काफी देर हल्लो हल्लो करने के बाद कोई कोई बोला नहीं अन्दर से तो राम लाल सोंचे की हवा का क्या करना है? पाइप को ऊपर खिचवा लेता हूँ.
पाइप को वापस खिंचवाया जहाँ से पानी आने लगा वही पाइप सेट करवा दिया.
पानी आ गयी थी, ज़मीं से निकाला हुआ ताज़ा पानी एक ग्लास में ले के गटक गए. लौह अयस्को से मिश्रित पिने के अयोग्य पानी कलेजे को चीरती पेट में पहुंची. पर राम लाल को ख़ुशी थी की पानी की समस्या का समाधान हो गया.
फुरसत पा के टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज देखने बैठे.
न्यूज आ रहा था. अमेरिका में पताली एलियन का हमला. एक दो फूट चौड़ी पाइप जैसी नली ज़मीं के अन्दर से निकली. उसमे में तरह तरह की आवाजें आ रही थीं. थोड़ी देर के बाद वह वापस ज़मीन के अन्दर वापस चली गयीं. विशेषज्ञों का मानना है की वो निरिक्षण करने आये थे. उनकी योजना शायद धरती पे हमला करने की हो सकती हैं.
वाह, अंत बहुत अच्छा है।
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