ये भी ठीक ही है

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Tuesday, July 31, 2012

हम भीड़ हैं ?

 July 31, 2012     anna hazare, arvind kejariwal, bharat, bhartiya janta party, congress, corruptions, hindustan, India, janta bhid hai, jantar mantar, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     2 comments   

टीम अन्ना जिस तरह से गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य देती आई है, वो किसी भी कोण से काबिल-ए-तारीफ नहीं है. आन्दोलन में शामिल होने वाली भारतीय जनता को टीम अन्ना द्वारा "भीड़" कहना, बहुत ही निंदनीय और अशोभनीय है. देश की जनता हर कोने से आपको अपना सहयोह और समर्थन कर रही है, और आप की नज़र में वो सिर्फ भीड़ है. लो लानत है हमें आपको समर्थन करने पर.
मुझे ऐसा लग रहा है की जनलोकपाल को लेकर होने वाला आन्दोलन, अब देश का आन्दोलन न रह कर, टीम अन्ना का आन्दोलन रह गया है. साथ हीं ये भी महसूस हो रहा है की ये अब खुद के तुस्टीकरण के लिए चलाया जा रहा है. आन्दोलन अपनी पवित्रता खोकर बयानबाज़ी और फोकसबाज़ी तक सिमित होती जा रही है. जब आप अपनी टीम के सदस्यों को एकजुट नहीं रख सकते, तो देश की जनता को एक जुट रखने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं. 
टीम अन्ना का एक सदस्य कुछ बोल रहा है तो दूसरा कुछ और बोल रहा है. हाथ की पांचो उंगलियाँ बराबर नहीं होती हैं या पांच लोगों के विचार एक से नहीं होते हैं. इस कथन की ओट में आप छिप नहीं सकते हैं. क्यों की ना तो आप उँगलियों का जीवविज्ञान पढ़ा रहे हैं और ना हीं लोगो की सोंच का मनोविज्ञान. आप एक कानून बनाने के लिए आन्दोलन कर रहें हैं, जो आने वाले अनंत वर्षों के लिए देश की दशा और दिशा तय करेगा. तो क्या पहले आपको अपनी सोंच एक नहीं करनी चाहिए?
अगर आपको लगता है की आन्दोलन में पहुँचने वाली जनता भीड़ है तो आप गलत सोंच रहे हैं. और अगर आप मानते हैं की आपकी सोंच सही है तो आप कोई राजा रामचंद्र नहीं हैं की आपके एक आह्वान पे सारे लोग लंका में कूद जांयें. 
अहिंसा किसी को लाठी मारने या जान से मार देने को हीं नहीं कहते हैं. आपकी बात किसी को आहत करे तो, वो भी हिंसा हीं है. तो फिर किस आधार पर आप आन्दोलन को अहिंसक बता रहे हैं.
टीम अन्ना के इस वक्तव्य से जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुचती हैं, मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची हैं. मैं कोई भीड़ नहीं हूँ, अतः मैं इस आन्दोलन का समर्थन करना बंद करता हूँ.
टीम अन्ना को अपने वक्तव्य के लिए जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए. क्यों की टीम अन्ना के एक सदस्य के लहजे में ही बोले तो ये उनको खुद सोचना है की उनको भीड़ का साथ चाहिए या जनता का. 
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Saturday, July 28, 2012

हाथी उड़, चिड़िया उड़, करप्शन उड़

 July 28, 2012     corruptions, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     2 comments   

इस कहानी की पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं.

पसीने वाली खुजली जब हो जाती है तो जाने का नाम नहीं लेती है. चाहे कुछ भी लगा लो. फिर दुबारा पसीना हुआ और खुजली चालू. भ्रष्टाचार भी ठीक पसीने की खुजली की तरह ही है. जाने का नाम नही लेती.

लेकिन गोविन्द, मोहनीश, सुशांत, और सुमन ने कसम खायी थी की भ्रष्टाचार को ख़त्म कर के हीं मानेंगे. चाहे इसके लिए जो करना पड़े, आर पार की लड़ाई लड़ेंगे. चारो मिल के एक साथ भ्रष्टाचार से लोहा ले रहे थे. एक साथ काम करते करते गोविन्द कब टीम को लीड करने लगे, किसी को भी पता नहीं चला. 

लगभग साठ सालों से चली आ रही भ्रष्टाचार को मिटाने के दावे के साथ, भ्रस्ताचार से लड़ना आसान नहीं होता है. लेकिन साथ वर्षीय भ्रष्टाचार भी कोई छोटी मोती हस्ती नहीं थी की कोई चुटकी बजा के उसकी हस्ती मिटा दे.

भ्रष्टाचार को भी अपने पे गर्व था. आज़ादी के साथ साथ ही उसका जन्म हुआ था. मानो, उसके पहले भ्रष्टाचार का न कोई अस्तित्व था , न कोई नामोंनिशान. 

जैसे साठ साल के बाद नेताओं का कैरियर अपने चरम पे होता है. अच्छे अच्छे मंत्री पद मिलते हैं. ठीक वैसे ही साठ वर्षीय भ्रष्टाचार की जवानी अपने चरम पे थी.

लेकिन चारों ने हिम्मत नहीं हारी "रघुकुल रित सदा चली आई, प्राण जाये पर वचन न जाई " के उच्चारण के साथ उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन की घोषणा कर दी और बैठ गए जंतर मंतर पर.

कई आन्दोलनों का गवाह बना जंतर मंतर भी ये सोच रहा था की कोई आन्दोलन "उसके" लिए भी होगा, जो उसे मरणासन्न हालत से बाहर निकालेगा. जंतर मंतर के इस मानसिक स्थिति को भ्रष्टाचार में भांप लिया. वो ठठा कर हसंते हुए बोला - भले उम्र में मेरे से तुम बड़े हो. लेकिन अभी देश की सबसे बड़ी समस्या मैं हूँ मेरे से ध्यान हटे, तब तो इन "छोटे मोटे" समस्याओं के तरफ ध्यान जाये किसी का. तुम अपने अंतिम यात्रा की तैयारी कर लो. तुम्हारे पे तो किसी का ध्यान है नहीं, तुम्हरा अस्तित्व ख़त्म होने के बाद, न जंतर मंतर होगा, न लोग यहाँ धरना करेंगे, और नहीं मेरा नाश होगा. और ना मेरा नाश होगा और न लोग बाकि के समस्याओं पे ध्यान देंगे.

जंतर मंतर और भ्रष्टाचार के इस आपसी द्वन्द से अनजान चारो लोग अनशन पे बैठे थे. और टाइम पास के लिए उन्होंने कौवा उड़ चिड़िया उड़ खेलना शुरू किया. 

गोविन्द जी टीम लीड थे, उन्होंने सबको खेलाना शुरू किया. कउवा उड़, सबने अपनी अपनी उंगली हवा में उठा दी. फिर उन्होंने कहा- मचली उड़, किसी ने अपनी उंगली नहीं उठाई. खेल आगे जारी हुआ.

गोविन्द जी बोले- कमल उड़. सबने ऊँगली उठा दी. कारण पिछले आठ साल से तो उड़ा ही हुआ है आखिर.
गोविन्द जी ने खेल आगे बढ़ाये, बोले - हाथ उड़. सबने फिर उंगली उठा थी. सोंचा होगा अगली चुनाव में उड़ जाये शायद. 

फिर गोविन्द जी ने कहा- हाथी उड़. किसी ने उंगली नहीं उठाई, सिवाय गोविन्द जी के. अब खेल के नियम के मुताबिक गोविन्द जी को अपना हाथ आगे कर के मार खानी थी. सब कहने लगे, पहले मैं मारूंगा, पहले मैं मारूंगा. 

गोविन्द जी ने आँख तरेरी - मुझे मारोगे? मैं टीम लीड हूँ टीम से बाहर कर दूंगा. सारे चुप हो गये. खेल फिर जारी हुआ.

अनशन पर साथ में बैठे कुछ और लोगों ने भी खेल में शामिल होने के लिए अपनी उंगली आके कर दी. गोविन्द जी बोले - साईकिल उड़. इस बार भी गोविन्द जी को छोड़ कर किसी और ने उंगली नहीं उठाई. 

इस पर एक खिलाडी ने आपत्ति कर दी - ये तो गलत है. या तो हाथी उड़ेगी या फिर साईकिल. आप हाथी और साईकिल एक साथ नहीं उड़ा सकते.

उस खिलाडी की बात गोविन्द जी को नागवार गुजरी, और उस खिलाडी को खेल से हटा दिया. 

अबकी बार गोविन्द जी बोले - करप्शन उड़. किसी ने उंगली नहीं उठाई.

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Tuesday, July 24, 2012

खुजली और गोलगप्पा

 July 24, 2012     khujali aur golgappa, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

खुजली और गोलगप्पा में बहुत समानता है. या यूँ कहें की गोलगप्पा और खुजली में बहुत समानता है.

खुजली दो तरह की होती है. एक पसीने वाली खुजली. जिसे "कलकल" भी कहते हैं. जो भीगी भीगी सी होती हैं. गीली गीली सी . खुजाते रहो और आनंद प्राप्त करते रहो. वैसे ही गोलगप्पा, जो पानी में डुबो डुबो के खाओ और आनंद को प्राप्त करो 

दूसरी सुखी खुजली होती है. बस खुजाते रहो और आनंदित होते रहो. और गोलगप्पा का सुखा हुआ रूप, जिसे लोग पापड़ी कहते हैं.
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Sunday, July 15, 2012

कौन है जिम्मेदार ?

 July 15, 2012     manu shrivastav, turkash.blogspot.in     2 comments   

Jamshedpur se prakashit

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Friday, July 13, 2012

............ आज़ादी...........

 July 13, 2012     No comments   

           







कुछ उदासी कुछ ख़ुशी कुछ नमी हैं इन आँखों में.....  
कहीं खुशबू की लहर तोह कहीं गमी है पटाखों में.......
दीये जलते रहते हैं पास मेरे हर रोज़ हर शाम....
दम ढूँढती रहती हूँ उन चार कंधों में.......
जो मुझे आज़ाद करदें मेरी चिता की राखों में......
पानी में बहकर मुझे भी खुद को धोना है.....
पत्थरों से टकराए बिना मुझे भी पिरोना है....
वोह प्यार वोह मोहब्बत जो मुमकिन न थे....
वोह किसी अपने का साथ पाकर चैन से मुझे सोना है.....
जब उठून तोह सुकून भरी सांस लेकर कह सकूँ....
कि न दुनिया की मार न तानो का तिकोना है....      
यहाँ सिर्फ और सिर्फ मिटटी का पुतला ही खिलौना है...
जहाँ हर छत क नीचे प्यार का बिछौना है...
और नफरत का वास नहीं सिर्फ नफरत का गौना है....
बस प्यार के ही फूल लगें पेड़ों की दालों में....
अब उन्ही फूलों को एक प्यार की माला में पिरोना है...
और इसी माला क साथ मुझे बिदा होना है....
बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो इन आँखों में....
बस खुशबु की लहर और दिवाली हो पटाखों में....
सिर्फ वोही चार काँधे चाहियें....
जो आज़ाद करदें मुझे मेरी चिता की राखों में....


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Wednesday, July 11, 2012

स्वर्ग की तुझको देवी कह के

 July 11, 2012     kavita, manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   


आसमान में लाखों तारे
जगमग जगमग करते सारे
चुन चुन के सब दे दूँ तुझको
बोल तुझे हैं कौन से प्यारे.
आ सजा दूँ तेरे बदन पे इनको
झिलमिल झिलमिल ये नज़ारे.
स्वर्ग की तुझको देवी कह के
वंदन करता सांझ सकारे

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Tuesday, July 10, 2012

हुनर न था

 July 10, 2012     hunar na tha., kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

तेरी यादो में तड़पते रहें ता उम्र इस कदर,
तेरी यादों के सहारे जीने का हुनर न था,
इतराते रहे प्यार को अपनी तेरे आँखों में देख कर,
दिल के गहराई में उतरने का हुनर न था,
खुदा से पाक थी मोहब्बत तेरी,
मोहब्बत में सजदे का हुनर न था, 
मरता रहा 'मनु' तेरी हर अदा पे,
तेरी अदाओं को जीने का हुनर न था 
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Sunday, July 8, 2012

कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की मज़बूरी

 July 08, 2012     bharat, kasab, manu shrivastav, pakistan, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की भारत की अपनी मज़बूरी हो सकती हैं. मसलन सबरजीत का पाकिस्तान की जेल में कैद होना, जिस तरह पाकिस्तान सबरजीत को पाकिस्तान में हुए बम धमाके का दोषी मानते हुए उसे फांसी सुनाने के बाद भी उसे फांसी नहीं दे रहा है. उसका ये ही कदम शायद कसाब को या अफज़ल को फाँसी के फंदे तक पहुँचने से रोक रही है.
 वैसे ये जगविदित है की पाकिस्तान में सरबजीत को झूठा गया फसाया है और कसाब ने खुलेआम सारी दुनिया के सामने भारत में भारतीयों को मारा है. सरकार को चाहिए की कसाब को फांसी दे और सबरजीत को छुडाये. 
लेकिन ये कूटनीति बहुत टेडी चीज़ होती है. कुछ कठोर कदम उठाने हीं नहीं देती.
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Saturday, July 7, 2012

Aaram

 July 07, 2012     No comments   


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google sab janata hai

 July 07, 2012     manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   


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Friday, July 6, 2012

कोई हेल्प करेगा

 July 06, 2012     jokes, koi help karega, manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   

नागिन सोंच में पड़ गयी की क्या बताऊ, जब नाग ने उससे पूछा - ओये तुम्हारा फिगर क्या है ?

कोई उसकी हेल्प करेगा प्लीज !
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