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Tuesday, July 10, 2012

हुनर न था

 July 10, 2012     hunar na tha., kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

तेरी यादो में तड़पते रहें ता उम्र इस कदर,
तेरी यादों के सहारे जीने का हुनर न था,
इतराते रहे प्यार को अपनी तेरे आँखों में देख कर,
दिल के गहराई में उतरने का हुनर न था,
खुदा से पाक थी मोहब्बत तेरी,
मोहब्बत में सजदे का हुनर न था, 
मरता रहा 'मनु' तेरी हर अदा पे,
तेरी अदाओं को जीने का हुनर न था 
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1 comment:

  1. sushma 'आहुति'July 25, 2012 at 7:23 AM

    behtreen andaaz.....

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