वो,
ठुनकते हैं,
मचलते हैं,
जिद करते हैं,
लड़ते हैं,
मुस्कुराते हैं,
फिर खिलखिलाते हैं,
नादान हैं,
बच्चे हैं,
सिख जायेंगे,
दुनियादारी क्या है?
इसका कोई,
गुरुकुल नहीं,
इसका कोई,
आचार्य नहीं,
ये कोई,
हौवा नहीं,
अकल बढती है,
समझ बढती है,
फिर आ जाता है,
सलीका,
हर चीज़ का।
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