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Sunday, July 7, 2013

एक रूपया

 July 07, 2013     dollar, ek rupaya, hasya, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, व्यंग्य, हास्य     No comments   

एक रूपया कितना मूल्यवान है, ये उन्ही को पता है जिन्हें एक रुपये की जरुरत पड़ती है. मसलन अगर किसी शुभ कार्य में न्योता करना हो, तो एक रुपये की दरकार पड़ती हीं पड़ती है. अब दूसरी तरफ , आप कोई ब्रांडेड सामान खरीदने जा रहे  हैं, को आपको हर सामान का मूल्य एक रुपया कम कर के लिखा मिलेगा। 
अब अपने शहर जमशेदपुर को हीं ले लीजिये,  टेम्पू किराया में बढ़ोतरी के बाद जब विरोध हुआ ,तो कुछ ऑटो वाले भाइयों ने किराया पुनः कम कर दिया, मगर कुछ ने एक रुपया रुपया बढ़ाये रखा है. अब एक रुपये की महिमा है हि निराली क्या कीजियेगा? बस अब यात्रियों को थोडा मसक्कत करना होगा, ऑटो ढुढने  मे, किस ऑटो में बैठे की एक रूपया कम देना पड़े और किस्मे बैठने में  एक रूपया ज्यादा देना पडेगा। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रस्ताचार, और जीवन के भागमभाग के बिच , ये एक और समस्या बढ़ गयी। 
रुपये पैसे के लिए बहुत सी लड़ाईयां लड़ी गयी हैं, पर अब तो हर गली -चौराहे पर एक रुपये की लड़ाई लड़ी जाती है. वो वाली लड़ाई नहीं जिसने तीर तलवार की जरुरत हो, इसमें सिर्फ बत्तगुजन होता है. 
किसी को किराया देना है, और उसके पास एक रुपये छुट्टे नहीं हैं, अब बिना पूरा किराया दिए वो जा नहीं सकता और बिना पूरा किराया लिए कोई उसे जाने नहीं देगा. फिर क्या, आपको अपनि जेब के हर कोने को टटोलना होगा, कहीं से तो निकले ये कमबख्त एक रुपया। और जब आप पूरा मन लगा कर ढूढीयेगा तो किसी न किसी जेब से एक रुपया तो निकल हीं आएगा।  और ये किसी खजाने से कम नहीं होगा. उसे थामने वाला हाथ कांप ही जायेगा, अगर सही से उस रुपये को नहीं पकड़ा तो , रुपये का हाथ से छुट कर गिर जाने से कौन रोक सकता है. रूपया तो लक्ष्मी होता है, चालक भाई साब उसे गिरने से बचाने की पुरजोर कोशिश कर सकते हैं, इस क्रम में वो खुद गिरते गिरते रह जायेङ्गे. पर सवाल है, की रुपये को कहाँ कहाँ गिरने से बचायेंगे,  रूपया तो हर जगह गिर रहा है. रुपये के लिए इंसान गिर रहा है. उतराखंड में को हीं  लेते हैं,वह इतनी भयानक आपदा आई है, इस त्रासदी से देशदुनिया हिल गयी है. पर कुछ के दिल जरा भी नहीं हिले, आपदा ग्रस्त लोगो से जीवनोपयोगी चीजों को दुगुने तिगुने दामों पर बेचते हुये, कुछ के जमीर तक नहीं हिले, शव से गहने और रुपये चुराते हुये. 
उनके लिए मानो एक हीं मंत्र था, बाप बड़ा ना भईया , भईया सबसे बड़ा रुपया। शायद उनको डॉलर के बारे में ना पता हो, जिसने सामने रूपया भी गिर रहा है, रोज़ एक रुपया कर के. 
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