ये भी ठीक ही है

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Wednesday, June 8, 2011

अब ढोंगी बाबा हो गए !!!

 June 08, 2011     aalekh, baba raamdev, congress, manu shrivastav, manu srijan, RSS, yogi baba ab dhongi baba ho gaye hain     9 comments   

बाबा की मानसिक स्थिति ख़राब हो चुकी है.
जो आदमी कुछ दिन पहले देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का झूठा सपना देश को दिखा रहा था.
अब वही आदमी देश में अपनी सेना के निर्माण की बात कर रहा है, ये तो 'हिटलर' की तरह खुद के महत्वा कांक्षा को पूरा करने जैसा है. 
योगी बाबा अब ढोंगी बाबा हो गए हैं ! 
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9 comments:

  1. abhimanyuJune 8, 2011 at 11:46 AM

    बाबा राम देव योग स्वस्थ रहने के लिए सिखाते है, न की लड़ने के लिए ! आप ही बताएं कि अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किस प्रकार किया जाता है? इतिहास गवाह है की जब जब संघर्ष हुआ है , तब तब लहू जरूर बहा है ! वैसे भी नेताओ ने कौन सा जनता का खून कम चूसा है ! बचा कुचा अगर इस देश के भलाई के लिए काम आ जाये तो परवाह नहीं! मैं ये नहीं कहता की ये अच्छा होगा या बुरा, लेकिन सबक सभी नेताओ के लिए होगा! ताकि उनको ये पता चले की अपने हक के लिए जनता कुछ भी कर सकती है! बाबा का खाली ये मुद्दा नहीं है की काला धन देश में लाया जाए बल्कि प्रधान मंत्री का चुनाव सीधा जनता द्वारा किया जाए! अगर कोई जानवरों की तरह जीना पसंद करता हो तो करे, लेकिन स्वाभिमानी व्यक्ति ये हरगिज बर्दाश्त नहीं करेगा !! जय हिंद .

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  2. manu shrivastavJune 8, 2011 at 10:15 PM

    आपका आक्रोश बहुत जायज़ है, काले धन के खिलाफ लड़ाई में हर कोई एक तरफ है, पर ये कैसा आन्दोलन था जिसमे खुद आन्दोलन का अगुवाई करने वाला, आन्दोलन कारियों को छोड़ के मैदान छोड़ के बाग़ खड़ा होता है.
    ये कैसे देश भक्ति है, की देश के संविधान के खिलाफ, खुद के लिए सेना बनाने की मनसा है. ये देश भक्ति नहीं, देश को अपने शक्ति प्रदर्शन को जिद है. जो की गलत है, रामदेव के आन्दोलन का मुद्दा अब न जाने कब का, कहा छुट चूका है.
    अब बाबा रामदेव अपने अहंकार की तुस्टी के लिए प्रयास रत हैं

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  3. निर्मला कपिलाJune 9, 2011 at 12:04 AM

    बिलकुल सही कहा। खुद को सन्यासी कहने वाले बाबा को सियासत की मेनका ने भ्रमित कर रखा है। साथ मे बम्गाली पिज़ा खाते खाते बाबा हिंसक हो गये शायद अनुलोम विलोम अधिक हो गया उल्ता असर तो होना ही था।

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  4. abhimanyuJune 9, 2011 at 12:44 PM

    बाबा कभी नहीं भागे, अगर बाबा को भागना होता तो शयद किसी को नहीं पता चलता! लेकिन बाबा ने अपने आपको को सरकार द्वारा बिकी हुयी दिल्ली पुलिस को आत्म समर्पण इसीलिए किया ताकि दिल्ली पुलिस उन मासूम जनता पर अत्याचार न करे, जो की किसी को नहीं पता था की सोते हुए आदमी औरतो और बच्चो को इस तरह पीटा जायेगा! ये देख कर बाबा ने अपनी गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस को दी ! ताकि उन मासूमो पर अत्याचार बंद हो जाए ! अगर बाबा को को अकेले ही सब को छोड़ के भागना होता तो शायद दिल्ली पुलिस के हाथ भी न आते!

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  5. abhimanyuJune 9, 2011 at 12:53 PM

    बाबा ने ये सत्याग्रह आन्दोलन किसी कुशल राजनीतिग्य की तरह न करते हुए एक आम जनता की तरह किया था, मैं कहता हूँ की दिल मैं तो सभी जज्बात रखते है, लेकिन लाखो की भीड़ में कोई अगुवाई के लिए खड़ा नहीं होता, लेकिन बाबा ने ये साहस दिखया है! हमें इनका सम्मान करना चाहिए , अगर इनका अपमान किया तो भविष्य मैं कोई भी अपने अपमान के डर से जनता की मदद के लिए आगे नहीं आएगा!!

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  6. abhimanyuJune 9, 2011 at 1:06 PM

    आज की जनता भेंड़ बकरियों की तरह हो गयी है, कोई भी आगे चलने का साहस नहीं करना चाहता, सब एक दुसरे के पीछे चलना चाहते है!!!! जिसने आगे आने की हिम्मत दिखाई है , वो है बाबा रामदेव !! आज भी हमारे पास मतदान के दिन ५ या १० या उस से भी अधिक राजनीतिक पार्टिया होती है, हमें पता है की हमें तो लुटना सबसे है , फिर भी हम वोट देते है!!!! क्यों ????
    यही बाबा रामदेव बदलना चाहते है, की हम किसी पार्टी को वोट देने की बजाये सीधा माननीय प्रधान मंत्री के लिए वोट करे! ताकि माननीय प्रधान मंत्री किसी पार्टियों के दवाब में न आकर जनता की भलाई के लिए कोई सार्थक कदम उठा सके!!

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  7. abhimanyuJune 9, 2011 at 1:27 PM

    बाबा को अगर अपनी हिफाज़त के लिए फ़ौज बनानी होती तो शायद उनके पास अपनी रक्षा के लिए फ़ौज बहुत है! लेकिन उन्होंने उन मासूम आन्दोलनकारी जनताओ की हिफाजत के लिए जो अपनी सुरक्षा खुद नहीं कर सकते ,अपने देश युवा वर्ग को उनकी सुरक्षा के लिए आगे आने की बात कही थी! खाना खाते वक़्त और सोने वक़्त कोई जानवर को भी नहीं मारता , लेकिन रामलीला मैदान में सोते हुए बूढ़े , बच्चे , और औरतो को मारा गया , ये दुस्साहस हमारी वर्तमान सरकार ने किया , मुझे तो जलिया वाला बाग़ याद आ गया!!!!!! बाबा ने कौन सा हिटलर वाला काम कर दिया, जबकि वर्तमान सरकार तो कर रही है! एक तरफ सभी ऍम. एल . ऐ , ऍम . पी की तनख्वाह बढ़ रही है, और दूसरी तरफ कम तनख्वाह पाने वाली जनता के लिए महंगाई बढ़ रही है ! अगर कोई लोकसभा या विधान सभा जा सकता है तो जाकर देखे की आज भी वहां भर पेट खाना मात्र २०/- में मिल जाता है! लेकिन आम जनता को बाहर ३०/- में पेट भरना भी मुश्किल है !!!

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  8. manu shrivastavJune 9, 2011 at 9:08 PM

    पहली बात तो ये की बाबा भागे ही थे.वो औरतो के एक ग्रुप के साथ भाग रहे थे, जो पुलिस के नज़रो में आ गयी और बाबा रामदेव गिरफ्तार हुए. उन्होंने अपनी गिरफ़्तारी खुद नहीं दी. ये बात उन्होंने खुद मीडिया के सामने बताई है.

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  9. manu shrivastavJune 9, 2011 at 9:23 PM

    बाबा राम देव ने जो मुद्दे उठाये हैं, उसका हर ऍम आदमी सम्मान करता है,लेकिन उनका ये आन्दोलन राजनीती से ही प्रेरीर था. अगर नहीं, तो आन्दोलन शुरू करने के पहले संघ के पास जाकर उनका समर्थन लेने का क्या औचित्य था ?

    उनका आन्दोलन अन्ना हजारे की तरह भी हो सकता था. बिना किसी राजनीतिक समर्थन के, तब उनको विश्वसनीयता जयादा होती.

    आम जनता भेंड बकरिया ही हैं, वो कभी कांग्रेस के पीछे चलती है, कभी भाजपा के, और अभी राम देव के पीछे चल रही है. बिना सोंचे समझे ?

    महंगाई मुद्दा है. पर इस लेखा का मुद्दा बाबा रामदेव के अहम् में आके अपने लिए सेना बनाना है. अपने अहम् की सन्तुस्ति के लिए सशत्र सेना बनाना संविधान का उल्लंघन है.
    सरकार ने गलत किया, सभी ने अपनी आँखों से देखा, पर रामदेव अपने अनुयायियों को छोड़ के ऐसे भाग गए, इस मुद्दे पे आँख बंद कर लेना कोई समझदारी की बात नहीं है.

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