ये भी ठीक ही है

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Sunday, June 5, 2011

राम (देव) लीला !!!

 June 05, 2011     aalekh, bhartiya janta party, congress, corruptions, manu srijan, ramdev lila     14 comments   

पहले मैं बता दूँ की , यहाँ प्रयुक्त "लीला" शब्द . संज्ञा, नहीं क्रिया है . बाबा राम देव की  लीला.
बाबा राम देव को कौन नहीं जानता! भाई ! पूछ नहीं रहा हूँ, बता रहा हूँ की कौन नहीं जानता बाबा राम देव को ! जो नहीं जानते हैं, तो भैया जान लो . नहीं तो बाबा ने अगर ठान लिया तो , शीर्षासन करा के ही मानेंगे, जैसा की अभी केंद्र सरकार को करा रहे हैं. 

बाबा राम देव ने मुद्दा तो एकदम  सही उठाया है. मैं समर्थन  करता हूँ  की विदेशी बैंक से काले धन की वापसी होनी चाहिए. ये पैसा वापस आये तो तो देश की तरक्की के कामो में प्रयोग होगा.

 काले धन के वापसी के इस आन्दोलन पे कुछ लोग ऐसे तुनके मानो किसी ने उनके पूंछ में पैर रख दिया हो. किंग खान तो बोल दिए की वो बाबा के इस आन्दोलन का समर्थन नहीं करते हैं. सही है भाई, जो काम करने का मन न करे उसे करना ही नहीं चाहिए. 

वैसे भी ये हिंदुस्तान है, चीन थोड़े न है. यहाँ कुछ भी कह सकते हो, कर सकते हो, संविधान में लिखा है. यहाँ, हिंदुस्तान में जहा एक किताब की दुकान पे जहाँ एक तरफ तुलसी दास द्वारा रचित ग्रन्थ "राम चरित मानस" बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से बेचीं और खरीदी जाती है, तो उसी दुकान में दूसरी  तरफ विश्वनाथ द्वारा लिखी हुई किताब "हिन्दू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदास " भी बड़े चाव और शौख से बेचीं और खरीदी जाती है. 

अब सवाल ये है की सारा देश बाबा राम देव को समर्थन दे रहा है. इस भ्रष्टाचार विरोधी और देश का पैसा , देश में वापस लेन की मुहीम में तो, किंग खान को उन्हें समर्थन न देने की वजह क्या है? मेरे मन में ख्याल आ रहा था की कही ऐसा तो नहीं की किंग खान का पैसा भी बाहर में जमा हो. पर मैंने वो ख्याल आने नहीं दिया.

बाबा राम देव भी, योग करते-कराते, बोर हो गए थे. सोच रहे होंगे, योग तो जन जन तक पहुचने वाला है. उसके बाद क्या? उसके बाद योगा से क्या होगा? अभी यही सोच रहे थे की  अन्ना हजारे के आन्दोलन और उसकी आपार सफलता से  आइडिया क्लीक किया होगा - "आहा ! आइडिया !" 

अचानक  से कोई सूझ(आइडिया) दीमाग में आने के लिए , मनोविज्ञान में 'सूझ का सिद्धांत' दिया गया है.

अन्ना हजारे के पास साधन नहीं था . बाबा राम देव के पास साधन है , जिसका जम के प्रयोग किया है. टेंट लगवाए, लाउड स्पीकर लगवाए, पानी पिने, नहाने सब का प्रबंध किया है. सही है.

तैयारी देख के सरकार भी बैक फुट पे थी. दूध से जला , भला छाछ भी फूंक के ना पिए? यहाँ तो पूरा समंदर उफान मार रहा था. 

ज्यादातर, मंत्रीयों मान मनौवल होता है. "मंत्री जी, हमरा कामवा करवा दीजिये ना !" परन्तु यहाँ मंत्री जी योगी बाबा को मनाने में लगे थे. आम आदमी को ये दृश्य देख के कलेजे में ठंडक नहीं पहुची हो तो, वो आम आदमी नहीं है.

सरकार तो कई मांगे मांग चुकी थी. कुछ पे विचार करने का प्रस्ताव था. पर बाबा जी को तो पूरा माँगा मनवाना था. वे योग नहीं हठ योग पे जो थे. 

एक बात बताइए ! क़त्ल की सजा फाँसी मिलाने पर भी कैदी , अभी तक महामहिम से क्षमा याचना के फेर में पड़ा हुआ, ये सपने देख रहा हो की उसे माफ़ी मिल जाएगी. औरतो का बलात्कार कर के, उनकी इज्ज़त और सामाजिक जीवन की हत्या करने के बाद भी , लोग खुल्ले आम घुमाते हैं. देश के बाहर से आतंकवादी आके, देश में लोगो को मौत के घाट उतरते हैं. और उनकी फाँसी की सजा महामहिम में पास पेंडिंग पड़ी हुई है, और आप हर भ्रस्टाचारी को फाँसी की सजा दिलाने की बात कर रहे हैं .

अब हर भ्रष्टाचारी को फाँसी होने लगी तो , हर साल सैकड़ो लोगो को फाँसी की सजा सुनाई जाने लगेगी. और सबकी की क्षमा याचना महामहिम के पास जायेगी. अभी तक ३५ -४० याचिकाओ पे सुनवाई नहीं हुई है. आप तो, महामहिम पे और वर्क प्रेशर डालना चाहते हो !

अब सरकार कुछ मुद्दों के लिए समय मांग रही थी तो देना चाहिए था. हर सरकार की अपनी मजबूरियां होती हैं.सरकार की हालत तो आप खुद ही देख रहे हैं. अभी लोकपाल वाली घंटी ठीक से बंधी नहीं थी की एक और घंटी  गले में बंधने के लिए तैयार देख के तिलमिलाना स्वाभाविक है.  उपर से बाबा ने पुरे ताम झाम और लाव लश्कर के साथ सत्याग्रह शुरू किया था. जले पे नमक. बाबा के आन्दोलन को मिलती लोकप्रियता और समर्थन देख के  सरकार के सरे कश बल ढीले हो गए.  हकबकाई सरकार ने कदम उठा लिया , एक  गलत कदम.

इस तरह से उसने अपना ही पैर कुल्हाड़ी पे दे मारा. पर क्या लगता है? की सरकार में बैठे लोग इतने नासमझ हैं? इसमें जरुर कोई दूसरा पेंच है.

भाइयों ! इतने स्ट्रेस और टेंशन के बाद आइये , थोडा खुश हो लिया जाये. विपक्षी दलों के साथ.

बाबा रामदेब द्वारा जलाई गयी इस आन्दोलन के आंच में अगर कोई रोटियां सेंक रही है , तो वो है विपक्षी दल. भ्रस्थाचार और आंतरिक कलह से आकंठ डूबी विपक्ष, सरकार को इस मुद्दे पे इतनी ख़ुशी ख़ुशी घेरने में लगी है. मानो अंधे के हाथ बटेर लग गयी है.

सबसे सही स्तिथि तो हमारी है. हम आम लोगो की. हमारी स्तिथि में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आन्दोलन के पहले जो स्तिथि थी , वही अब भी है. बस संतोष इतना ही की कोई तो है, जो हमारे लिए बोल रहा है.

खैर, आरोप- प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, आगे आगे देखिये होता है क्या !!





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14 comments:

  1. Sunil KumarJune 5, 2011 at 9:49 AM

    आपकी बात से सहमत है सही विषय को पकड़ा यह विचारणीय विषय है , आभार

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      Reply
  2. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai DwivediJune 5, 2011 at 10:59 AM

    आप ने बहुत सही लिखा है। इस पोस्ट का उल्लेख इधर http://anvarat.blogspot.com/2011/06/blog-post_05.html पर भी है।

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    Replies
      Reply
  3. डा० अमर कुमारJune 5, 2011 at 12:27 PM

    दरअसल हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ़ नहीं, उस व्यवस्था के खिलाफ़ चलनी चाहिये, जो इसे खाद पानी देकर पोस रही है ! बिडँबना यह है कि इस कड़ी में सबसे निचले पायदान पर हमारे मध्य के लोग यानि जनता खड़ी दिखती है । उतने बड़े जमावड़े में क्या 10% भी इतने स्वच्छ चरित्र के रहे होंगे, कि वह पूरी हनक से अपने को इस व्यवस्थित भ्रष्टव्यूह का अभिमन्यु सिद्ध कर सकें ? सभी यदि गाल बजाने में पारँगत नहीं हैं, तो इस प्र्श्न का ज़वाब देने में हमारे सूरमा बगलें झाँकते नज़र आयेंगे ।
    चमत्कारों के सहारे चलने वाले इस देश में, जहाँ नित एक नये भगवान पैदा होते हों.. बाबा द्वारा मास हिस्टीरिया पैदा कर देना अनोखा नहीं है , और उन्होंने इसे बखूबी भँजाया !

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      Reply
  4. आशीष श्रीवास्तवJune 5, 2011 at 4:31 PM

    बाबा के विरोध में सुनना कौन चाहता है ? यदि आप उनके विरोध में कुछ भी कहें तो आप देश-द्रोही, कांग्रेसी, सोनिया-भक्त, सेक्युलर है !

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  5. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish')June 5, 2011 at 5:32 PM

    पूरे प्रकरण पर निष्‍पक्षतापूर्वक आपके विचार पढकर अच्‍छा लगा।

    ---------
    मेरे ख़ुदा मुझे जीने का वो सलीक़ा दे...
    मेरे द्वारे बहुत पुराना, पेड़ खड़ा है पीपल का।

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    Replies
      Reply
  6. Shah NawazJune 5, 2011 at 7:12 PM

    पुरे घटनाक्रम का आपने अच्छा विश्लेषण किया...

    ReplyDelete
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      Reply
  7. manu shrivastavJune 5, 2011 at 11:57 PM

    दिनेश जी,
    आपने अपने ब्लॉग में मुझे थोड़ी सी जगह दी, ये मेरे लिए सौभग्य की बात है. बाबा के बारे में, अभी के सन्दर्भ में यही कहा जा सकता है, की अति सर्वत्र वर्जयेत , इस मामले में यही लग रहा .

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      Reply
  8. manu shrivastavJune 5, 2011 at 11:59 PM

    अमर जी,
    आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ मैं .
    व्यवस्था रूपी जड में ही दीमक लगा हो तो, फुल पत्तियों में रंग रोगन करके क्या फायदा ?

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  9. manu shrivastavJune 6, 2011 at 12:03 AM

    आशीष जी,
    आपने दिल की बात कही. ऐसे आरोप लग रहे हैं. जो बाबा पे उंगली उठा रहे हैं.
    बाबा रामदेव ने कहा था की सर्कार ९९ प्रतिशत बात मानने को तैयार थी, तो आपने सिर्फ एक प्रतिशत के लिए इतने बड़े मुद्दे को, मिट्टी में क्यों मिला दिया.
    बाबा अब भ्रष्टाचार का मुद्दा भूल गए हैं, और सरकार के खिलाफ विष वमन ही अब उनका मुद्दा रह गया है.

    ReplyDelete
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      Reply
  10. manu shrivastavJune 6, 2011 at 12:08 AM

    सुनील जी, जाकिर साब , शाह भाई,
    आप लोगो की दुआ, और आशीर्वाद चाहिए की हमेशा निष्पक्ष रह सकूँ.

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      Reply
  11. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish')June 6, 2011 at 1:46 AM

    ऐसे कठिन समय में जब लगभग सारा देश हिस्‍टीरिया के मरीज सा व्‍यवहार कर रहा हो, आप जैसों को बार बार पढना अच्‍छा लगता है।

    ---------
    बाबाजी, भ्रष्‍टाचार के सबसे बड़े सवाल की उपेक्षा क्‍यों?

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    Replies
      Reply
  12. ROHITJune 6, 2011 at 3:31 AM

    देश के लोग नही हिस्टरीया के रोगी है हिस्टरीया का दौरा तो उसको पड़ा जिसने लाख लोगो पर लाठीचार्ज करवाया.

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      Reply
  13. Tarkeshwar GiriJune 6, 2011 at 4:07 AM

    Bahut hi sundar aalekh hai.

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    Replies
      Reply
  14. राजेश उत्‍साहीJune 6, 2011 at 6:51 AM

    रामलीला जो फ्लाप हो गई।

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    Replies
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