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Tuesday, June 7, 2011

...एहिसे भैंस कहाली.

 June 07, 2011     ahise bhais kahali, bhojpuri, geet, manu shrivastav, manu srijan, हास्य     1 comment   

बहिना हई गईया के हो बैला के हई साली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

घास खाए हरिहर आ दूध देवे उजर,
सरसों के तेल नियन सु सु करे पियर,
दूध, दही, धी, माथा मिली, भैंस के ल तू पाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

झुमत चलेले आपन पूंछ हिलावत,
पीछे से टप टप  गोबर गिरावट.
जोखे खातिर तहरा के सिंघ पर उठाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली.  

भईस पे बैठी के  मिले जहाज के माज़ा,
देले   पटक   त   हो   जाला   हो   साजा, 
भईस जब चहेटे त लोग खुबे बजावे तली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

बिच सड़क पे बैठी खुबे पागुर करेले,
कतनो हटाई नहीं रहिया से हटेले,
पड़े न असर कतनो, चाहे बिन बजालीं 
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 






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1 comment:

  1. संजय भास्करJuly 20, 2011 at 10:09 AM

    मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है !

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