बहिना हई गईया के हो बैला के हई साली,
पांकी में खुबे नहाली , एहिसे भैंस कहाली.
घास खाए हरिहर आ दूध देवे उजर,
सरसों के तेल नियन सु सु करे पियर,
दूध, दही, धी, माथा मिली, भैंस के ल तू पाली,
पांकी में खुबे नहाली , एहिसे भैंस कहाली.
झुमत चलेले आपन पूंछ हिलावत,
पीछे से टप टप गोबर गिरावट.
जोखे खातिर तहरा के सिंघ पर उठाली,
पांकी में खुबे नहाली , एहिसे भैंस कहाली.
भईस पे बैठी के मिले जहाज के माज़ा,
देले पटक त हो जाला हो साजा,
भईस जब चहेटे त लोग खुबे बजावे तली,
पांकी में खुबे नहाली , एहिसे भैंस कहाली.
बिच सड़क पे बैठी खुबे पागुर करेले,
कतनो हटाई नहीं रहिया से हटेले,
पड़े न असर कतनो, चाहे बिन बजालीं
पांकी में खुबे नहाली , एहिसे भैंस कहाली.
मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है !
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