उन लहराते लटो को,
जब झटकती हो अपने चेहरे से,
तो सोचती होगी शायद तुम,
"कम्बख्त, आ जाते हैं,
बार बार चेहरे के आगे."
पर लटों को भी,
लहराना अच्छा लगता होगा,
मना करने पे भी कोई बात न माने,
यूँ ही नहीं होता .
July 29, 2011
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2 comments
मनु जी लगता है आप लटों में ही उलझ कर रह गए हैं.
ReplyDeletesunder...
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