बात तब की है जब बिहार में दसवीं, बारहवीं के एक्जाम में कुर्सी बेंच सब पास हो जाया करते थे. माने की जो पढ़ता था वो भी, जो टनडईली करता था वो भी. सं 1995 तक तो सब pass करते थे. achchhe number से. 1996 में कोर्ट के आदेश के बाद कदाचार मुक्त परीक्षा हुई कुछ सालों तक. तब जाकर कुर्सी बेंच को राहत प्राप्त हुई. नहीं तो हर साल कितना कष्टकारी है एक क्लास से दुसरे क्लास में जाना बिना हाथ pair वाले कुर्सी बेंच के लिए.
खैर, बात कर रहा था की कुर्सी बेंच सब पास कर जाता था. करे भी क्यों नहीं, सभी को 'चिट' करने की खुली छुट थी .लोग तो यहाँ तक कहते थे की हम तो टेबुल पे चाकू रख के लिखते हैं, मजाल है की कोई रोक ले हमें. इसमें कितनी सत्यता थी, पता नहीं.
शरीफ टाईप के लोग चिट कर के संतोष कर लेते थे. एक्जाम में लोग "बाहर से भी सपोर्ट" करते थे. कोई खिड़की से फर्रे पास करा रहा होता था तो कोई पत्थर में लपेट के फेंक रहा होता. इसी बहाने क्रिकेट की प्रक्टिस हो जाया करती थी. किसी की थ्रो फेंकने की तो किसी की कैच करने की.
हम भी पहुंचे थे देखने की कुर्सी बेंच कैसे पास होता है, आखिर हमारी भी बारी आने वाली थी पास करने की . देखा, एक्जाम रूम की खिड़की पे एक तमतमाया हुआ चेहरा प्रगट हुआ, चिल्लाया- "ये क्या भेजा है, इस चिट में? सादा पन्ना भेज दिया क्या ?"
चिट फेंकने वाला हड बडाया, बडबडाया - " सादा चिट चला गया क्या? लगता है की क्लीन चिट दे दी मैंने!"
तब पहली बार आवगत हुआ था मैं क्लीन चिट से. फिर तो कई बार या यूँ कहूँ की बार बार सुनाने को मिलाता रहा क्लीन चिट. इसने उसको क्लीन चिट दिया, उनने किसी और को क्लीन चिट दिया. पर मैंने आज तक नहीं सुना की किसी ने किसी से क्लीन चिट लिया.
अब कुछ दिन पहले की बात है. टीम अन्ना चौदह मंत्रियों सहित पी. एम. पे भी आरोप लगा रहे थे की ये सब भ्रष्ट हैं और हमारे पास इसका सबूत भी है. वगैरा वगैरा . फिर अन्ना ने खुद पीएम को क्लीन चिट देते हुए कहा - "पी एम इमानदार है, सरकार भ्रष्ट"
सरकार को भ्रष्ट तो बाबा रामदेव भी कहते हैं. उनका मानना है की भ्रष्ट लोगो का कला धन विदेशों में जमा है. वे तो एक निश्चित अमाउंट का उल्लेख करते हुए कहते हैं "इतना" जमा है विदेशी बैंकों में.
वो कौन है जो बाबा को अंदरूनी खबर दे जाता है. उस गुप्तचर को तो भारतीय गुप्तचर विभाग में होना चाहिए. ताकि गुप्तचर विभाग अपने माथे से ये कलंक तो हटा सकें की वे हमेशा विफल रहती हैं और कोई सूचना नहीं देती हैं.
बाबा राम देव, कालेधन की वापसी के लिए सांसदों से मिल के उनका समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं. बाबा सांसदों से मिलते जा रहे हैं और उनको क्लीन चिट देते जा रहे हैं. कुछ लोगो, मुलायम सिंह , शरद पवार , को बाबा की तरफ से क्लीन चिट मिल गई है की "वो भ्रष्ट नहीं हैं."
यानि क्लीन चिट वही दे सकता है जो आरोप लगा रहा हो.
बाबा की लिस्ट में कई सांसदों से मिलाने का प्रोग्राम है और अभी तो उन्होंने क्लीन चिट देना शुरू हीं किया है.
बाबा, मेरा एक सवाल है आपसे. आपके प्रोग्राम लिस्ट में कर्णाटक के मंत्रियों और ए. राजा बगैर के नाम हैं क्या ?
wah......sahi h......baba mulayam singh se haath mila ke ye bata diye ki unki dadhi me tinka nhi pura ka pura ped hai...
ReplyDelete