क्या करोगी जान के मेरे बारे में ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो इतना प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है .
क्या करोगी देख के मुझको, मेरी ऐ जाने जाँ
बस जान लो इतना प्यार का, ना देह होता है ना आकर होता है.
क्या करोगी सुन के मुझको, मेरी ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो इतना प्यार का, ना बोली होती है, ना आवाज़ होती है.
कर सको महसूस, तो कर लो, मुझे ऐ जाने जाँ,
बस जान लो इतना प्यार में, बस ख़ुशी होती , बस दर्द होता है.
बस जान लो इतना प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है .
क्या करोगी देख के मुझको, मेरी ऐ जाने जाँ
बस जान लो इतना प्यार का, ना देह होता है ना आकर होता है.
क्या करोगी सुन के मुझको, मेरी ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो इतना प्यार का, ना बोली होती है, ना आवाज़ होती है.
कर सको महसूस, तो कर लो, मुझे ऐ जाने जाँ,
बस जान लो इतना प्यार में, बस ख़ुशी होती , बस दर्द होता है.
kuch moulik likhne ki koshish honi chahiye likhte shamay un shabdo ka hi prayog karna chahiye jinpar aapko sabse jyada bharosha ho anyathha apni abhivaykti hote hue bhi ye dusare ke lagne lagti hi
ReplyDeleteबहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना....
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