कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की भारत की अपनी मज़बूरी हो सकती हैं. मसलन सबरजीत का पाकिस्तान की जेल में कैद होना, जिस तरह पाकिस्तान सबरजीत को पाकिस्तान में हुए बम धमाके का दोषी मानते हुए उसे फांसी सुनाने के बाद भी उसे फांसी नहीं दे रहा है. उसका ये ही कदम शायद कसाब को या अफज़ल को फाँसी के फंदे तक पहुँचने से रोक रही है.
वैसे ये जगविदित है की पाकिस्तान में सरबजीत को झूठा गया फसाया है और कसाब ने खुलेआम सारी दुनिया के सामने भारत में भारतीयों को मारा है. सरकार को चाहिए की कसाब को फांसी दे और सबरजीत को छुडाये.
लेकिन ये कूटनीति बहुत टेडी चीज़ होती है. कुछ कठोर कदम उठाने हीं नहीं देती.
वैसे ये जगविदित है की पाकिस्तान में सरबजीत को झूठा गया फसाया है और कसाब ने खुलेआम सारी दुनिया के सामने भारत में भारतीयों को मारा है. सरकार को चाहिए की कसाब को फांसी दे और सबरजीत को छुडाये.
लेकिन ये कूटनीति बहुत टेडी चीज़ होती है. कुछ कठोर कदम उठाने हीं नहीं देती.
कूटनीति करने के लिए सही लोग कहां हैं शासन में? ओसामा बिन लादेन के सैन्य अकादमी के बगल में पाए जाने पर तो इच्छाशक्ति रखने वाले रणनीतिज्ञ ऐसा माहौल पैदा कर देते की दुनिया ईरान - उत्तरी कोरिया से ज्यादा पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से डरती और उस पर रोक लगाती। पर भला हो हमारे राजनितिज्ञों का, उनके लिए तो वो 'ओसामा जी' थे ना। कैसे हमारे प्यारे पड़ोसी को दुनिया से अलग थलग करके कुत्ते की मौत मरने देते? खैर, जब भावी राष्ट्रपति के भोज में जेल में बंद नेता भी पहुंच रहे हों, तो ऐसे देश के कूटनीतिज्ञों से आप उम्मीद ही क्या रखेंगे?
ReplyDelete