एक किवदंती है.
एक पंडित जी थे, बहुत विद्वान थे. एज युजुवल.
उनकी शादी हो गयी , ससुराल वालो ने अपनी लड़की की बड़ाई में बोल दिया था की लड़की पढ़ी लिखी है. ये सुन कर पंडित जी बौखला गये थे. अब वो अपनी पत्नी के हर काम में गलती निकालते.
पत्नी ने दाल रोटी बनायी , पंडित जी भड़क गये - चावल क्यों नहीं बनाया?
पत्नी ने चावल बनाया, पंडित जी भड़क आज दही चुरा खाना था.
पत्नी ने दही चुरा परोसा पंडित जी भड़क गये , आज तो दाल रोटी बनानी चाहिए .
सोने का वक़्त होता, पत्नी ने पलंग पर बिछावन करी, पंडित जी भड़क ग्ये. मुझे चारपाई पर सोना है. चारपाई पर बिछावन लगा पंडित जी को चटाई पर सोना था. चटाई पर बिछावन लगा तो , आँगन में सोना था, आँगन में बिछावन लगा तो उनको पलंग पर सोना था. मतलब रोग कमी निकाल कर पंडिताइन की पिटाई हो जाती थी .
एक रात पंडिताइन ने पंडित जी को खाने में दही चुरा दिया. पंडित ने कहा उन्हें तो दाल रोटी खानी है. पंडिताइन बोली, वो भी बना के रखा है. अभी लाती हूँ . पंडित जी बोले - नहीं रहने दे, मुझे चावल दाल खानी है। पंडिताइन बोली - वो भी बना के रखी है, अभी लाती हॊ। अब पंडित जी को कुछ बहाना नहीं मिल सका आज तो चुप चाप खाना खाना पड़ा उनको .
खाना खा के सोने की बारी आयी .
सोने केलिए पलंग पर बिछावन लगा था. पंडित बोले मैं तो चटाई पर सोऊंगा , पत्नी बोली - वो भी लगा हुआ है, आप वहां भी सो सकते है। पंडित बोले नहीं मैं आंगन में सोउंगा . पंडिताइन बोली - आँगन में भी बिछावन लगा दिया है. आप वहां भी सो सकते हैं।
पंडित बोले मैं तो छत पर सोऊंगा, बहुत गर्मी है. पंडिताइन बोली - वह भी बिछावन लगा है.
दोनों पति पत्नी छत पर सोने गये .
गर्मी का मौसम था। आसमान पूरी तरह से साफ़ था. आसमान में आकाशगंगा निकली हुई थी। पंडित जी ने पूछा - वो क्या है?
पंडिताइन बोली - वो आकाश गंगा है. रात में भगवन अपने रथ पर सवार होकर, इसी रस्ते से गुजरते हैं।
यह सुनते हि पंडित जी उठे और पंडिताइन की पिटाई प्रारंभ कर दी . इस रास्ते से गुजरने वाला रथ मेरे ऊपर गिर गया तो , मैं तो मर हीं जाऊँगा। तू मुझे जान से मारना चाहती है, तभी मेरे सोने के लिए यहाँ पर बिछावन लगाया.
उस दिन भी पंडिताइन की पिटाई होने से नहीं बच सकी। पंडित जी ने नुस्क निकाल हीं लिया था.
आखिर वो एक पंडित जी थे, बहुत विद्वान थे. एज युजुवल.
उस दिन भी पंडिताइन की पिटाई होने से नहीं बच सकी। पंडित जी ने नुस्क निकाल हीं लिया था.
आखिर वो एक पंडित जी थे, बहुत विद्वान थे. एज युजुवल.
bahut bahut dhanyabaad. meri rachna ko samman dene ke liye.
ReplyDeletewaah manu waah!
ReplyDeleteअति होती है कुछ लोगों की
ReplyDeleteवाह,कभी तो ऊंट पहाड़ के नीचे आता ही है सुन्दर रचना
ReplyDeletebehtreen abhivaykti...
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