भईया जी, जूते की दुकान पे .- "मुझे जूता लेना है, लेटेस्ट डिजाइन दिखाओ !"
दुकानदार - "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मारने के लिए? "
June 18, 2011
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7 comments
मनु जी आज कल फेंक के मारने की जरुरत कुछ अधिक ही पड़ गयी है -सुन्दर कथन
ReplyDeleteकृपया फेंक के मारने के लिए -ठीक कर दें
भ्रमर५
haahaahaa
ReplyDeleteसुरेन्द्र जी, धन्यवाद आपका, गलती को सुधारने का मौका देने के लिए.
ReplyDeleteपर शायद गलती से ही, सही बात लिख गई है, मुझसे की "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मरने के लिए? "
किसी भी शक्तिशाली को जुटे मारने के बाद, उसके नुमाइंदे बहुत मारते हैं. जूता फेंक के मारना खुद केलिए मरने का इंतजाम करने जैसे है.
फेक मारना है सत्ता के एक चमचे का मुंह ताक कर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चुटकुला|
ReplyDeleteमनु जी बढ़िया है
ReplyDeleteकेजरीवाल से नही जोड़ूगा मै इसे ।।
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