ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Saturday, June 18, 2011

मुझे जूता लेना है !

 June 18, 2011     bhaiya ji, BJP, congress, jokes, juta, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, politics, shoe     7 comments   

भईया जी, जूते की दुकान पे .- "मुझे जूता लेना है, लेटेस्ट डिजाइन दिखाओ !"
दुकानदार - "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मारने के लिए? "


  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
Newer Post Older Post Home

7 comments:

  1. Surendra shukla" Bhramar"5June 18, 2011 at 6:07 AM

    मनु जी आज कल फेंक के मारने की जरुरत कुछ अधिक ही पड़ गयी है -सुन्दर कथन

    कृपया फेंक के मारने के लिए -ठीक कर दें

    भ्रमर५

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. मनोज कुमारJune 18, 2011 at 6:08 AM

    haahaahaa

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  3. manu shrivastavJune 18, 2011 at 6:24 AM

    सुरेन्द्र जी, धन्यवाद आपका, गलती को सुधारने का मौका देने के लिए.
    पर शायद गलती से ही, सही बात लिख गई है, मुझसे की "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मरने के लिए? "
    किसी भी शक्तिशाली को जुटे मारने के बाद, उसके नुमाइंदे बहुत मारते हैं. जूता फेंक के मारना खुद केलिए मरने का इंतजाम करने जैसे है.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  4. Arvind MishraJune 18, 2011 at 6:45 AM

    फेक मारना है सत्ता के एक चमचे का मुंह ताक कर

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  5. Patali-The-VillageJune 19, 2011 at 6:52 AM

    बहुत सुन्दर चुटकुला|

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  6. राकेश कौशिकJuly 7, 2011 at 9:24 PM

    मनु जी बढ़िया है

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  7. Rohit PathakAugust 14, 2016 at 3:58 PM

    केजरीवाल से नही जोड़ूगा मै इसे ।।

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
Add comment
Load more...

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ►  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ▼  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ▼  June (12)
      • मुझे जूता लेना है !
      • क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?
      • बाबा का अनशन टुटा !
      • भूखी जनता की चीत्कार
      • गर्ल फ्रेंड का अंतिम संस्कार !
      • एम एफ हुसैन नहीं रहे !
      • मिस इंडिया लागअ तारु ए गोरी !
      • अब ढोंगी बाबा हो गए !!!
      • ...एहिसे भैंस कहाली.
      • ये कैसा सत्याग्रह था ?
      • लडल कब छोडिहन सन !
      • राम (देव) लीला !!!
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com