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Friday, July 29, 2011

लटों का लहराना

 July 29, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     2 comments   

उन लहराते लटो को,
 जब झटकती हो अपने चेहरे से,
तो सोचती होगी शायद तुम,
 "कम्बख्त, आ जाते हैं,
 बार बार चेहरे के आगे." 
पर लटों को भी,
लहराना अच्छा लगता होगा,
मना करने पे भी कोई बात न माने,
यूँ ही नहीं होता . 
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Thursday, July 28, 2011

भाड़ में जा

 July 28, 2011     bhad me ja, hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher     1 comment   

साला टेंशन दे frustration 
जाने कौन सा ये  equation 
मेरी तरफ से कर ले mention 
fuck you, fuck off , भाड़ में जा  
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नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.

 July 28, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher, नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है     No comments   

नशीली आँखों का कमाल बाकी है,
इस साकी का सवाल बाकी है,
बेमानी है मधुशाला में जाना,
नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.


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आंसू

 July 28, 2011     hindi poem, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher     1 comment   


भावनाओ को मूक आवाज़ होते हैं,

ख़ुशी और गम दोनों में गालो को भिगोते हैं,

गौर से देखिएगा इन आसुओं को,

हमारे साथ वो भी हंसते रोते हैं .
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Wednesday, July 27, 2011

दिल चाक चाक सा हो जाता है .

 July 27, 2011     dil chak chak sa ho jata hai., hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     4 comments   


खामोश आँखे तेरी,
कहती हैं कितना कुछ,
जब तलक उसकी भाषा,
समझ ना आये.
वे,
खामोश सी लगती हैं,
और जब,
आती है समझ,
भाषा तेरे आँखों की,
बस, उसी पल,
दिल चाक चाक सा हो जाता है .

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तेरी आँखों में डूब जाने को जी करता है .

 July 27, 2011     hasya, manu shrivastav, manu srijan, shayari     2 comments   


तेरी आँखों में डूब जाने को जी करता है .
पर क्या करें ज़ालिम उधर कीचड़ बहुत है .
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Thursday, July 21, 2011

सूरज चाचू.

 July 21, 2011     kavita, manu srijan, manushrivastav, poem     2 comments   

चलते चलते थक गए,
शाम ढली तो रुका गए,
थोडा सा कर लो विश्राम, 
कल से फिर करना काम 
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Wednesday, July 20, 2011

खौफ

 July 20, 2011     jokes, manu srijan, manushrivastav, sms     2 comments   

बे खौफ वही रहते हैं जिनके दिल साफ़ होते हैं ,
खौफ खाने वालो को शायद हार्पिक के बारे में नहीं पता. 
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मैंने आपको फोल्लो किया है,

 July 20, 2011     kavita, manu shrivastav, manu srijan     8 comments   

कोई आपके पीछे भागे,
किसी के पीछे आप.
आप धापी लगी हुई है,
मची है भागम भाग.
कितने सारे ब्लॉग यहाँ पे,
हर ब्लॉग को आके पढ़िए ना,
मैंने आपको फोल्लो किया है,
आप भी मुझको करिए ना. 
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गोविन्द तिवारी को नहीं जानते?

 July 20, 2011     manu shrivastav, manu srijan, vishesh     No comments   

शाम के  बजे अख़बार पढ़ा तो पता लगा की गोविन्द तिवारी कौन है.?
एक दिन में ट्विटर की दुनिया में छा जाने वाला शख्स ! 

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रुसवा

 July 20, 2011     manu shrivastav, manu srijan, shayari, sher     2 comments   

नाम उसका बताने से कोई गुरेज़ नहीं हमें ,
पर सोंचते हैं, एक बेवफा को रुसवा क्यों किया जाये .
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Tuesday, July 12, 2011

दहेज़ कु-प्रथा !

 July 12, 2011     dahej, hasya, kavita, manu srijan, manushrivastav, vyang     8 comments   

तुमसे मैं कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ ज़माने से, 
मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
पर डरता हूँ बताने से .
क्या पता कहीं तुम्हारा भाई , पहलवान हो
पीछे पड़ जाये मेरी जान को
वो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगे
और मैं पुकारने लगूँ भगवान को
तुम्हारे पिता जी देखने में ही खूसट लगते हैं,
हर वक़्त मुझे घूरते रहते हैं,
मैं कौन हूँ?  क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछते रहते हैं.
तुम्हरी माँ मुझे मुझे बहुत अच्छी लगती है,
कुछ नहीं कहती है,
पर एक कमी उसकी मुझे खलती है,
कहीं नहीं जाती वो , घर में ही रहती है
(तुमसे मिलाने नहीं आ पता हूँ  !)
जब मियां बीवी राज़ी 
तो क्या करेंगे पिताजी , माता जी 
मैंने उन दोनों को समझाया 
और प्यार से बताया 
शादी तो मैं आपकी बेटी से ही करूँगा
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए
टीवी कार फ्रिज तो सही देते हैं
इसके अलावा दो चार लाख रूपया चाहिए 
दहेज़ जैसी कुप्रथा आज भी 
देश में चल रही है,
यही वो कारण है जिससे आज भी
बहुत सी औरतें जल रही हैं.  
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Saturday, July 9, 2011

वन्स मोर !

 July 09, 2011     hasya, jokes, manu shrivastav, once more     7 comments   

कोई बड़ा सेलिब्रेटी अगर पोट्टी कर के भी आये तो उसके फैन्स क्या चिल्लायेंगे ?
 "वन्स मोर ! वन्स मोर !"
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