Friday, July 29, 2011
उन लहराते लटो को,
जब झटकती हो अपने चेहरे से,
तो सोचती होगी शायद तुम,
"कम्बख्त, आ जाते हैं,
बार बार चेहरे के आगे."
पर लटों को भी,
लहराना अच्छा लगता होगा,
मना करने पे भी कोई बात न माने,
यूँ ही नहीं होता .
Thursday, July 28, 2011
भाड़ में जा
July 28, 2011
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नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.
July 28, 2011
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Wednesday, July 27, 2011
Thursday, July 21, 2011
Wednesday, July 20, 2011
Tuesday, July 12, 2011
दहेज़ कु-प्रथा !
July 12, 2011
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तुमसे मैं कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ ज़माने से,
मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
पर डरता हूँ बताने से .
क्या पता कहीं तुम्हारा भाई , पहलवान होपीछे पड़ जाये मेरी जान कोवो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगेऔर मैं पुकारने लगूँ भगवान को
तुम्हारे पिता जी देखने में ही खूसट लगते हैं,
हर वक़्त मुझे घूरते रहते हैं,
मैं कौन हूँ? क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछते रहते हैं.तुम्हरी माँ मुझे मुझे बहुत अच्छी लगती है,
कुछ नहीं कहती है,
पर एक कमी उसकी मुझे खलती है,
कहीं नहीं जाती वो , घर में ही रहती है
(तुमसे मिलाने नहीं आ पता हूँ !)
जब मियां बीवी राज़ी
तो क्या करेंगे पिताजी , माता जी
मैंने उन दोनों को समझाया
और प्यार से बताया
शादी तो मैं आपकी बेटी से ही करूँगा
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए
टीवी कार फ्रिज तो सही देते हैं
इसके अलावा दो चार लाख रूपया चाहिए
दहेज़ जैसी कुप्रथा आज भी
देश में चल रही है,
यही वो कारण है जिससे आज भी
बहुत सी औरतें जल रही हैं.