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Tuesday, July 12, 2011

दहेज़ कु-प्रथा !

 July 12, 2011     dahej, hasya, kavita, manu srijan, manushrivastav, vyang     8 comments   

तुमसे मैं कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ ज़माने से, 
मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
पर डरता हूँ बताने से .
क्या पता कहीं तुम्हारा भाई , पहलवान हो
पीछे पड़ जाये मेरी जान को
वो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगे
और मैं पुकारने लगूँ भगवान को
तुम्हारे पिता जी देखने में ही खूसट लगते हैं,
हर वक़्त मुझे घूरते रहते हैं,
मैं कौन हूँ?  क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछते रहते हैं.
तुम्हरी माँ मुझे मुझे बहुत अच्छी लगती है,
कुछ नहीं कहती है,
पर एक कमी उसकी मुझे खलती है,
कहीं नहीं जाती वो , घर में ही रहती है
(तुमसे मिलाने नहीं आ पता हूँ  !)
जब मियां बीवी राज़ी 
तो क्या करेंगे पिताजी , माता जी 
मैंने उन दोनों को समझाया 
और प्यार से बताया 
शादी तो मैं आपकी बेटी से ही करूँगा
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए
टीवी कार फ्रिज तो सही देते हैं
इसके अलावा दो चार लाख रूपया चाहिए 
दहेज़ जैसी कुप्रथा आज भी 
देश में चल रही है,
यही वो कारण है जिससे आज भी
बहुत सी औरतें जल रही हैं.  
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8 comments:

  1. जाट देवता (संदीप पवाँर)July 12, 2011 at 10:18 AM

    दानव कभी मानव नहीं बन सकता,
    दहेज के असली लोभी कभी सुधर नहीं सकते?

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. डॉ॰ मोनिका शर्माJuly 12, 2011 at 10:23 AM

    प्रभावित करती सशक्त रचना ..... प्रासंगिक भाव

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  3. रेखाJuly 12, 2011 at 10:52 PM

    बेहतरीन और प्रासंगिक रचना

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  4. mahendra srivastavaJuly 13, 2011 at 2:42 AM

    अच्छी रचना..
    शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  5. devendra gautamJuly 13, 2011 at 6:48 AM

    bahut khoob...

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  6. anuJuly 13, 2011 at 10:43 PM

    आज भी दहेज़ का दानव मुह फाड़े खड़ा है ......अच्छी रचना बहुत खूब

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  7. Rakesh KumarJuly 20, 2011 at 2:52 AM

    क्या बात है मनु भाई.उनकी माता जी आपको अच्छी लगीं यह एक सुखद पहलु है.पटाने में आप माहिर हैं,बात बन ही जानी चाहिये.
    प्यार की बोलियेगा बोली
    दहेज को मारियेगा गोली,
    बस प्यार से ही भर लीजियेगा अपनी झोली.
    आपकी,उनकी,उनके भाई,माता,पिता सभी की बन जायेगी टोली.
    टोली बनने की खुशी में हमें निमंत्रण देना न भूलिएगा.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  8. संजय भास्करJuly 20, 2011 at 10:07 AM

    ........प्रशंसनीय रचना - बधाई

    ReplyDelete
    Replies
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